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बेटियों को आत्म संरक्षण को प्रेरित करें : भार्गव

| January 9, 2018 | 0 Comments

जैन समाज की महिलाओं की खो खो स्पर्धा का समापन

उदयपुर। श्री महावीर युवा मंच संस्थान महिला प्रकोष्ठ एवं जैन इंटरनेशनल ट्रेड ऑर्गेनाइजेशन लेडीज विंग के साझे में दो दिवसीय खो खो स्पर्धा का समापन मंगलवार को शुभ केसर गार्डन में हुआ। मुख्य अतिथि जेल अधीक्षक प्रीता भार्गव थीं। अध्यक्षता संस्थान के मुख्य सरंक्षक राजकुमार फत्तावत ने की।

फाइनल में सुविधिनाथ ने वासुपूज्य की टीम को हराया। वासुपूज्य टीम उपविजेता रही। अभिनंदन टीम तृतीय, सुमतिनाथ चतुर्थ तथा सुपार्श्वनाथ टीम पांचवें स्थान पर रही।
भार्गव ने कहा कि अपने भीतर छिपी हुई बालिका को जीवित रखने के लिए आप सभी को बधाई। एकता की भावना जो आज आयी है, उसे सहेज कर रखें। वी की भावना अंदर रखें, सारे रावण एक तरफ स्वतः हो जाएंगे। जो हो रहा है उसे सहन नहीं करें उनका सामना करें। विरासत में भी स्त्री और पुरुष एक दूसरे के पूरक हैं। मां-बेटे के रिश्ते को शिशु चुनौती दे रहा है। ऐसा कोई भी शिशु आपके आसपास हो तो उसके कुत्सित प्रयास को असफल करें। बच्चियों को आत्म सरंक्षण के लिए मार्शल आर्ट का प्रशिक्षण दिलाएं। ना करना सीखना होगा, रिजेक्ट करना आना चाहिए।
फत्तावत ने कहा कि 3 दशक से समाज के कार्य कर रहा हूँ। लगता भी है कि आधी शक्ति को भी मजबूत करना चाहिए। ये खेल ऐसे ही हैं। खेल एक जगह एकत्र करने का माध्यम हैं। 24 घंटे में से 5 मिनट समाज के लिए भी निकालें और सोचें कि क्या अच्छा चिंतन दे सकते हैं। अपनी भावी पीढ़ी के स्वरूप पर विचार करें। यह संकल्प कर के जाएं कि सामाजिक बंधु की बुराई नही करेंगे। समाज हमारा है, हम समाज के हैं।
प्रकोष्ठ की अध्यक्ष विजयलक्ष्मी गलुण्डिया ने बताया कि इससे पहले सुमतिनाथ और अभिनंदन तथा सुविधिनाथ और वासुपूज्य टीमों में सेमी फाइनल खेले गए। उन्होंने बताया कि महिला सशक्तिकरण के प्रयासों में लुप्त हो रहे खेलों के प्रति वापस जागरूक करना इसका उद्देश्य है। घर से निकलकर गृहस्थी के काम से समय निकालकर कुल 14 टीमों ने स्पर्धा में भाग लिया। नारी अबला नही है, ये आज यहां खो खो स्पर्धा में भाग लेकर फिर साबित किया है। 168 प्रतिभागी महिलाओं में आधे से अधिक प्रतिभागी 50 वर्ष से अधिक उम्र की हैं। प्रतिभागी सभी टीमों को सांत्वना पुरस्कार प्रदान किये गए।
निर्णायक महेश सोनी के निर्देशन में राजेश जीनगर, खेमराज प्रजापत, दीपक व्यास और मोहन मीणा ने स्पर्धा का सफल आयोजन करवाया। अतिथियों का मेवाड़ी पगड़ी, उपरना ओढा स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मान किया गया। सोनी ने कहा कि इस आयोजन को पचपन से बचपन तक कहें तो कोई अतिशयोक्ति नहीं। इस बचपन को बनाये रखें। प्रतिभागी महिलाओं ने भी अपने अनुभव सुनाए। मंगलाचरण प्रकोष्ठ की बहनों ने किया। आभार संस्थान अध्यक्ष चंद्रप्रकाश चोरडिया ने जताया। इस अवसर पर महेंद्र तलेसरा, सुधीर चित्तोड़ा, मौजूद थे।

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