कथौड़ी समुदाय के विकास के लिये समन्वित प्रयास जरुरी

BY — February 17, 2012
सेमिनार में संबोधित करती आदिवासी समुदाय की महिला।

udaipur. आदिम जाति शोध एवं प्रशिक्षण संस्थान, उदयपुर द्वारा कथौड़ी समुदाय के समग्र विकास विषय पर कार्यशाला टी.आर.आई. सभागार में  हुई। उद्घाटन जनजाति विकास विभाग के प्रमुख शासन सचिव मनोहरकान्त ने किया। मनोहरकांत ने कहा कि टी.आर.आई., जनजाति आयुक्त एवं जनजाति क्षेत्र में कार्यरत स्वयंसेवी संस्थाओं को मिलकर कथौड़ी समुदाय के समग्र विकास के लिये प्रयास करने होंगे।

कथौड़ी समाज बहुत छोटा समाज है। इसमें लगभग 1500 परिवार निवास करते है, किन्तु इनकी कठिनाईयां विशिष्ट है जिनका निदान करने के लिये सभी को मिलकर प्रयास करना होगा। स्वयंसेवी संस्थाएं हमें यर्थार्थ स्थिति से परिचय कराये तथा कथौड़ी समुदाय के विकास के लिये छोटे—छोटे प्रोजेक्ट बनाकर देवे। रोजगार, शिक्षा एवं कल्याणकारी कार्यों पर व्यावहारिक परियोजनाएं बनायी जाये। उन्होंकने कहा कि कथौड़ी समुदाय सहित अन्य जनजाति समुदायों के समग्र विकास के लिये टीआरआई व्यावहारिक मंच प्रदान करें, इसमें आयुक्त, जनजाति विकास विभाग की अध्यक्षता में अतिरिक्त आयुक्त, टीएडी—निदेशक, टीआरआई एवं क्षेत्र में कार्यरत स्वयंसेवी संस्थाएं एक फोरम के रूप में कार्य करे। यह फोरम मार्च, २०१२ तक बैठक आयोजित कर सर्वप्रथम कथौड़ी समुदाय के विकास हेतु व्यावहारिक सुझाव प्रस्तुत करें।
स्वागत उद्बोधन में टीआरआई के निदेशक प्रो. विजय सिंह ने कार्यशाला के उद्देश्य बताते हुए कहा कि कार्यशाला से शासन, स्वयंसेवी संस्थाएं एवं कथौड़ी समुदाय के लोग एक मंच पर एकत्रित होकर सरकार द्वारा संचालित योजनाओं एवं कथौड़ी समाज के विकास में आ रही बाधाओं पर मंथन कर उनके निराकरण हेतु सुझाव प्रस्तुत करेंगे। तकनीकी सत्र में स्वेच्छप परियोजना के पंकज मिश्रा ने पॉवर पोईंट प्रजेन्टेशन के माध्यम से कथौड़ी समुदाय की वर्तमान स्थिति का प्रस्तुतीकरण किया गया। उप वन संरक्षक ओ.पी.शर्मा ने वन उपज के उपयोग से आय अर्जन हेतु सुझाव प्रस्तुत किये। खुले सत्र में विभिन्न स्वयं सेवी संस्थाओं के प्रतिनिधियों ने कथौड़ी समाज की योग्यताओं एवं गुणों की जानकारी प्रदान की। कथौड़ी समाज की आर्थिक उन्नति के लिये जड़ी—बूंटी चिकित्सा, स्थानीय उत्पाद के उपयोग से सवरोजगार को प्रोत्साहन, ट्रायबल ट्यूरिज्म इत्यादि पर बल दिया जाना चाहिये।
कार्यशाला में झाड़ोल, कोटड़ा एवं गोगुन्दा क्षेत्र से आये कथौड़ी समाज की महिलाओं एवं पुरुषों ने भी सहभागिता की। इन सहभागियों द्वारा कार्यशाला के दौरान अपनी समस्याएं रखी जिनका तुरन्त समाधान भी प्रस्तुत किया गया। समापन सत्र में डॉ. ललित शर्मा ने कथौड़ी समुदाय में शिक्षा की स्थिति पर शोध पत्र प्रस्तुत किया। समारोह में जनजाति क्षेत्रीय विकास विभाग के अधिकारी प्रियवत पण्डया, अतिरिक्त आयुक्त, टीएडी (प्रथम), श्री जी.के.दशोरा, उप निदेशक (सु.व्य.) ने सहभागिता की। संचालन टीआरआई की उप निदेशक ज्योति मेहता ने किया। धन्यवाद जितेन्द्र उपाध्याय ने दिया।

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