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कार्पोरेट नैतिकता ही उद्यम का भविष्य : गोदारा

BY — October 25, 2013

251002Udaipur. मोहनलाल सुखाड़िया विश्वविद्यालय, उदयपुर के लोक प्रशासन विभाग द्वारा आयोजित ‘भारत में प्रशासनिक संस्कृति‘ विषयक दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी के उद्घाटन सत्र में बोलते हुए हेमचंद्राचार्य उत्तरी गुजरात विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. आर. एल. गोदारा ने कहा कि किसी भी संगठन, विशेष रूप से निजी क्षेत्र के उद्यमों में कार्पोरेट नैतिकता और सामाजिक उत्तरदायित्व की प्रशासनिक संस्कृति के बिना उसकी छवि और उपादेयता सिद्ध नहीं हो सकती।

251001उन्होंने कहा कि वैश्वीकरण के इस दौर में संगठनों की आंतरिक और बाहरी दोनों ही प्रकार की संस्कृतियों का अपना महत्त्व है। कार्यक्रम के अध्यक्ष सुविवि कुलपति प्रो. आई. वी. त्रिवेदी ने कहा कि प्रशासनिक संस्कृति विशेष रूप से सरकारी तंत्र की कार्यप्रणाली बहुत उलझी हुई तथा जनता से विमुख है। उन्होंने कहा कि प्रशासनिक संस्कृति के कई रूप पुलिस संस्कृति, सचिवालय संस्कृति, पोस्ट ऑफिस संस्कृति, विश्वविद्यालय संस्कृति एवं पंचायतराज संस्कृति आदि दिखाई देते हैं।
विशिष्ट अतिथि कला महाविद्यालय के अधिष्ठािता प्रो. शरद श्रीवास्तव ने कहा कि भारत में आधुनिक प्रशासनिक संस्कृति ब्रिटिश उपनिवेशवाद की एक विरासत है जो अंग्रेजी के भारत से चले जाने के बाद भी नौकरशाही के रूप में जनता को प्रताड़ित कर रही है। आज इस पर चिंतन करते हुए इस व्यवस्था में बदलाव लाने की महती आवश्यकता है। संगोष्ठी के निदेशक लोक प्रशासन विभाग के अध्यक्ष प्रो. एस. के. कटारिया ने स्वागत उद्बोधन में कहा कि प्रशासनिक संस्कृति नामक नए विषय को सैद्धांतिक आधार देने एवं शोध को बढ़ावा देने के लिए इस संगोष्ठी का आयोजन किया गया है।
251003संगोष्ठी में राजस्थान विश्वविद्यालय के लोक प्रशासन विभाग की अध्यक्षा प्रो. प्रीता जोशी, हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय के प्रो. संजीव महाजन, कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के प्रो. ए. एस. मलिक, नागपुर विश्वविद्यालय के धर्मेश धवनकर तथा माणिक्यलाल वर्मा महाविद्यालय भीलवाड़ा की डॉ. देवकांता शर्मा ने भी अपने-अपने शोध पत्र प्रस्तुत किए। डॉ. देवकांता शर्मा ने भारत की शिथिल न्यायिक प्रणाली पर गंभीर शोधपरक प्रश्न उठाते हुए कहा कि यदि अंधेरे में न्याय का दीपक ही बुझ जाये तो पीड़ित जनता को रोशनी कहां से मिलेगी। तारीख-दर-तारीख की भारतीय न्याय प्रणाली लोगों में कुंठा और सरकार के प्रति अविश्वास पैदा करती है। आभार संगोष्ठी संयोजक प्रो. सी. आर. सुथार ने व्यक्त किया। संचालन डॉ. गिरिराज सिंह चौहान ने किया।

admin

doing active journalism from last 16 yrs. worked in leading news papers rajasthan patrika, dainik bhaskar.

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