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छह शब्द सेवर्स का ध्यान रखें वरिष्ठ नागरिकः शर्मा

| October 2, 2017 | 0 Comments

दो दिवसीय संगोष्ठी का समापन

उदयपुर। सुविवि के कुलपति प्रो जेपी शर्मा ने कहा कि वरिष्ठ नागरिकों को अपने जीवन में इन छह शब्दों सेवर्स का ध्यान रखना चाहिए। अगर इनका ध्यान रख लिया तो कभी परेशान नही होना पड़ेगा।

वे वरिष्ठ नागरिक परिषद और एमपीयूएटी की पेंशनर्स वेलफेयर सोसायटी के साझे में वरिष्ठ नागरिकों की जीवन शैली रू विकल और चुनौतियां विषयक दो दिवसीय संगोष्ठी के समापन समारोह को मुख्य अतिथि के रूप में संबोधित कर रहे थे। विशिष्ट अतिथि पेसिफिक विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो बीपी शर्मा एवं समाजसेवी किरणमल सावनसुखा थे।
सुविवि कुलपति प्रो शर्मा ने कहा कि सबसे पहले सुबह उठकर साइलेन्स (मौन रहकर योग, प्राणायाम करें, खुद की क्या उपादेयता है पर विचार करें) का उपयोग करें। दुसरा शब्द ए से अफर्मेशन यानी सकारात्मक सोच रखें। तीसरा वी से विज्यूअलाइजेशन यानी बच्चों से संपर्क रखें। बच्चंे आपको कभी बूढा नही होने देंगे। चौथा ई से एज्युकेशन,यह निरंतर प्रक्रिया है। ज्ञान में हमेशा वृद्धि करते रहना चाहिए। पांचवा आर से रीडिंग यानी जो पढ़ते हैं उनके संपर्क में रहें, खुद भी पढ़ते रहें। दो घंटे भी दिन में पढ़ा तो कभी बोरियत नही होगी। एस यानी स्क्राइब, जो पढ़ें, लिखते रहें। युवाओं, बच्चों से बांटे। ऐसा कोई विषय नही रहा जो छूट गया हो।
उन्होेंने कहा कि वरिष्ठ नागरिक जागरूक हैं, सामाजिक सरोकारों के साथ जिंदा रहते हैं कि उन्हें वरिष्ठ कहना ही बेमानी है। परिषद निस्संदेह सभी बिंदुओं का समावेश कर ऐसी परियोजना तैयार करेंगे कि समाज को री इवेंट करने में सहयोगी होगी।
अध्यक्षता करते हुए एमपीयूएटी के कुलपति प्रो उमाशंकर शर्मा ने कहा कि आज राष्ट्रपिता और पूर्व प्रधानमंत्री का स्मरण करते हुए हर्ष है कि आज वैज्ञानिक और मनोवैज्ञानिक समस्याओं का समाधान किया जा सकता है। अध्यात्म, योग, दर्शन, ध्यान के विषयों को इस संगोष्ठी में शामिल किया गया है। सभी उद्देश्य पूरे होंगे। वृद्धावस्था पुण्यार्जन के लिए होती है। हमारा सामाजिक दायित्व भी है। हम जो भी उनके लिए कर सकें, निश्चित रूप से करें।
विशिष्ट अतिथि पेसिफिक विश्वविद्यालय के प्रो प्रेसिडेंट प्रो बीपी शर्मा ने कहा कि ज्ञान के आधार पर देश को दिशा देने का दायित्व सभी वरिष्ठ नागरिकों का है। कभी नही सोचें कि हम करुणा के पात्र हैं। दिशा निर्धारण में अक्षम हैं, ये विचार कभी नही आना चाहिए। आयु व्यक्ति के सामाजिक जीवन में कभी बाधक नही बन सकती। यामिनी मजूमदार 68 वर्ष की आयु में विधवा हो गयी। मकान गिरवी रखकर ड्राई क्लीन का व्यवसाय किया। आज वे 86 वर्ष की हैं। 45 कर्मचारियों को काम दे रखा है। किरण शॉ ने 10000 रुपये से व्यवसाय शुरू किया। दुनिया की सबसे बड़ी बायो फार्मास्युटिकल कंपनी में उनका नाम आता है। जीवन की किसी भी अवस्था में कोई भी कमजोर नही होता। देश में ऊंच नीच का भेदभाव बहुत ज्यादा घर कर गया है। शुद्र कहाँ से आया है। अपनी मेहनत से मूल्यवान वस्तुओं का उत्पादन करने वाला शुद्र है। अपेन आप को सेवानिवृत्त कभी न मानें। काम करते रहें। 80 के दशक में पहले भारत में इंटरकास्ट मैरिज नही होती थी। अपने जीवन का लक्ष्य तय करना चाहिए। देश, परिवार के लोए उपयोगी कैसे बन सकें, यह सोचना चाहिए। प्रतिदिन एक चुनौती के रूप में लेना चाहिए। आज व्हाइट कॉलर जॉब्स में सिक्युरिटी नही रह गयी है। 800 विश्वविद्यालयों में 80 प्रतिशत गेस्ट फैकल्टी हैं। पीढ़ी अंतराल आ रहा है उसे कैसे पातेंगे, इस पर सोचने की जरूरत है। अमेरिका में प्रति 30 में से 9 बच्चे ही माता पिता के साथ रहते हैं। आने वाली पीढ़ी कैसी होगी, इसका अंदाजा आज के बच्चों को देखकर लगाया जा सकता है। परिवार हमारी अमूल्य निधि है। सुख का आधार परिवार है। आज के टीवी सीरियल्स के डायलॉग्स भी उसी तरह से लिखे जाते हैं कि वो बच्चों में प्रतिरोध, उपहास का भाव पैदा कर रहे हैं। आज आवश्यकता इस बात की है कि परिवार समाज में सकारात्मक वातावरण बनाएं, ये काम सिर्फ हम ही कर सकते हैं और कोई नही।
