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Category: Editorial

… और मर कर वह पूरे देश की बेटी बन गई!

… और मर कर वह पूरे देश की बेटी बन गई!

| December 30, 2012 | 0 Comments

13 दिन तक मौत से जीवित रहने के लिए संघर्ष करने के बाद आखिरकार वह नहीं रही.. उसने दम तोड़ दिया। मरकर वह पूरे देश की बेटी बन गई। इस सुषुप्त  देश में भेड़ चाल में विश्वास करने वाला आम आदमी भी उसकी मौत के विरोध में खड़ा हो गया।

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ठंड के साथ आया बदलाव

ठंड के साथ आया बदलाव

| November 30, 2012 | 0 Comments

udaipur. जैसे जैसे ठंड बढ़ने लगी है, वैसे वैसे ही हर जगह बदलाव आ रहा है। चाहे वह बाजार बंद होने को लेकर हो या खाने में।

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राजस्थान की बुनियाद पर अहमदाबाद के अस्पताल

राजस्थान की बुनियाद पर अहमदाबाद के अस्पताल

| October 30, 2012 | 0 Comments

भले ही हमारे देश के महानगरों में सुविख्यात, अत्याधुनिक, सुविधायुक्त एवं नवीनतम तकनीक के पूर्णत: वातानुकूलित अस्पतालों में एम्स, एस्कॉर्ट, अपोलो, गंगाराम, जसलोक, लीलावती, टाटा मेमोरियल आदि का नाम प्रमुख रूप से लिया जाता है लेकिन ये वो अस्पताल हैं जहां आर्थिक गरीबी की बेडिय़ों में जकड़ा देश का आम नागरिक अपनी आर्थिक मजबूरी की […]

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डीजे के कानफोडू़ संगीत के बीच गणपति प्रतिमाएं विसर्जित

डीजे के कानफोडू़ संगीत के बीच गणपति प्रतिमाएं विसर्जित

| September 29, 2012 | 1 Comment

इको फ्रेंडली तरीके से भी हुआ विसर्जन udaipur. डीजे के कानफोड़ू संगीत के बीच अनंत चतुर्दशी पर शनिवार को गणपति प्रतिमाएं विसर्जित करने के साथ ही गणपति महोत्सव की धूम थम गई। गणेश चतुर्थी के दिन शहर भर के कई इलाकों में गणपति महोत्सव के तहत प्रतिमाएं स्थापित की गई थीं।

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किन मायनों में सफल कहें बंद?

किन मायनों में सफल कहें बंद?

| September 20, 2012 | 1 Comment

udaipur. बंद.. भारत बंद…। इसे सफल किन मायनों में कहा जाए..। स्वत: स्फूर्त बंद कहना तब ठीक होता जब जनता वास्तव में मन से इस बंद में जुड़ी होती। मजदूर की मजबूरी है कि बंद में जब काम ही नहीं होगा तो उसका आना ही व्यर्थ है।

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सिंहासन खाली करो कि जनता आती है ….

सिंहासन खाली करो कि जनता आती है ….

| September 16, 2012 | 1 Comment

फिर बढ़ गई महंगाई.. पेट्रोलियम पदार्थों में बढ़ोतरी यानी सीधे सीधे आम आदमी की जेब पर डाका। विपक्षी पार्टियों को मिल गया मौका.. फिर एक दिन का उनके लिए भारत बंद यानी सब कुछ खत्म और गरीब मजदूर के लिए एक दिन का एडवांस में इंतजाम करना वहीं मध्यमवर्गीय आदमी के लिए एक दिन का […]

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फिर भी क्‍यों नहीं मानती जनता?

फिर भी क्‍यों नहीं मानती जनता?

| June 7, 2012 | 0 Comments

जनता को कुछ भी समझाया जाए लेकिन लालच में नहीं आने की बात हर किसी के समझ में इतनी आसानी से नहीं आती. चाहे वह एमएलएम की तरह मार्केटिंग का काम हो, मेंबर बनाने का काम हो या फिर मेम्बर को कंपनी का सामान बेचने का काम हो. आज के जमाने में हर आदमी को […]

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किस राह पर चला उदयपुर!

किस राह पर चला उदयपुर!

| May 31, 2012 | 0 Comments

उदयपुर। उदयपुर किस राह पर जा रहा है। इस पर विचार करने का समय है। दस साल पहले के उदयपुर और आज के उदयपुर में कितना फर्क आ गया है और क्यों ? इस पर जरूर विचार करने की आवश्यकता है। गत 5-6 वर्षों से दिन-ब-दिन जमीनों के बढ़ते भावों को लेकर हर आम-ओ-खास के […]

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मंजूर होंगे इस्तीफे, होगी कटारिया पर कार्रवाई या फिर समझाईश?

मंजूर होंगे इस्तीफे, होगी कटारिया पर कार्रवाई या फिर समझाईश?

| May 6, 2012 | 1 Comment

और आखिरकार मेवाड़ के शेर गुलाबचंद कटारिया की प्रस्तावित लोक जागरण यात्रा निरस्त हो ही गई. हो गई या करवाई गई या कर दी गई. सभी के अपने-अपने मायने हैं. राष्ट्रीय नेतृत्व को भी  कटारिया ने एकबारगी अपनी बातों से संतुष्ट कर दिया लेकिन कोर कमेटी ने सब गडबड कर दी और यहाँ तो होनी […]

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