Category: Editorial
निर्माण निषेध क्षेत्र में ही क्यों नहीं रुकता ‘निर्माण’?
शहर की सरकार के हाल ऐसे जैसे लगता है पोपाबाई का राज हो। झील किनारे निर्माण करने वाले मस्त हैं। एक बार निर्माण तो कराओ, फिर देखेंगे…। इस तर्ज पर धड़ाधड़ निर्माण हो रहे हैं। कोई पर्दे लगाकर तो कोई खुलेआम निर्माण निषेध क्षेत्र में निर्माण करा रहा है। बिल्कुल वही बात है कि नो [...]
पद पर रहने की चाह, क्या होगा शहर का?
Udaipur. नगर परिषद में आयुक्त के पद पर बने रहने की चाह उनकी कार्यनिष्ठा पर प्रश्नचिह्न लगा रही है। गत दिनों परिषद में ऐसे कई मामले हो गए जिसमें आरएएस अधिकारी पर प्रश्नचिह्न लग गए। पहले आदेश दे दिए। फिर जब हंगामा हुआ तो आदेश वापस भी ले लिए।
मौकापरस्ती+अवसरवादिता = भाजपा!
क्या होगा इन नियुक्तियों के मायने? Udaipur. लो साहब, हो गया चुनाव 2013 की तैयारियों का आगाज। भाजपा में प्रदेशाध्य्क्ष मैडम को बना दिया गया और मेवाड़ के शेर को विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष का पद देकर ठण्डा किया गया। क्या मायने हैं इन नियुक्तियों के..। क्या रंग दिखाएंगी ये नियुक्तियां.. ये तो भविष्य ही [...]
… और मर कर वह पूरे देश की बेटी बन गई!
13 दिन तक मौत से जीवित रहने के लिए संघर्ष करने के बाद आखिरकार वह नहीं रही.. उसने दम तोड़ दिया। मरकर वह पूरे देश की बेटी बन गई। इस सुषुप्त देश में भेड़ चाल में विश्वास करने वाला आम आदमी भी उसकी मौत के विरोध में खड़ा हो गया।
ठंड के साथ आया बदलाव
udaipur. जैसे जैसे ठंड बढ़ने लगी है, वैसे वैसे ही हर जगह बदलाव आ रहा है। चाहे वह बाजार बंद होने को लेकर हो या खाने में।
राजस्थान की बुनियाद पर अहमदाबाद के अस्पताल
भले ही हमारे देश के महानगरों में सुविख्यात, अत्याधुनिक, सुविधायुक्त एवं नवीनतम तकनीक के पूर्णत: वातानुकूलित अस्पतालों में एम्स, एस्कॉर्ट, अपोलो, गंगाराम, जसलोक, लीलावती, टाटा मेमोरियल आदि का नाम प्रमुख रूप से लिया जाता है लेकिन ये वो अस्पताल हैं जहां आर्थिक गरीबी की बेडिय़ों में जकड़ा देश का आम नागरिक अपनी आर्थिक मजबूरी की [...]
डीजे के कानफोडू़ संगीत के बीच गणपति प्रतिमाएं विसर्जित
इको फ्रेंडली तरीके से भी हुआ विसर्जन udaipur. डीजे के कानफोड़ू संगीत के बीच अनंत चतुर्दशी पर शनिवार को गणपति प्रतिमाएं विसर्जित करने के साथ ही गणपति महोत्सव की धूम थम गई। गणेश चतुर्थी के दिन शहर भर के कई इलाकों में गणपति महोत्सव के तहत प्रतिमाएं स्थापित की गई थीं।
किन मायनों में सफल कहें बंद?
udaipur. बंद.. भारत बंद…। इसे सफल किन मायनों में कहा जाए..। स्वत: स्फूर्त बंद कहना तब ठीक होता जब जनता वास्तव में मन से इस बंद में जुड़ी होती। मजदूर की मजबूरी है कि बंद में जब काम ही नहीं होगा तो उसका आना ही व्यर्थ है।
सिंहासन खाली करो कि जनता आती है ….
फिर बढ़ गई महंगाई.. पेट्रोलियम पदार्थों में बढ़ोतरी यानी सीधे सीधे आम आदमी की जेब पर डाका। विपक्षी पार्टियों को मिल गया मौका.. फिर एक दिन का उनके लिए भारत बंद यानी सब कुछ खत्म और गरीब मजदूर के लिए एक दिन का एडवांस में इंतजाम करना वहीं मध्यमवर्गीय आदमी के लिए एक दिन का [...]
















पाठक दीर्घा