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सिटी पैलेस : डॉ. लक्ष्यराज सिंह मेवाड़ ने अश्वों का पूजन कर प्राचीन परंपरा निभाई

BY — October 1, 2025

उदयपुर। शारदीय नवरात्रि के पावन पर्व पर बुधवार को मेवाड़ के पूर्व राजपरिवार के सदस्य एवं महाराणा मेवाड़ चैरिटेबल फाउण्डेशन के अध्यक्ष एवं प्रबंध न्यासी डॉ. लक्ष्यराज सिंह मेवाड़ ने सिटी पैलेस में अश्व पूजन की प्राचीन परंपरा का श्रद्धा और भक्ति भाव से निर्वहन किया। नवमी तिथि पर वेदपाठी ब्राह्मणों के वैदिक मंत्रोच्चार से पारंपरिक रूप से श्रृंगारित अश्व- राजस्वरूप, नागराज और अश्वराज का पूजन हुआ।

डॉ. लक्ष्यराज सिंह मेवाड़ ने अश्वों की विधिवत आरती कर उन्हें आहार, वस्त्रादि और ज्वारे अर्पित किए। इस अवसर पर डॉ. लक्ष्यराज सिंह मेवाड़ ने कहा कि सनातन संस्कृति और शास्त्रों में अश्वों का विशेष महत्व है। सूर्यवंशी परंपरा में प्राचीन काल से अश्वों को शुभ व सम्मान का प्रतीक माना गया है। रणभूमि में स्वामीभक्ति और पराक्रम का अद्भुत उदाहरण अश्वों ने प्रस्तुत किया है, जिसमें महाराणा प्रताप का चेतक आज भी मेवाड़ के गौरवशाली इतिहास में अमर है। बता दें, 2 अप्रैल 2025 को हुए डॉ. लक्ष्यराज सिंह मेवाड़ के गद्दी उत्सव के अवसर पर भी सिटी पैलेस में अश्व पूजन की प्राचीन परंपरा विधिवत निभाई गई। महाराणाओं ने राजमहल में अश्वों के लिये कई पायगा तैयार करवाई, जिनमें महाराणा करण सिंह जी (शासनकाल 1620-1628 ईस्वी) में निर्मित सातानवारी पायगा विशेष है। सातानवारी पायगा का अर्थ है सात और नौ खानों वाला घोड़ों का अस्तबल। यह सबसे प्राचीन अस्तबलों में से एक है। 17वीं सदी के इस अस्तबल में मारवाड़ी नस्ल के घोड़े अभी भी दर्शकों के लिए रखे जाते हैं। महाराणा भूपाल सिंह जी (शासनकाल 1930-1955 ईस्वी) ने मेवाड़ के महाराणाओं की सूर्यवंशी परम्परा को आज़ादी के बाद भी जीवंत बनाए रखा।

admin

doing active journalism from last 16 yrs. worked in leading news papers rajasthan patrika, dainik bhaskar.

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