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अब दें अपने वैज्ञानिक विचारों को उड़ान

BY — March 13, 2014

सीटीएई में खुला टेक्नोज उद्यमी प्रोत्साहन केन्द्र

ctaeउदयपुर। प्रौद्योगिकी एवं अभियांत्रिकी महाविद्यालय में मौलिक विचारों को मूल रूप देने के लिए व्यक्तिगत एवं लघु उद्योगों में नवाचार को बढा़वा देने हेतु प्रिस्म योजना का केन्द्र खोला गया है। इसके अन्तर्गत व्यक्तिगत आविष्कारकों, प्रवर्तकों एवं प्रौद्योगिकी आधारित उद्यमी (टेक्नो उद्यमी) बनने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है।

यह योजना विद्यार्थियों, भारतीय नागरिकों, लघु उद्यमियों की वैज्ञानिक तथा तकनीकी खोजी प्रवृत्ति की विपुल क्षमताओं का उपयोग करने के लिए वैज्ञानिक तथा औद्योगिक अनुसंधान विभाग (डीएसआईआर) द्वारा प्रिस्म कार्यक्रम के अन्तर्गत संचालित की जा रही है।
परियोजना के समन्वयक डॉ. शैलेन्द्र मोहन माथुर ने बताया कि योजना के तहत मौलिक विचार/आविष्कार/तकनीकी जानकारी रखने वाला किसी भी आयु वर्ग का कोई भी इच्छुक भारतीय नागरिक प्रिस्म प्रोग्राम के अन्तर्गत सहायता प्राप्त कर सकता है। नए विचार, प्रवर्तन को कार्यरत मॉडल में बदलने हेतु विज्ञान तथा प्रौद्योगिकी मंत्रालय भारत सरकार अधिकतम बीस लाख रुपए तक की सहायता दे सकती है। प्रिस्म द्वारा चयनित प्रवर्तकों/आविष्कारकों को परियोजना प्रस्ताव में अपने निजि अंशदान के रूप में स्वीकृत राशि का न्यूनतम 10 प्रतिशत रखना होता है। प्रिस्म को प्रस्ताव भेजते समय, प्रवर्तक को यह सुनिश्चित करना होगा कि प्रस्तावित योजना का वैज्ञानिक आधार हो एवं उसकि पूर्ण रूप से वाणिज्यिक रूप देने की संभावनाएं हैं। किसी भी कम्पनी/उद्योग के स्वामी के प्रस्तावों पर प्रिस्मन कार्यक्रम के तहत सहायता देने के लिए विचार किया जा सकता है। योजना के मुख्य समन्वयक डा. नन्दवाना ने कार्यालय सवांवदाता को बताया कि यह भारत सरकार की एक अनूठी परियोजना है जिसके अन्तर्गत किसी भी वर्ग का भारतीय नागरिक अधिकतम बीस लाख रूपये तक की सहायता प्राप्त कर सकता है। यह योजना विधार्थियों के लिए अपनी धारणा अथवा कल्पना को साकार रूप देने के लिए एक अनोखी योजना है। सीटीएई के अधिष्ठाता डा. नन्दवाना ने बताया कि इस कार्यक्रम के तहत् भारतीय नागरियकों को दो चरणों में सहायता प्रदान की जाती है । प्रथम चरण में अपनी धारणा अथवा विचार को साबित करने हेतु अधिकतम दो लाख रूपये एवं अपने कार्यरत मॉडल को प्रोटोटाईप में  बदलने के लिए अधिकतम बीस लाख रूपये तक की सहायता दी जाती है। जबकि द्वितीय चरण के अन्तगर््त अगर व्यक्ति अथवा लघु उद्यमी अपना स्वयं का उद्योग स्थापित करना चाहता है तो उसे अधिकतम पचास लाख रूपये तक की आर्थिक सहायता प्रदान की जा सकती है। प्रथम चरण में व्यक्मि को अपनी परियोजन का न्यूनतम 10 प्रतिशत खर्च एवं द्वितीय चरण में न्यूनतम 50 प्रतिशत अशंदान अपना स्वंय का लगाना होेगा । जिन विद्यार्थीयों एवं आविष्कारकों के पास कोई नवीन विचार है एवं वह उनको हकिकत में बदलना चाहता है तो प्रिस्म कार्यक्रम के तहत् भारत सरकार से दो लाख रूपये से लेकर बीस लाख रूपये तक की आर्थिक एवं तकनीकी सहायता के लिये अपना प्रस्ताव उदयपुर स्थित प्रिस्म कार्यालय को भेज सकते है । डां माथुर ने बताया कि राजस्थान एवं इसके आस पास के राज्यों में इस परियोजना का एक मात्र केन्द्र सीटीएई, उदयपुर में ही है अतः इच्छुक व्यक्ति इस सम्बन्ध में अधिक जानकारी एवं आवेदन पत्र प्राप्त करने हेतु सी.टी.ए.ई. में स्थित प्रिस्म कार्यालय में सम्पर्क कर सकते है । विधार्थी एवं भारतीय नागरिक, विज्ञान तथा प्रौद्योगिकी मंत्रालय भारत सरकार की साइट पर भी अपना प्रस्ताव भेज सकते है।

admin

doing active journalism from last 16 yrs. worked in leading news papers rajasthan patrika, dainik bhaskar.

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