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आरोपों के घेरे में नारायण सेवा संस्थान की कार्यशैली

| March 30, 2013 | 1 Comment

nssUdaipur. गत दिनों नारायण सेवा संस्थान के एक कर्मचारी द्वारा मुंबई से लाए जा रहे नकद दस लाख रुपए में से आठ लाख रुपए कम निकलने के मामले में न सिर्फ संस्थान की कार्यशैली पर प्रश्नचिह्न लगे हैं बल्कि जनता में चर्चा है कि देश-विदेशों से विकलांगों की सेवा के नाम पर जो पैसा खातों से आता है, वह तो आयकर विभाग की नजर में रहता है लेकिन ऐसे नकद पैसों का विभाग को भी कैसे पता लगता होगा?

उल्लेखनीय है कि गत दिनों संस्थान का एक कर्मचारी मांगीलाल गायरी मुंबई ऑफिस से करीब साढ़े दस लाख रुपए लेकर आ रहा था। वह मुंबई में ही सीट छोड़कर बस से उतरा। वापस लौटने पर देखा तो बैग से आठ लाख रुपए गायब थे। जानकारी के अनुसार वह मुंबई के वसई थाने में गया लेकिन वहां उसकी रिपोर्ट दर्ज नहीं की गई। इसके बाद उसने उदयपुर पहुंचकर संस्थान के पदाधिकारी को जानकारी दी। एक समाचार-पत्र के अनुसार पदाधिकारी ने अधिकारी पुलिस मित्र से उक्त कर्मचारी की पिटाई भी करवाई लेकिन पता नहीं चलने पर हिरणमगरी थाना पुलिस को सूचना दी गई। हालांकि दोनों ने किसी तरह की पिटाई से इनकार भी किया।
आश्चर्य इस बात का कि मुंबई से उदयपुर लाने के लिए इतनी बड़ी राशि नकदी के रूप में क्या जरूरत पड़ी। इसे बैंक अकाउंट से भी ट्रांसफर किया जा सकता था। क्यों इतना रिस्क लिया गया। जब एक को-ऑपरेटिव बैंक भी अपना थोड़ा सा कैश लाने, ले जाने के लिए गार्ड का इस्तेमाल करता है तो फिर दस लाख रुपए लाने के लिए निहायत एक ग्रामीण व्यक्ति को वहां भेज दिया। जानकारों के अनुसार विकलांगों की सेवा के नाम पर बनाए गए ट्रस्‍ट के नाम चंदा एकत्र करने के लिए देश-विदेश में संस्‍थान के कार्यालय खुले हुए हैं। बाकायदा इलेक्‍ट्रॉनिक मीडिया में प्रचार प्रसार कर खाता नंबर दिया जाता है ताकि इस खाते में इच्‍छुक अपनी राशि जमा करा सकें। लेकिन ट्रस्‍ट के नाम पर लाई जाने वाली नकद राशि किस खाते में जा रही है। इस बारे में आयकर विभाग को पता लगाना चाहिए।

कोई भी वीवीआईपी आए या कोई भी दानदाता आए, उसे अपने संस्थान में लाकर उसे इम्प्रेस करने का कोई तरीका नहीं छोड़ा जाता। चर्चा है कि दान प्राप्त करने का आधुनिक युग में कोई भी तरीका संस्थान ने नहीं छोड़ा है। चाहे वह इलेक्ट्रॉनिक मीडिया हो या प्रिन्ट .. सभी में विकलांगों की सेवा को हथियार बनाकर अंधाधुंध पैसा कमाने में पीछे नहीं है।

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Comments (1)

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  1. Narayan meghwal says:

    Nyc

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