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माघ पूर्णिमा पर उमड़ी आस्था, जुटे लाखों श्रद्घालु

BY — February 25, 2013

आदिम संस्कृति का महाकुंभ बेणेश्वर धाम पर मुख्य मेला

250203Udaipur/डूंगरपुर। जनजाति अंचल में वागड़ प्रयाग के नाम से विख्यात बेणेश्वरधाम पर सोम और माहीसागर संगम तीर्थ पर सोमवार को माघ पूर्णिमा पर आयोजित मुख्य् मेले में गुजरात, महाराष्ट्र और राजस्थान के लाखों श्रद्घालुओं ने शिरकत की।

250201सोमवार शाम तक मेला स्थल पर जुटे लाखों मेलार्थियों ने मेले की विभिन्न लोक रस्मों और देव-दर्शनादि में हिस्सा लेते हुए इसकी विशालता का अहसास कराया। हजारों मेलार्थियों ने अपने परिजनों की मुक्ति की कामना से आबूदर्रा स्थित संगम तीर्थ में पारंपरिक अनुष्ठानों के साथ अस्थियों का विसर्जन किया। सोमवार सुबह से शुरू हुआ अस्थि विसर्जन का क्रम दोपहर बाद तक चरम पर था।
मेले में कल रात से ठहरे मेलार्थियों ने माघ पूर्णिमा का पुण्य कमाने पवित्र जल में डुबकी लगाई। दिन भर मेलार्थियों के संगम तीर्थ की पवित्र जलराशि में डुबकी लगाने का क्रम बना रहा। मेलार्थियों ने नदी के घाटों, संगम तटों तथा शिलाखण्डीय टापूओं पर आटा गूंथा तथा सरकण्डे जलाकर बाटियां सेंकी। गुड़़/शक्कर, घी मिलाकर चूरमा बनाया और भगवान को भोग लगाकर परिजनों के साथ सामूहिक भोज लिया। बेणेश्वर धाम पर मेलार्थियों के जमा होने का क्रम दिन भर रहा, जिससे संगम तटों, देवालयों, मेला बाजारों और प्रदर्शनी स्थलों पर भारी सैलाब उमड़ता रहा। राधा-कृष्ण देवालय पर संत मावजी महाराज की जयंती माघशुक्ल ग्यारस को महंत अच्युतानंद द्वारा सप्तरंगी ध्वज चढ़ाने से शुरू हुआ मेला उभार पर रहा।

250202मुख्य आकर्षण निष्कलंक भगवान एवं महन्त की पालकी यात्रा एवं संगम पर शाही स्नान रहा। मावजी महाराज की जन्मस्थली साबला के हरि मन्दिर से सोमवार सवेरे गाजे-बाजे और ढोल-नगाड़ों के साथ निष्कलंक भगवान एवं महंत अच्युतानंद की पालकी यात्राएं निकली। पालकियां राधाकृष्ण मंदिर पहुंची जहां महंत ने देव दर्शन किए। इसके बाद पुन: हजारों भक्त पालकियों को लेकर जलसंगम तीर्थ ‘आबूदर्रा’ की ओर बढे जहां ाहन्त ने जल तीर्थों का आह्वान किया।

admin

doing active journalism from last 16 yrs. worked in leading news papers rajasthan patrika, dainik bhaskar.

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