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विकास के लिए जरूरी है प्राकृतिक सम्पदाओं का सदुपयोग : अग्रवाल

| March 14, 2013 | 0 Comments

देश सक्षम है आयात पर होने वाले 25 लाख करोड़ सालाना खर्च को कम करने में

Anil Agarwal-vedantaUdaipur. वेदांता ग्रुप के चेयरमैन अनिल अग्रवाल का कहना है कि देश में अकूत प्राकृतिक सम्पदा के भण्डार हैं लेकिन उनके सदुपयोग के बजाय, भारत करोड़ों रुपए मात्र उनके आयात पर खर्च कर रहा है।

भारत में विश्व का तीसरा सबसे अधिक कोयले का भण्डार है लेकिन हर साल हम बहुतायत में कोयला आयात करते हैं। भारत में उद्योगों, व्यवसायों एवं घरेलू क्षेत्र में ऊर्जा की जरूरत हैं परन्तु अपने घरेलू कोयले का उत्पादन न बढ़ाने पर भारत कैसे ऊर्जा के क्षेत्र में अपना लक्ष्य पूरा कर पाएगा? उनका कहना है कि बढ़ती मंहगाई दर तथा घटती उत्पादन की दर (जीडीपी) इस बात का संकेत है कि भारत को वापस प्रगति की ओर बढ़ने की जरूरत है। निरन्तर पेट्रोल व डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी आम जनता के लिए तकलीफें बढ़ा रही है। भारत तकरीबन 25 लाख करोड़ रु. सालाना आयात पर खर्च कर रहा है। इसमें से तकरीबन 8 लाख करोड़ केवल तेल आयात पर खर्च होता है जो भारत की जीडीपी का तकरीबन 10 प्रतिशत है। सोने से चांदी, रॉक फास्फेट, पेट्रोलियम पदार्थ, रक्षा उपकरण तथा कोयला आदि हम अधिकतम वस्तुएं आयात कर रहे हैं जबकि इनमें से अधिकतम भारत में प्राकृतिक सम्पदा के रूप में पर्याप्त मात्रा में मौजूद है। भारत विभिन्न करों से जो भी अर्जित करता है उसका एक महत्वपूर्ण हिस्सा आयात का खर्च उठाने में खप जाता है।
केयर्न इण्डिया के माध्यम से देश के 25 प्रतिशत तेल का उत्पादन कर रही कंपनी वेदांता के चेयरमैन अग्रवाल का कहना है कि भारत में सोने की बहुत अधिक खपत है फिर भी हम 100 फीसदी सोने का आयात करते हैं। भारत में सोने के भण्डार मौजूद हैं जिन्हें विकसित करने की जरूरत है। किसानों को हम सब्सिडी दे रहे है तो दूसरी तरफ हम उर्वरक में इस्तेमाल होने वाली रॉक फास्फेट का 95 प्रतिशत आयात कर रहे हैं। अग्रवाल ने बताया कि भारत में तेल व गैस के उत्पादन के लिए कम से कम 15 से 20 कंपनियों की जरूरत है जिससे भारत को अधिक से अधिक आत्मनिर्भरता मिल सके। जिस कच्चे तेल को भारत 3-4 डॉलर प्रति गैलन की दर से उत्पादन करता है, उसी तेल को भारत 113-115 डॉलर के खर्च पर आयात करता है।
एक सवाल के जवाब में उन्होंमने कहा कि भारत में सम्पदाओं की खोज के लिए एक आसान एवं पारदर्शी नीति होनी चाहिए, जिसे आसानी से समझा व लागू किया जा सके। सरकार को उद्योग जगत पर उन नीतियों को लागू करने का भरोसा होना चाहिए। सरकार को चाहिए कि इन प्राकृतिक सम्पदाओं से लाभ लेने के लिए ‘रेवन्यू शेयरिंग नीति’ अपनाये जिससे पारदर्शिता बढ़ेगी तथा राज्य-केन्द्र सरकार को बहुतायत राजस्व अर्जित होगा।
अग्रवाल ने कहा कि चीन जैसा देश बॉक्साइट जैसा धातु न होने के बावजूद 20 मिलियन टन एल्यूमिनियम बना रहा है वहां भारत में 3500 मिलियन टन बॉक्साइट भण्डार होने के बावजूद मात्र 1.5 मिलियन टन एल्युमिनियम धातु का उत्पादन कर पा रहा है। कनाड़ा, ब्राजील, आस्ट्रेलिया तथा साउथ अफ्रीका जैसे अनेकों देश अपनी प्राकृतिक सम्पदाओं के सदुपयोग के परिणास्वरूप निरन्तर प्रगति की ओर अग्रसर हैं।
उन्होंने कहा कि लौह अयस्क के क्षेत्र में भी हम पिछड़ रहे हैं । हम 600 मिलियन टन लौह अयस्क बनाने में सक्षम है परन्तु बना केवल 125 मिलियन टन ही रहे हैं। भारत में पर्याप्त मानव संसाधन मौजूद है। हमारी क्षमताएं दुनिया के सर्वश्रेष्ठ देशों में गिनी जाती है। इन्हीं क्षमताओं को सही स्वरूप देने के लिए, जरूरत है, भारत में ही इन प्रतिभाओं को रोजगार उपलब्ध कराना। उद्योगों के संचालन एवं विकास से ना सिर्फ रोजगार के अवसरों में बढ़ोतरी होगी अपितु राज्य व केन्द्र सरकार के राजस्व में भी निरन्तर वृद्धि होगी। भारत एक प्रगतिशील देश है तथा निरन्तर व स्थायी प्रगति के लिए जरूरी है कि हम अपनी अवश्यरकताओं को समझें तथा तदनुसार नीतियों को सरल एवं पारदर्शी बनाए व लागू करें।

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