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अब बाईपास में की होल व रोबोटिक सर्जरी संभव

| October 7, 2012 | 0 Comments

ह्दय रोग शिविर में 500 पंजीयन

udaipur. भारत में प्रतिवर्ष 27 पतिशत लोग ह्दय रोग के कारण मरते है। देश में ह्दय रोगियों की संख्या में हो रही वृद्धि को देखते हुए वर्ष 2030 तक 5 करोड़ ह्दय रोगी हो जाएंगे। देश की कुल जनसंख्या के 20 प्रतिशत लोग वर्ष 2010 में ह्दय रोग से ग्रस्त थे।

देश में वर्तमान में करीब 118 मिलीयन लोग उच्च रक्तचाप  व करीब 50 मिलीयन डायबिटीज से ग्रस्त है जो वर्ष 2025 तक बढक़र क्रमश: 213 तथा 70 मिलीयन हो जाऐंगे। उक्त चौंकाने वाले आकंड़े हार्ट केयर एसोसिएट, साल तथा राजस्थान हॉस्पीटल के प्रख्यात ह्दय रोग विशेषज्ञ डॉ. अनिल जैन ने महावीर इन्टरनेशल, लायन्स क्लब लेकसिटी, श्री जैन श्वेताम्बर वासूपूज्य महाराज मन्दिर ट्रस्ट, इनरव्हील क्लब उदयपुर के संयुक्त तत्वावधान में मेवाड़ मोटर्स वाली गली स्थित श्री जैन श्वेताम्बर वासूपूज्य महाराज मन्दिर धर्मशाला में आयोजित एक दिवसीय नि:शुल्क ह्दय रोग शिविर में आयोजित एक समारोह में बतायें। शिविर में 500 से अधिक ह्दय रोगियों के पंजीयन हुए तथा 160 लोगों ने इको टेस्ट करवाया। उन्होनें बताया कि ह्दय रोग की रफ्तार इसी गति से जारी रही तो वर्ष 2020 तक देश में मरने वालों की संख्या में सर्वाधिक योगदान ह्दय रोग का रहेगा। विदेशों में ह्दय रोग के प्रति वहां की जनता काफी जागरूक है जबकि भारत में इसका अभाव पाया जाता है। विदेशों की तुलना में भारत में 5-10 वर्ष ही लोगों को हार्ट अटैक हो जता है। देश में 50 प्रतिशत हार्ट अटैक के मामले 55 वर्ष से कम तथा 25 प्रतिशत मामले 40 वर्ष से कम आयु के लोगों में देखने को मिलते है। भारत में ह्दस रोगियों की बढ़ती संख्या में सर्वाधिक योगदान जेनेटिक का रहता है और जनता इससे अनभिज्ञ रहती है।
इस अवसर पर ह्दय रोग विशेषज्ञ डॉ. श्रीनिवास माल्या ने बताया कि देश में प्रति हजार में 4 बच्चे ह्दय रोग की बीमारी के साथ जन्म लेते है। यदि वह बीमारी माइल्ड स्तर की है तो इसका पता उन्हें बहुत देरी से चलता हे और यदि वह सीवियर किस्म की है तो उसका ऑपरेशन तुरन्त ही कराना होता है। दिनचर्या में बदलाव, व्यायाम करने में कंजूसी, दूषित खान-पान, तनाव, धूम्रपान आदि के चलते ह्दय रोग में बढ़ोतरी हो रही है। ह्दय रोग की बीमारी बचपन से ही आरंभ हो जाती है। बीमारी होने से पूर्व उसकी जानकारी रख कर उसकी नियमित जांच कराते रहना चाहिए। अब देश में ह्दय की बाईपास सजरी 99 प्रतिशत सुरक्षित हो गयी है।
की-होल व रोबोटिक सर्जरी- ह्दय की बाईपास सर्जरी का नाम लेते ही रोगी के पसीने छूट जाते है वह इससे बचने की जुगत में लग जाता है लेकिन अब देश में की-होल व रोबोटिक सर्जरी भी संभव हो गयी है लेकिन इसे विशेषज्ञ चिकित्‍सक ही कर पाता है। रोबोटिक सर्जरी काफी महगी होने के कारण यह पॉपुलर नहीं हो पायी है। रोबोटिक सर्जरी में काम आने वाली  मशीन ही दस करोड़ की आती है। की-हॉल सर्जरी में ह्दय के पास ही छेद कर धमनियों की सर्जरी कर दी जाती है।
निश्चेतना विशेषज्ञ डॉ. नयन शस्त्री ने बताया कि वर्ष 2025 तक भारत विश्व में ह्दय रोग के मामलों में नं.1 हो जाएगा जो हमारें लिए शर्मनाक बात होगी। अब एक एनेस्थेटिक ऑपरेशन के दौरान ही मरीज का इको कार्डियोग्राफी भी कर सकता हे जबकि पूर्व में ऐसा संभव नही था। देश में हैदराबाद,चैन्नई, दिल्ली के एम्स, एस्कोर्ट्स व मेंदाता मेडीसिटी हॉस्पीटल में रोबोटिक ह्दय सर्जरी की सुविधा उपलब्ध है।
शिविर संयोजक डॅा. एल.एल.धाकड़ व सह-संयोजक जे.एस.पोखरना ने बताया कि शिविर अत्यन्त सफल रहा जिसमें 500 से अधिक लोगों ने पंजीयन करा कर अपने ह्दय की जांच करायी। लायन्स क्लब लेकसिटी के अध्यक्ष एम.एस.खमेसरा, एन.एस.खमेसरा ने बताया कि शिविर मे 160 से अधिक लोगों ने इको व ट्रेडमिल टेस्ट कराकर अपनी समस्या का निदान पाया।
शिविर में उपरोक्त चिकित्सकों के अतिरिक्त डॉ. भरत त्रिवेदी, डॉ. विशाल गुप्ता, डॉ. विनीत सांखला, डॉ. अजय जैन, डॉ. सतीश पटेल, डॉ. राजेश भूखर तथा तकनीशियनों में क्रिश्चियन केनी, अमर, बंकिम, कुलरी व योगेज ने सहयोग प्रदान किया।

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