जल चोरी के आंकडे़ सार्वजनिक करने का प्रस्ताव

BY — February 12, 2012

राष्ट्रीय जल नीति का मसौदा जारी आमजनों से 20 फरवरी तक सुझाव मांगे

कैसी हो राष्‍ट्रीय जल नीति?

udaipur. केन्द्रीय जल संसाधन मंत्रालय ने राष्ट्रीय जल नीति का मसौदा जारी कर दिया है तथा आमजनों से इस पर 20 फरवरी तक सुझाव मांगे हैं। विद्या भवन पॉलिटेक्निक महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. अनिल मेहता ने बताया कि प्रस्तावित नीति के अनुसार अब शहरी पेयजल आपूर्ति स्रोतों के बजाय सतही जल स्रोतों से करना बेहतर बताया गया है। सा‍थ ही जल रिसाव एवं चोरी के आंकड़ों को अब विभागों को सार्वजनिक रूप से प्रकाशित करना होगा।

उन्‍होंने बताया कि इण्डियन इजमेंट एक्ट में सुधार होगा। स्वयं के मालिकाना हक वाली जमीन के नीचे के पानी पर अब उसका अधिकार समाप्त‍ हो जाएगा। झील संरक्षण समिति के सचिव डॉ. तेज राजदान एवं मेहता मेमोरियल ट्रस्टक के सचिव नंदकिशोर शर्मा ने बताया कि झीलों, तालाबों तथा उनके जल प्रवाह‍ मार्गों में अतिक्रमण, शहरी जल निकासी मार्गों में छेड़छाड़, औद्योगिक बहिस्रावों से भूजल को प्रदूषित करने पर जुर्माना आदि के भी नीति में प्रावधान किए गए हैं। नीति में कहाब गया है कि महानरेगा में प्राथमिकता के आधार पर वर्षा जल संग्रहण एवं सोइल वाटर कन्जरवेशन के कार्य कराने चाहिए। नीति में बांधों की सुरक्षा प्राथमिकता से करने की बात कही गई है।

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