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Category: From the Past

खाने के लिए परमिशन लेनी पड़ती थी

खाने के लिए परमिशन लेनी पड़ती थी

| August 31, 2011 | 0 Comments

कॉलम : अतीत के आईने से वर्धमान सिंह मेहता, व्यवसायी   जन्म 1943 में धानमण्डी स्थित मेहतों का पाड़ा में हुआ। बचपन से ही मण्डी देखी जो आज त· देख रहा हूं। स्कूल में पढ़ते समय धानमण्डी में प्रभुलालजी मास्टर साहब, जगदीश चौक के सामने बिरजू बाऊजी आज भी याद हैं। उनके कठोर व्यवहार, अनुशासन […]

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सड़क के बीच में होती थी नालियां

सड़क के बीच में होती थी नालियां

| August 23, 2011 | 4 Comments

कॉलम : अतीत के आईने से कैलाशवती व्यास, सेवानिवृत्त प्रधानाचार्य अग्रवाल जैन बाल मंदिर मेरा बचपन तो उदयपुर को देखकर ही व्यतीत हुआ. उस समय तो अभिभावक लड़कियों को स्कूल भेजने में भी हिचकिचाते थे. लड़कियों के लिए तो स्कूल थे ही नहीं. बदनोर की हवेली के  सामने स्थित हनुमानजी मंदिर के पास एक छोटे […]

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रोज़ाना जगनिवास तक मुफ्त में होती थी सवारी

रोज़ाना जगनिवास तक मुफ्त में होती थी सवारी

| August 15, 2011 | 0 Comments

अतीत के आईने से : from tha past लीलाराम माखीजा, फोटोग्राफर व्यवसायी हमें आज़ादी मिली वर्ष १९४७ में. फिर २९ अगस्त को पाकिस्तान के लरकाना से मैं अपने माता-पिता, भाइयों आदि के साथ उदयपुर आया. हालांकि सरकार की ओर से निशुल्क आने की सुविधा दी गयी थी लेकिन मेरे पिताजी स्वाभिमान के पक्के थे. टिकट […]

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अतीत के आईने से..

अतीत के आईने से..

| August 14, 2011 | 0 Comments

यह कॉलम शुरू करने का हमारा उद्देश्य उदयपुर के लोगों को पुराने उदयपुर से वृद्ध लोगों की आँखों में रचे-बसे उदयपुर से रूबरू करना है. उस समय का उदयपुर कैसा था ओर आज का उदयपुर तो हम देख ही रहे हैं. उस समय लोगों के नैतिक मूल्य कितने मजबूत थे ओर आज किसी के पास […]

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