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भारतीय संस्कृति में सदा महिलाओं का सम्मान : शर्मा

| September 6, 2017 | 0 Comments

पेसिफिक में महिला सशक्तिकरण पर वार्ता

उदयपुर। भारतीय संस्कृति में सदा ही महिलाओं को सम्मान दिया जाता रहा है और समाज में उनका स्थान बराबरी का रहा है। यह बात पेसिफिक विश्वविद्यालय के प्रेसीडेन्ट प्रो. भगवती प्रकाश शर्मा ने महिला सशक्तिकरण पर आयोजित वार्ता में कही।

प्रो. शर्मा ने भारतीय इतिहास से अनेक उदाहरण देते हुए कहा कि किस प्रकार हमेशा ही भारतीय समाज में महिलाओं का स्थान प्रतिष्ठित रहा है और उन्हें कभी भी पुरूषों से कमतर नहीं आंका गया। उन्होंने आठवीं शताब्दी में आदि शंकराचार्य और मण्डन मिश्र के मध्य हुए शास्त्रार्थ का उदाहरण देते हुए कहा कि वे दोनों इतने उच्च स्तर के ज्ञानी थे कि उनके स्तर का निर्णायक नहीं मिल रहा था। अंततः एक महिला, मण्डन मिश्र की पत्नी भारती को ही, जो स्वयं में अत्यधिक ज्ञानवान थी, निर्णायक बनाया गया। और भारती ने इमानदारी का प्रमाण देते हुए, जब उसके पति मण्डन मिश्र शास्त्रार्थ में पिछड़ने लगे, तब शंकराचार्य को विजयी घोषित किया। प्रो. शर्मा ने संयुक्त परिवारों की परम्परा का जिक्र करते हुए भी कहा कि हमेशा ही परिवारों में बुआ, बड़ी बहन आदि का स्थान ऊँचा रहा है। और हर छोटे-बड़े निर्णय में घर की वरिष्ठतम महिला की राय को प्रधानता देने की हमारी परंपरा रही है। उन्होंने कहा कि मध्यकाल में विदेशी आक्रमणों के कारण महिलाओं को थोड़ा पीछे जाना पड़ा और समाज पुरूष प्रधान बन गया। उन्होंने आज के बदलते समय में महिलाओं के बराबरी के स्थान को पुनर्स्थापित करने की आवश्यकता पर बल दिया।
पेसिफिक विश्वविद्यालय की प्रोवोस्ट प्रो. महिमा बिड़ला ने बताया कि छात्र-छात्राओं को महिलाओं के लिए बनाए गए विशेष कानूनी प्रावधानों की जानकारी देने हेतु विश्वविद्यालय के ‘वीमेन डवलपमेन्ट सेल’ द्वारा इस वार्ता का आयोजन किया गया था।
वीमेन डवलपमेन्ट सेल की अध्यक्ष प्रो. हरविन्दर सोनी ने जानकारी दी कि वार्ता में रिसोर्स पर्सन पेसिफिक लॉ कॉलेज के डा. राहुल व्यास व डा. प्रियंका कालरा ने प्रतिभागियों को महिलाओं के सशक्तिकरण एवं सुरक्षा से संबंधित सभी कानूनी प्रावधानों की विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने उपस्थित छात्रों को भी महिलाओं के प्रति अपनी सोच को बदल कर उन्हें सम्मान देने की भारतीय परंपरा का निर्वहन करने की सलाह दी। वक्ता डा. प्रियंका कालरा ने अपने उल्लेखनीय उद्धबोधन में उपस्थित छात्राओं को किसी भी परिस्थिति में भयभीत न होकर, पूरी हिम्मत के साथ मुकाबला करने की सीख दी। सेमीनार में पेसिफिक विश्वविद्यालय के विभिन्न महाविद्यालयों के 69 विद्यार्थियों ने भाग लिया।

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