पाहेर विश्वविद्यालय, उदयपुर के स्नातकोत्तर अध्ययन एवं रसायन विज्ञान विभाग द्वारा आयोजित दो दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय कॉन्फ्रेंस “सतत विकास में रसायन विज्ञान की भूमिका” का भव्य समापन हुआ। इस सम्मेलन में देश-विदेश के वैज्ञानिकों, शिक्षाविदों तथा शोधार्थियों ने भाग लिया और रसायन विज्ञान के विविध आयामों पर अपने अनुसंधान प्रस्तुत किए। समापन सत्र में सोमैया विद्याविहार विश्वविद्यालय, मुंबई के कुलपति प्रो. वी. एन. आर. पिल्लई उपस्थित रहे। पाहेर विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. हेमंत कोठारी तथा विज्ञान एवं तकनीकी संकाय के अध्यक्ष प्रो. दिलेन्द्र हिरन ने भी सम्मेलन को संबोधित किया और सतत विकास में रसायन विज्ञान के योगदान पर अपने विचार साझा किए।

कॉन्फ्रेंस के दूसरे दिन में भी कई महत्वपूर्ण वैज्ञानिक व्याख्यान हुए। मॉरिशस से आए प्रसिद्ध वैज्ञानिक प्रो. रामास्वामी ने “एसडीजी प्राप्त करने में प्रायोगिक अनुसंधान को पूरक करने हेतु संगणनात्मक रसायन विज्ञान की भूमिका” पर विशद प्रस्तुति दी। गोवा विश्वविद्यालय की प्रो. प्रीतम बोरकर ने SnO₂ में धातु डोपिंग: स्वच्छ ऊर्जा एवं पर्यावरणीय अनुप्रयोगों के लिए बहु-कार्यात्मक नैनोमैटेरियल्स का एक मार्ग विषय पर अपने नवीन अनुसंधान साझा किए। गुजरात की पाटन विश्वविद्यालय की प्रो. संगीता शर्मा ने “भारतीय ऋषियों की रासायनिक विज्ञान में स्वदेशी ज्ञान प्रणाली (IKS) की भूमिका” पर व्याख्यान दिया, जबकि चेन्नई से आए प्रो. एस. रविचंद्रन ने “हरित रसायन शास्त्र के माध्यम से पर्यावरणीय सततता” विषय पर प्रेरणादायक प्रस्तुति दी। सम्मेलन में ओरल प्रेजेंटेशन वर्ग में सीनियर व यंग साइंटिस्ट के रूप में नितिन चौधरी व पूजा यादव को चुना गया , पोस्टर प्रेजेंटेशन वर्ग में सीनियर व यंग साइंटिस्ट अवार्ड अतुल पोल्ले तथा भावना शर्मा को दिया गया वंही स्टूडेंट साइंटिस्ट अवार्ड मनीषा धामी व भाग्य श्री को दिया गया | इन पुरस्कारों ने युवा शोधकर्ताओं को न केवल सम्मानित किया बल्कि उन्हें वैज्ञानिक नवाचार एवं सतत विकास के क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित भी किया।
सम्मेलन संयोजक प्रो. सीमा कोठारी ने बताया कि इस कॉन्फ्रेंस में देश-विदेश के 300 से अधिक प्रोफेसर, वैज्ञानिक तथा शोधार्थियों ने भाग लिया और अपने नवाचारों तथा शोध निष्कर्षों को मौखिक (Oral) एवं पोस्टर प्रस्तुति के माध्यम से साझा किया। इन प्रस्तुतियों से रसायन विज्ञान में सतत विकास के नवीन आयामों एवं व्यावहारिक संभावनाओं को नई दिशा मिली। कॉन्फ्रेंस का मंच संचालन डॉ. हिमानी, डॉ. पूर्णिमा, डॉ. शिखा और डॉ. श्रद्धा द्वारा कुशलतापूर्वक किया गया। कॉन्फ्रेंस सेक्रेटरी प्रो. नीतू शोरगर ने सम्मेलन की विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत की, जबकि समापन सत्र में प्रो. रक्षित आमेटा ने सभी अतिथियों, प्रतिभागियों और आयोजकों के प्रति हार्दिक धन्यवाद ज्ञापित किया। पाहेर विश्वविद्यालय द्वारा आयोजित यह कॉन्फ्रेंस न केवल रसायन विज्ञान के क्षेत्र में अनुसंधान एवं नवाचार को प्रोत्साहन देने में सफल रही बल्कि सतत विकास के उद्देश्यों (SDGs) को साकार करने की दिशा में एक सशक्त कदम भी सिद्ध हुई।













