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इतिहास का हो पुनर्लेखन : शेखावत

| January 31, 2014 | 0 Comments

विद्यापीठ में राजस्थान के इतिहास पर संगोष्ठी

310103उदयपुर। भागवंत विश्व विद्यालय अजमेर के कुलपति डॉ. लोकेश शेखावत ने इतिहासकारों का आव्हान किया कि वो ऐतिहासिक तथ्यों को संतुलित नजरिये से देखकर इतिहास का पुनर्लेखन करें। अवसर था शुक्रवार को माणिक्यलाल वर्मा श्रमजीवी महाविद्यालय के इतिहास एवं संस्कृति विभाग की ओर से आयोजित दो दिवसीय ‘राजस्थान के इतिहास के आयाम’ विषयक पर राष्ट्रीय संगोष्ठी के समापन का।

बतौर विशिष्ट अतिथि डॉ. शेखावत ने कहा कि अंग्रेजों ने हमारे गौरवमय इतिहास को हटाकर गुलामी का अशुद्ध इतिहास हमें दिया है। अतः आज आवश्यहकता है कि हम पुनः हमारे गौरवशाली इतिहास के जरिये परिचित हों। उन्होंैने कहा कि राजस्थान के गौरवमय इतिहास के संरक्षण की जरूरत है। संगोष्ठी निदेशक डॉ. नीलम कौशिक ने बताया कि मुख्य अतिथि महापौर रजनी डांगी ने कहा कि इतिहास ऐसा लिखा जाए जो हमारे स्वाभिमान का अहसास कराये तथा हमारी आने वाली भावी पीढी़ समाज, देश को झकझोर दे। साथ ही हमें विरासत तथा धरोहर का संरक्षण करने की आवश्याकता है।
310104अध्यक्षता करते हुए कुलपति प्रो. एस. एस. सारंगदेवोत ने कहा कि आज आवश्युकता इस बात की है कि इतिहास उस दीपक के समान है जो अंधकार के आवरण को दूर कर सत्य के प्रकाश को फैलाता है। यह अतीत का एक आईना है। साथ ही आवश्य कता इस बात की है कि मध्यकालीन एवं आधुनिक इतिहास को वापस लिखा जाए जो समकालीन प्राकृतिक विज्ञानों, भूगर्भ विज्ञान, भोतिक रसायन शास्त्र, पुरा वनस्पति, जीव विज्ञान के अलावा मानव शास्त्र, वैज्ञानिकों द्वारा अतीत के पर्यावरण पर किए गए अध्ययनों का मूल्यांकन करना होगा तभी हम राजस्थान का समग्र इतिहास लिख सकेंगे। धन्यवाद डॉ. गिरीशनाथ माथुर ने दिया। आयोजन सचिव डॉ. हेमेन्द्र चौधरी ने सेमीनार की रिपोर्ट प्रस्तुत की एवं सेमीनार में आये प्रस्तावों की जानकारी दी व सेमीनार में राजस्थान के विभिन्न आयामों पर 95 शोध-पत्रों का वाचन हुआ।
इनके रहे महत्वपूर्ण पत्र : समापन समारोह में प्रो. जे.सी. उपाध्याय, डॉ. एस. पी. व्यास, डॉ. राजेन्द्र नाथ पुरोहित, डॉ. मनोरमा, डॉ. उर्मीला शर्मा, डॉ. मनोज भटनागर, डॉ. रेणु पंत, उत्तराखंड के डॉ. राजपाल नेगी, प्रो. वी.के. वषिष्ठ, डॉ. जीवन सिंह खरकवाल ने अपने विचार व्यक्त किए।
ये हुए सम्मानित : संगोष्ठी अध्यक्ष डॉ. सुमन पामेचा ने बताया कि समापन समारोह में इतिहास के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य करने पर नटनागर शोध संस्थान सीतामऊ मध्यप्रदेश के निदेशक डॉ. मनोहर सिंह राणावत तथा पुरातत्व के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य करने पर डॉ. ललित पाण्डेय का प्रशस्ति पत्र, शॉल एवं स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया गया।

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