मेवाड़ बचाओ मंच की पहली मुहिम उदयपुर का पैसा उदयपुर में सफल
उदयपुर। घर बैठे ऑनलाइन शॉपिंग से समय की बचत तो हो रही है लेकिन इसके बदले डार्क स्टोर अधिक शुल्क वसूल रहे हैं और स्थानीय व्यापारियों का रोजगार छीन रहा है यह बात उदयपुर के 3000 से ज्यादा व्यापारियों और 1 लाख से ज्यादा लोगां ने सोशल मीडिया पर स्वीकार की है। मेवाड़ बचाओं मंच ने स्थानीय व्यापारियों को इंस्टेंट डिलीवरी ऐप्स के कारण हो रहे नुकसान के बारे में लोगों को जागरूक करने के लिए मुहिम शुरू की है, इसका पहला पड़ाव सफलतापूर्वक पूरा हुआ है। 26 सितम्बर से शुरू हुए अभियान को लेकसिटी का जबरदस्त सपोर्ट मिला है। इस अभियान से प्रभावित होकर कई शहरवासियों ने ऑनलाइन शॉपिंग की बजाय स्थानीय व्यापारियों से जरूरत का सामान खरीदा और अन्य लोगों को भी इसके लिए जागरूक किया।

अभियान के संस्थापक अध्यक्ष अभिषेक पांडेय ने बताया कि डार्क स्टोर्स और इंस्टेंट डिलीवरी ऐप्स ने स्थानीय व्यापार और रोजगार की नींव को हिला दिया है। इस चुनौती के खिलाफ एक जनआंदोलन की शुरुआत मेवाड़ बचाओ मंच ने की, जिसकी पहली मुहिम “इस दिवाली उदयपुर का पैसा उदयपुर में” थी। पहले चरण में मंच की टीम ने 22 से अधिक प्रमुख बाजारों में जाकर 3000 से अधिक व्यापारियों से सीधा संवाद किया। तीन मूल सिद्धांतों सही दाम, बेहतर सुविधा और आत्मीय व्यवहार पर आधारित शपथ पत्र भरवाए गए। व्यापारियों ने न केवल समर्थन दिया, बल्कि अपने स्तर पर ग्राहकों को फ्री डिलीवरी देने का वादा भी किया। युवाओं को अभियान से जोड़ने के लिए लोकल हीरो कांटेस्ट भी शुरू किया गया है, जिसमें लोग स्थानीय दुकानों पर सेल्फी लेकर सामान खरीदने का पर एक हजार रूपये का नकद पुरस्कार प्रति विजेता दिये गये।
साथ ही उन्होंने कहा कि मेवाड़ बचाओ मंच की रणनीति है कि अब दूसरे चरण में जागरूकता अभियान शुरू किया जाएगा जिसमें शहर के चौराहों, बाजारों और पर्यटन स्थलों पर जाकर लोगों को समझाया जाएगा कि ऑनलाइन ऑफर्स के पीछे छिपे चार्जेस से वे अधिक भुगतान कर रहे हैं। इस अभियान का नाम व्यापारी का वादा, चीजों के दाम कम, ग्राहकी इज्जत ज्यादा रखा गया है जिसमें व्यापारियों के बाद अब ग्राहकों को जानकारी देकर जागरूक किया जाएगा। मंच ने हेल्पलाइन नंबर जारी किया है ताकि व्यापारी और आमजन सीधे सुझाव दे सकें। अभिषेक पांडेय ने बताया कि मंच की योजना है कि डोर-टू-डोर संपर्क अभियान चलाया जाकर चौराहों पर जनजागरण किया जाएगा और ग्राहकों को यह समझाया जाएगा कि “सस्ता देने का भ्रम, महंगे नुकसान की शुरुआत है। अभियान अगले पड़ाव में केवल व्यापार तक सीमित नहीं रहेगा। इसमें महिला रोजगार, सीनियर सिटीजन सुरक्षा, सफाई, शिक्षा और डिजिटल जागरूकता जैसे मुद्दों को भी जोड़ा जाएगा।













