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इन्द्र राजा के सानिध्य में निकले महाकाल

| August 20, 2018 | 0 Comments

उदयपुर। श्री महाकालेश्वर श्रावण महोत्सव समिति की शाही सवारी धूमधाम और इन्द्र राजा के सानिध्य में निकली।

प्रन्यास सचिव चन्द्रशेखर दाधीच अध्यक्ष तेजसिंह सरूपरिया ने सभी धर्मप्रेमियों, शिवभक्तों को शाही सवारी को शान्ति पूर्ण निकालने पर धन्यवाद ज्ञापित किया। महोत्सव समिति के अध्यक्ष सुनील भट्ट की ओर से आए महाराष्ट्र के बैण्ड ने शहरवासियों और शिवभक्तों को झूमने पर मजबूर कर दिया। प्रवक्ता गोपाल लोहार ने बताया कि आशुतोष भगवान श्री महाकालेश्वर का रूट चार्ट का निर्धारण कर अभिजित मुहूर्त में 12.15 बजे भगवान आशुतोष महाकालेश्वर की सवारी मंदिर प्रांगण से प्रस्थान कर निर्माणधीन गुफा से होते हुए पूर्वी द्वार की ओर से फतहसागर के रास्ते से होते हुए काला किवाड पर दाधिच समाज के द्वारा भगवान महाकाल का स्वागत-सत्कार किया गया। वहां से स्वरूप सागर से होते हुए शिक्षा भवन चैराहे पर पहुंचेगी जहां पर भगवान शनिदेव के पुजारी परिषद के द्वारा भगवान महाकाल की अगवानी की गई तथा वहां से चेटक सर्कल पर मुस्लिम समुदाय एवं ईसाई समुदाय द्वारा स्वागत सत्कार किया तथा महाकाल की ओर से नजराना भेंट किये गए।विप्र फाउण्डेशन भी शाही सवारी में विशाल नन्दी पर आरूढ भगवान भोले नाथ का स्वागत किया। वहां से आशीष पैलेस होटल पर सिक्ख समुदाय द्वारा विशेष पूजा-अर्चना एवं भगवान महाकालेश्वर का स्वागत किया गया। तत्पश्चात 1.30 बजे हाथीपोल पर देवी महाकाली मंदिर पर पुजारी परिषद द्वारा भगवान श्री महाकालेश्वर-देवी महाकाली तथा भगवान शनिदेव का परस्पर पूजन स्तवन किया। यहां पर दिल्ली से आए कलाकारों द्वारा शिव-नृत्य नाटिका प्रस्तुत की। इसके उपरान्त शाही सवारी मावा गणेशजी मार्ग से होते हुए हरवेन जी खुर्रा होते हुए मोतीचोहट्टा पहुंची। जहां पर विभिन्न व्यापारिक संगठनो व समाजो द्वारा मार्ग में भगवान श्री महाकालेश्वर का स्वागत कर विशेष पुष्प वर्षा की गई। शाही सवारी घण्ठाघर से होते हुए जगदीश चैक पहुंचेगी जहां पर दोपहर 3.30 बजे जगदीश चैक में भगवान हरि-हर का परस्पर मिलन होगा जिसमें पुजारी परिषद द्वारा भगवान श्री महाकालेश्वर- भगवान श्री जगदीश का परस्पर पूजन स्तवन कर महाआरती होगी तथा परस्पर भेट प्रस्तुत की। सवारी गणगौरघाट मार्ग से होते हुए चांदपोल पुलिया से होते हुए जाडा गणेश जी पहुंची जहां पर आरती का आयोजन हुआ। यहां से सवारी नई पुलिया होते हुए सांय 6.00 बजे अम्बमाता मंदिर पहुची जहां पर पुजारी परिषद द्वारा भगवान महाकालेश्वर व माॅ अम्बा का परस्पर पूजन स्तवन कर भेंट प्रस्तुत की। वहां से सवारी पुनः राडाजी चैराहे होते हुए महाकलेश्वर मंदिर परिसर पहुंचेगी जहां पर महाआरती का आयोजन हुआ।
महोत्सव समिति के विनोद शर्मा ने बताया की शाही सवारी के निर्धारित पूरे मार्ग में गोमूत्र एवं गगाजल का छिडकाव श्रीमाली समाज के द्वारा किया गया। तथा दीक्षा भार्गव व प्रेमलता लोहार के सानिध्य में महिलाएं का दस्ता सवारी के आगे झाडू बुहारते हुए चलेगा तथा आभा आमेटा व रीता गुप्ता के सानिध्य में फागनियां वेश में मंगल कलश लेकर चली।
महोतसव समिति के महिपाल शर्मा ने बताया कि महाराष्ट्र का मराठा बेण्ड इस बार मुख्य आर्कषण के रूप में शाही सवारी में अपनी मधुर शिवधुनों के भजनों की प्रस्तुति देते हुए चले। मराठा बेण्ड में महाराष्ट्र की पारम्परिक वेशभूषा पहने हुए बेण्ड बजाते हुए चलेंगे। बेण्ड में टीम में कुल 70 सदस्य बेण्ड वादक मण्डल ने बैण्ड बजाया। जो महाराष्ट्र की आन-बान-शान के साथ सवारी मे शामिल होता है। समिति के सुन्दरलाल माण्डावतने बताया कि विशेष आर्कषण के रूप में ओगडी माई की धुनी की प्रतिक स्वरूप एक विशाल धुना यात्रा में चलेगा जिसमे विशेष रूप से तैयार हवन सामग्री द्वारा आहुति देते हुए चली जिसमें शिवभक्तों और महिलाओं ने आहूतियां दी।

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