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राजस्थान बनेगा पोषण राज्य

| February 19, 2018 | 0 Comments

नरिषिंग राजस्थान मिषन 2022 पर कार्यषाला

जयपुर। पोषण के पिछड़े राजस्थान की स्थिति को बेहतर बनाने के लिए राज्य में पोशण नीति को घर-घर तक पहुंचाने की जरूरत है। तभी पोषण राजस्थान मिषन पूरा हो सकेगा।

मिषन की नीतियों को लागू करने के लिए आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, आषा, ए.एन.एम. और स्वास्थ्य कर्मियों की सेवाएं व विभिन्न विभागों द्वारा योजनाओं को कमजोर वर्ग और गरीबों तक पहुंचाने और नीति की क्रियान्विती को सही रूप से लागू करने के लिए पुरजोर प्रयास किए जाएंगे। ये प्रयास तभी सफल हो पाएंगे जब गंभीरता और समर्पण भाव से इस पर कार्य किया जाएगा। साथ ही इसका रिव्यू करने की भी जरूरत है कि समाज में क्या नए बदलाव हो रहे हैं, उसी आधार पर नीतियों और तकनीकी में बदलाव करेंगे तो लक्ष्य को पूरा करने में काफी हद तक सफल हो सकेंगे। महिला एवं बाल विकास विभाग की ओर से पोषण राजस्थान, विजन 2022 के लिए पहला राज्य स्तरीय अन्तर्विभागीय नीति और योजना निर्माण के लिए आयोजित एक दिवसीय कार्यशाला में राश्टीय पोशण तकनीकी बोर्ड के सदस्य डा. एम.के. भान ने कहा। उन्होंने बताया कि नीतियों को पुरजोर तरीके से लागू करने की गुणवत्ता में अभी भी कई कमियां हैं, जिन्हें नए तौर-तरीकों और रूपरेखा के जरिए दूर करने से लक्ष्य की प्राप्ति समय पर कर पाएंगे।
कार्यशाला की अध्यक्षता राजस्थान सरकार के मुख्य सचिव एन.सी. गोयल द्वारा की गई। उन्होंने कहा कि कुपोशण को दूर करने वाली चुनौतियों और प्रभावी नीतियों को लागू करने के लिए मानवीय संसाधन का विकास करके प्रभावी क्रियान्वयन किया जाएगा। राजस्थान में अंतर्विभागीय समन्वय के लिए चल रही राजस्थान मुख्यमंत्री जल स्वावलंबन योजना एक अच्छा उदाहरण है, जिसकी वजह से प्रदेष में जल स्तर बढ़ा है, कृशि उत्पादन बढ़ा है।
महिला एवं बाल विकास विभाग सचिव रोली सिंह ने मिषन का स्वागत करते हुए जानकारी दी कि राज्य के 24 जिलों में कुपोषण को दूर करने की नीतियों को पुरजोर तरीके से अभिसरण किया जाएगा। कार्यक्रम में यूनिसेफ की इसाबेल बारदेम ने बताया कि यूनिसेफ इस मिषन के लक्ष्य को पूरा करने के लिए हर स्तर पर सहयोग करेगी। जिला स्तर से लेकर गांवों तक मिषन के जरिए लोगों को लाभान्वित करने में पूर्ण सहयोग करेगी। समेकित बाल विकास विभाग की षुचि षर्मा ने सभी का आभार व्यक्त किया। उन्होंने बताया कि मिशन का लक्ष्य शून्य से 6 वर्ष की आयु के 38.4 प्रतिशत कमजोर और दुर्बल बच्चों को वर्ष 2022 तक 25 प्रतिशत तक पहुंचाना है। इस कार्यशाला में यूनिसेफ से अरजन डे और मंजरी पंत, ममता के कार्यकारी निदेषक सुनील मेहरा, समेकित बाल विकास विभाग से षुचि षर्मा, वल्र्ड बैंक से आदेष चतुर्वेदी और बांसवाड़ कलेक्टर भगवती कलाल ने अलग-अलग विशयों पर व्याख्यान दिए।

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Category: News

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