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खेमपुर में ढूंढोत्सव यानी बेटी बचाओ परम्परा

| March 16, 2014 | 0 Comments

160302उदयपुर। समय के साथ सभी परम्परा बदल गई है। लोग समय के साथ अपनी परम्परा भूलते जा रहे है। आज जहाँ लड़की को पैदा होने से पहले ही मारा जा रहा हैं वहीं उदयपुर जिले की मावली तहसील के अन्तर्गत खेमपुर ग्राम पंचायत के धारता गाँव में बेटी बचाने की अनोखी परम्परा आज भी कायम है।

होली के समय ढूंढोत्सव के दौरान जो कार्यक्रम होता है उसकी शुरूआत सबसे पहले गांव में जिस परिवार में लड़की होती हैं जिसकी पहली होली होती है उस परिवार से सभी ग्रामवासी करते है। गांव के सभी लोग ढोल-नंगाडों के साथ सबसे पहले उस परिवार के यहाँ जाते हैं और उस लड़की को जिसका जन्म हुआ हैं जिसकी प्रथम होली हैं उसकी लम्बी उम्र के लिये प्रार्थना करते है। उसके बाद फिर दूसरी जगह जिस परिवार में लड़का या लड़की होती हैं वहाँ जाते हैं।
160303ढूंढोत्सव मनाने का तरीका : आज समय के साथ सभी परम्परा बदल गई है। लोग समय के साथ अपनी परम्परा भूलते जा रहे है। शहरों में लोगों के पास समय नहीं है। शहरों में ढूंढोत्सव सामूहिक रूप से एक साथ मनाया जाता है लेकिन धारता गांव आज भी अपनी परम्परा निभा रहा है। गाँव के ज्यादातर लोग मुम्बई और गुजरात में अपना व्यवसाय करते है। कुछ परिवार उदयपुर में भी रहते है। ढूंढोत्सव परम्परा आज भी कायम है इस बात का इंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है गाँव के ज्यादातर लोग व्यवसाय के लिये बाहर रहते है लेकिन होली के समय उन्हें गाँव की ढूंढोत्सव परम्परा खींच लाती है।
होली पर यहां पर सामूहिक ढूंढोत्सव नहीं होता बल्कि यहां गांव के सभी लोग जिन-जिन परिवारों में लड़की या लड़का होता है जिनकी पहली होली है वहां ढोल-नगाड़ों के साथ जाते है और हर परिवार में ढूंढोत्सव का कार्यक्रम होता है। एक परिवार में ढूंढोत्सव का कार्यक्रम समाप्त होने पर फिर दूसरे परिवार के यहाँ जाते है, फिर तीसरे परिवार के जहां लड़की या लड़का होता है जिनकी पहली होली है। ऐसे ही पूरे दिन एक-एक कर पूरे गांव में जिस भी परिवार में लड़का या लड़की होती है जिनकी पहली होली होती है वहाँ ढूंढोत्सव मनाने के लिये जाते है। पूरा गांव होली मग्न हो जाता है।
चाहे लड़का हो या लड़की उसको जब गांव वाले ढूंढते है तो गोद में लेकर केवल लड़की ही बैठती है। चाहे बेटा हो या बेटी ढूंढते समय गोद में लेकर केवल लड़की ही बैठती है। उसकी लम्बी उम्र के लिये सब प्रार्थना करते हैं। वहीं लड़की के परिवार द्वारा गाँव के सभी लोगों को गुड़-मिठाई खिलाकर सबका मुंह मीठा कराया जाता हैं। यही गांव की परम्परा हैं आज के युग में लड़की बचाने की।

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