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मंगल सिंह को मिली नई जिन्दगी

| July 16, 2018 | 0 Comments

ट्रेन से उतरतें समय पैर फिसलने से कूल्हे की हड्डी और पेषाब की थैली हुई बुरी तरह क्षतिग्रस्त, पीएमसीएच में सफल आॅपरेषन

उदयपुर। कहते है मारने वाले से बचाने वाला बडा होता है। और ऐसा ही हुआ भरतपुर निवासी मंगल सिंह के साथ। दरअसल राज.पुलिस में कार्यरत 30 वर्षीय मंगल सिंह ट्रेन से उतरतें समय पैर फिसलने की वजह से ट्रेन के नीचे आ गया और ट्रेन के गुजरने के बाद भी वह बच गया, लेकिन उसके कूल्हे ( पेल्विस) की हड्डी बूरी तरह से चकनाचूर हो गई साथ ही पेषाब की थैली ( ब्लैडर) भी पूरी तरह से क्षतिग्रस्त हो गई।

परिजन उसे पेसिफिक मेडीकल काॅलेज एवं हाॅस्पीटल लेकर आए जहाॅ विना समय गवाॅए आर्थोपेडिक सर्जन डाॅ.सालेह मौहम्मद कागजी,मूत्र रोग एवं रिकन्स्ट्रक्षनल सर्जन डाॅ.हनुवन्त सिंह राठौड,ऐनेस्थेटिक डाॅ.प्रकाष औदिच्य एवं सुभाष शर्मा की टीम ने छह घण्टे तक आॅपरेषन कर रक्तस्त्राव को रोककर कूल्हे की हडडी के मल्टीपल फेक्चरों को जोडा साथ ही पेषाब की थैली ( ब्लैडर) को नया बनाकर पेषाब नली के साथ जोडकर मंगल सिंह को नया जीवनदान दिया।
मूत्र रोग एवं रिकन्स्ट्रक्षनल सर्जन डाॅ.हनुवन्त सिंह राठौड ने बताया कि इस ऐक्सीडेन्ट के दौरान टूटी हुई हड्डी के पेषाब की थैली में घुसनें से वह जगह जगह से फट गई एवं पेषाब की थैली से जाने वाला मूत्र मार्ग(यूरिथ्रा) अलग हो गया था जिसे पुन सही किया गया।
आर्थोपेडिक सर्जन डाॅ.सालेह मौहम्मद कागजी ने बताया कि इस आॅपरेषन में कूल्हे ( पेल्विस) की हड्डी जो कि दस से बारह जगहों से टूट गई उसकों तारों कि द्वारा जोडा गया। अभी मरीज पूरी तरह से स्वस्थ्य है।

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