भारतीय ज्ञान प्रणाली और नैतिक मूल्यों के संवर्धन पर दिया गया विशेष बल
उदयपुर। जन्माष्टमी की पूर्व संध्या पर पेसिफिक यूनिवर्सिटी के पेसिफिक इंस्टीट्यूट ऑफ बिजनेस स्टडीज़ में इंडियन कोहेसिव कल्चरल क्लब द्वारा श्रीकृष्ण के विविध आयाम, जीवन प्रसंग एवं प्रेरणा विषय पर परिचर्चा का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में बीबीए, बी.कॉम एवं एम.कॉम के विद्यार्थियों ने भगवान श्रीकृष्ण के बहुआयामी व्यक्तित्व और उनके जीवन से प्राप्त होने वाले व्यावहारिक एवं नैतिक संदेशों पर अपने विचार प्रस्तुत किए। कार्यक्रम की रूपरेखा डॉ. प्रियंका चौधरी द्वारा तैयार की गई।
उन्होंने बताया कि इस परिचर्चा का उद्देश्य विद्यार्थियों में नैतिक मूल्यों का विकास करना तथा राष्ट्रीय शिक्षा नीति एवं भारतीय ज्ञान परंपरा के अनुरूप जीवनोपयोगी शिक्षा को प्रोत्साहित करना है। कार्यक्रम को इस प्रकार प्रारूपित किया गया कि विद्यार्थी श्रीकृष्ण के व्यक्तित्व के विभिन्न आयामों को आधुनिक जीवन एवं प्रबंधन के संदर्भ में समझ सकें।
परिचर्चा में विद्यार्थियों ने भगवान श्रीकृष्ण को गुरु, आदर्श शासक, रणनीतिकार, सच्चे मित्र, दार्शनिक, धर्म संरक्षक, करुणामयी व्यक्तित्व, कुशल कूटनीतिज्ञ, सेवाभावी नेता, संकट प्रबंधन विशेषज्ञ, दूरदर्शी नेतृत्वकर्ता, कर्मयोगी, प्रकृति प्रेमी तथा प्रभावी संचारक के रूप में प्रस्तुत किया। साथ ही उन्होंने श्रीकृष्ण के जीवन से नेतृत्व क्षमता, मित्रता, कर्मयोग, सहयोग, ट्रस्टीशिप, न्यायप्रियता, समभाव, करुणा, दर्शन एवं नैतिक निर्णय क्षमता जैसे प्रेरक जीवन मूल्यों पर अपने विचार साझा किए।
संस्था प्राचार्य डॉ. अनुराग मेहता ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि भगवान श्रीकृष्ण का जीवन केवल आध्यात्मिक प्रेरणा ही नहीं, बल्कि आधुनिक प्रबंधन, नेतृत्व, निर्णय क्षमता एवं व्यक्तित्व विकास का भी उत्कृष्ट उदाहरण है। उन्होंने विद्यार्थियों से आह्वान किया कि वे श्रीकृष्ण के प्रेरणादायी प्रसंगों को अपने दैनिक जीवन, शिक्षा एवं आगामी व्यावसायिक कार्यों में अपनाकर सफल एवं उत्तरदायी नागरिक बनने का प्रयास करें।
कार्यक्रम का संचालन बीबीए के विद्यार्थी मंथन और एंजल शर्मा ने किया। आयोजन में विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता करते हुए भारतीय संस्कृति, आध्यात्मिक मूल्यों एवं जीवन प्रबंधन की प्रासंगिकता पर सार्थक चर्चा की। यह परिचर्चा विद्यार्थियों के लिए ज्ञानवर्धक, प्रेरणास्पद एवं व्यक्तित्व विकास की दृष्टि से अत्यंत उपयोगी रही।