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दीवार को धक्का नहीं मारें, खुद को मैनेज करें : मदान

| April 14, 2018 | 0 Comments

अंतरराष्ट्रीय मोटिवेशनल स्पीकर हिमेश मदान ने लुभाया शहरवासियों को

उदयपुर। अंतरराष्ट्रीय मोटिवेशनल स्पीकर हिमेश मदान ने कहा कि दीवारों को धक्का नहीं मारें बल्कि खुद को समझने का प्रयास करें। एक ही कॉलेज में एक ही टीचर से पढ़े विद्यार्थी कोई मेरिट में आता है, कोई टीचर को दोष देता है, कोई पेपर को दोष देता है, इसे कहते हैं दीवारों को धक्का मारना।

वे शनिवार को फोर्टी (फेडरेशन ऑफ राजस्थान ट्रेड एन्ड इंडस्ट्रीज) उदयपुर की ओर से आयोजित मोटिवेशनल सेमिनार को संबोधित कर रहे थे। हिमेश ने खचाखच भरे हॉल में बार बार शहरवासियों को यस यस के बजाय आहो आहो कहने पर मजबूर कर दिया। दो घंटे के सेशन में बार बार आहो आहो से हॉल गूंजता रहा। उन्होंने कहा कि सीखने की कोई उम्र नही होती लेकिन फिर भी 5 से 12 वर्ष की उम्र सबसे सही होती है क्योंकि उस समय दिमाग खाली होता है। उसमें उस समय जो डाला जाए, वही जिंदगी भर रहता है। हमेशा अपनी गलतियों के लिए दूसरों को जिम्मेदार ठहराना छोड़ दें। खुद को मैनेज करें, जिम्मेदार बनें।
उन्होंने सचिन तेंदुलकर का उदाहरण देते हुए कहा कि उस समय की बेस्ट क्रिकेट एकेडमी ने सचिन को रिजेक्ट कर दिया लेकिन अपना प्रण तय कर लेने वाले सचिन तेंदुलकर को आज दुनिया याद करती है।
उन्होंने किसी भी समस्या के हल में भी समस्या आने पर नकारात्मकता उसमें आढ़े आती है। आज के समाचार पत्र, टीवी चैनल्स सभी जगह नेगेटिव लोग मिलते हैं। प्रोत्साहित करने वाले लोग कम मिलते हैं जो हमेशा हतोत्साहित करते हैं। सिर्फ अपने विचार बदलें, आपके जीवन में हमेशा सकारात्मकता आएगी। उन्होंने कार्यक्रम में एक्टिविटी भी करवाई और शहरवासियों को झूमने पर मजबूर कर दिया। फोर्टी जयपुर के वरिष्ठ उपाध्यक्ष अरुण अग्रवाल ने भी संबोधित किया।
आरम्भ में फोर्टी उदयपुर के संभागीय अध्यक्ष प्रवीण सुथार ने उदयपुर में पहली बार ऐसा सेमिनार आयोजित करने और उसमें शहरवासियों की उम्मीद से अधिक भागीदारी दिखाने पर आभार व्यक्त करते हुए आने वाले समय में भी ऐसे आयोजन करने की प्रतिबद्धता जताई।
कार्यक्रम में फोर्टी जयपुर के महेश काला, वैश्य समाज के अनिल नाहर, नारायण सेवा के प्रशांत अग्रवाल, चित्तौड़ फोर्टी के अशोक अजमेरा आदि का उपरना ओढाकर स्वागत किया गया। कार्यक्रम में उपाध्यक्ष लोकेश त्रिवेदी, सेमिनार संयोजक विशाल दाधीच, शरद आचार्य, मनीष व्यास, प्रवीण उषानिया, राजकुमार सुथार आदि ने सहयोग दिया। संचालन नेहा ने किया।

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