udaipur. कार्तिक शुक्ल पक्ष एकादशी रविवार को देवउठनी एकादशी पर जहाँ अबूझ मुहूर्त के सावे हुए वहीं छोटी दिवाली भी मनाई गयी. घरों के बाहर और देव स्थानकों में दीप प्रज्वलित किये गए. देवशयनी एकादशी पर बंद होने वाले विवाह उत्सव वापस देवउठनी एकादशी से शुरू हो जाते हैं. अब यह सिलसिला अमूमन होली रोपने तक चलेगा. बीच-बीच में मलमास में शादियाँ नहीं होंगी. एकादशी से पूर्णिमा तक पुष्कर में मेला लगता है जिसे समय के साथ अब ७ दिन का कर दिया गया है.
साथ इस इस दिन को छोटी दिवाली के रूप में भी मनाया जाता है. इस दिन सालिग्राम के साथ तुलसी विवाह का भी बहुत महत्त्व है. इसके पीछे भगवान विष्णु और वृंदा की एक कथा है. बताते हैं कि भगवान विष्णु ने छल से वृंदा की तपस्या भंग कर दी थी. जिस पर वृंदा के पति जालन्धर की मृत्यु हो गयी. वृंदा क्रोधित हुई और उसके सत्यवती के बल के कारण भगवान विष्णु प्रतिमा में बदल गए. फिर देवताओं के आग्रह पर भगवान विष्णु वापस अपने रूप में आये और उन्होंने वृंदा को वरदान दिया कि अगले जन्म में तुम तुलसी बनोगी और मैं तुमसे विवाह करूँगा. इस कारण सालिग्राम (भगवान विष्णु का रूप) से तुलसी विवाह कराया जाता है.
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