टीएन दक ने संगोष्ठी में प्राप्त सभी पत्रों की जानकारी देते हुए अनुशंसा की। संगोष्ठी के आधार पर डॉक्यूमेंट बनाया गया है। समारोह में किरणमल सावनसुखा, रणजीतसिंह सोजतिया, प्रेमप्यारी भटनागर, केरणसिंह नलवाया, पुरुषोत्तमलाल रूंगटा, फतहलाल नागोरी, शशिकुमार शर्मा, लक्ष्मणदास बजाज, परशुराम, लोके ड्रेसिंग मेहता, ओपी सिंघल, भोपालसिंह कोठारी, प्रकाश कंठालिया, सुमतिप्रकाश जैन, हीरालाल कटारिया, कुलदीप पारीख का सम्मान किया गया। कार्यक्रम का संचालन डॉ. एलएल धाकड़ ने किया। आभार परिषद सचिव केएस नलवाया ने व्यक्त किया।
स्मारिका का हुआ विमोचन- आयोजकों द्वारा बहुपृष्ठीय रंगीन प्रकाशित स्मारिका का अतिथियों ने विमोचन किया।
इससे पूर्व आज तकनीकी सत्रों में प्रख्यात लेखक एवं पत्रकार नईदिल्ली के फारूख अर्गली ने कहा कि इस्लाम और सूफी दर्शन में जीवन शैली को जानने से पूर्व इस्लाम धर्म का थोड़ा परिचय आवश्यक है क्योंकि सूफी दर्शन वस्तुतः इस्माली अध्यात्म का ही स्वरूप है। इस्लाम बड़ी तीव्रता से फैला। इसका कारण वह क्रंातिकारी संदेश था जिसमें उंच-नीच,गोरे-काले, अमीर-गरीब सभी मनुष्य एक समान थे। इस्लामी विधान में कोई मनुष्य केवल अपने सद्कर्मो ,सत्य,प्रेम,न्याय एवं अल्लाह के बन्दों की सेवा के आधार पर आदर और सम्मान का पात्र माना गया है।
मनोविज्ञान विभाग की पूर्व विभागाध्यक्ष डॉ. विजयलक्ष्मी चौहान ने कहा कि वरिष्ठ नागरिक हमारी सामाजिक सम्पदा है न कि भार। जिसे सहेज कर रखा जाना चाहिये। मानव शारीरिक और मानसिक रूप से तथा भावनात्मक धरोहर के रूप में समाज में क्रियाशील है। वरिष्ठजन भी जीवन अवधि के विभिन्न पड़ावों में सतत चलने वाली क्रिया-प्रतिक्रिया है, जिनमें संवेदनशीलता प्रत्यशात्मकता एवं भावात्मकता निरन्तर चलती रहती है।
एमएलएसयू के दर्शन विभाग के पूर्व विभागाध्यक्ष डॉ. एस.आर.व्यास ने कहा कि जैन एवं बौद्ध दर्शन यह मानते है कि जीवन अनुभवेय है न कि प्राप्ततेय। इसलिये जीवन में होने वाली समस्त उपलब्धियां लक्ष्य नहीं अपितु अनुभव को विस्तार देने के साधन मात्र है। अणुव्रत प्रवक्ता महेन्द्र कर्णावट ने कहा कि संयम एवं आत्मकल्याण का मार्ग महाव्रत एवं अणुव्रत है। आध्यात्मिकता की व्याख्या के अनुसार जातिवाद,मानव की एकता को छिन्न-भिन्न करता है तथा हीनता-अहं को बढ़ाता है। भोगवाद ने प्रकृति प्रदत्त संसाधनों को घटाया है तो नई बीमारियों को जन्म दिया है।
शिक्षाविद् एवं समाजसेवी डॉ. प्रदीप कुमावत ने कहा कि आधुनिक जीवन शैली में योग व ध्यान का योगदान बहुत आवश्यक है। मानसिक तनावों से जर्जर होता वर्तमान का मनुष्य संतोया व आनन्द की तलाश में इधर-उधर भटक रहा है। अंतिम दिन संगोष्ठी को अशोक आर्य, भंवर सेठ,डॉ. एल.के.भटनागर,डॉ. शोभालाल औदिच्य, डॉ, एस.के.वर्मा,कैलाश बिहारी वाजपेयी, डॉ. के.एल.कोठारी,डॉ. राकेश दशेारा, सीए.गजेन्द्र कुमार बोहरा, डॉ. रेणु रघुवीर, डॉ. अमृतलाल तापड़िया, भंवरलाल व्यास, प्रो. डॉ. बी.पी.भटनागर, चोसरलाल कच्छारा,डॉ. आई.एल.जैन, डा.ॅ पल्लव भटनागर,डॉ. के.पी.व्यास,,वैद्य रामपाल सेामानी,डॉ. ए.के.संचेती, डॉ. जेनेन्द्र जोशी, आर.के.चतुर,एन.एस.खमेसरा,डॉ. नरेश भार्गव,प्रफुल्ल नागर,डॉ. पी.सी.कंठालिया ने अपने विचार रखें। इससे प्रसार शिक्षा निदेशालय के पूर्व निदेशक संगोष्ठी के निदेशक डॉ. एल.एल.धाकड़ ने संगोष्ठी की संक्षिप्त जानकारी दे कर इसके महत्व के बारे में बताया। इस अवसर पर डॉ. प्रदीप कुमावत ने वरिष्ठ नागरिकों से योग करवा कर इसका महत्व बताया।

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Category: News

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