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संयुक्त परिवार टूटने से बढ़ रहे हैं मानसिक रोगी

| October 2, 2013 | 0 Comments

सुविवि में विस्तार व्या़ख्यान

021025Udaipur. आधुनिकता की अंधी दौड़ व संयुक्त परिवारों में विघटन के कारण समाज में मानसिक रोगियों की संख्या में वृद्धि हो रही है। शारीरिक की तरह मानसिक समस्याओं को भी सही समय पर उपचार की जरूरत होती है।

ये तथ्य  भारतीय समाज की सामान्य मानसिक समस्याएं विषयक विस्तार व्याख्यान में उभरकर आए। इसका आयोजन सुविवि के मनोविज्ञान विभाग के तत्वावधान में किया गया था। मुख्य वक्ता के रूप में गीतांजलि कॉलेज के मनोरोग विभाग के अध्यक्ष डॉ. डी. एम. माथुर ने अवसाद, सिजोफ्रेनिया तथा मेनिक मानसिक रोगों के लक्षण, निदान व उपचार पर प्रकाश डाला। मुख्य अतिथि फेकल्टीे चेयरमैन प्रो. फरीदा शाह ने सकारात्मक सोच को मानसिक स्वास्थ्य के लिए महत्वपूर्ण माना। सह अधिष्ठाता डॉ. जी. एस. कुम्पावत ने अध्यक्षीय उद्बोधन दिया।
021026विभाग के ओशो व अन्य विद्यार्थियों ने न्यूज लेटर का अतिथियों से विमोचन करवाया। विद्यार्थियों ने डॉ. शिखा शर्मा के निर्देशन में एक लघु नाटिका के माध्यम से प्रस्तुत किया कि किस प्रकार सोच शारीरिक विकारों को उत्पन्न कर सकती हैं। विभाग द्वारा प्रत्येक शनिवार प्रातः 9 से 10 बजे तक मानसिक व, शैक्षिक समस्याओं के लिए तथा बुद्वि, व्यक्तित्व आदि परीक्षणों के लिए निशुल्क परामर्श सेवा के आरम्भ की घोषणा विश्वा चौधरी ने की। आरम्भ में विभागाध्य क्ष डॉ. कल्पना जैन ने अतिथियों का स्वागत करते हुए कहा कि आधुनिक जीवन में सुविधाओं के साथ कार्य सरल हो गया है। फलस्वरूप खुशियां नहीं बल्कि तनाव तथा मानसिक रोग बढ़ रहे हैं। रोगों की समय पर पहचान तथा विशेषज्ञ द्वारा उपचार  आवश्यक है। धन्यवाद डॉ. तरुण शर्मा ने दिया। संचालन डॉ चारु धनकर ने किया। इस अवसर पर महाविद्यालय के विभिन्न विभागों से प्रो निर्मला जैन, प्रो सीमा मलिक, डॉ. अरुणप्रभा चौधरी, इत्यादि प्राध्यापक व विद्यार्थी उपस्थित थे। मनोविज्ञान विभाग के अतिथि प्राध्यापकों डॉ. सीमा जैन, डॉ. अनीता, डॉ. गजरा, डॉ अंकिता, डॉ. वीनस, डॉ. कीर्ति आदि ने कार्यक्रम को सफल बनाने में योगदान दिया।

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Category: News

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