सैप्सिस, मल्टी-ऑर्गन डिसफंक्शन सिंड्रोम, न्यूमोनिया, एक्यूट किडनी इंजरी और मेटाबोलिक एन्सेफलोपैथी जैसी बीमारियों से थी पीढ़ित
उदयपुर। पेसिफिक मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल के मेडिसिन विभाग के चिकित्सको ने सैप्सिस (रक्त संक्रमण),मल्टी-ऑर्गन डिसफंक्शन सिंड्रोम,न्यूमोनिया,एक्यूट किडनी इंजरी और मेटाबोलिक एन्सेफलोपैथी जैसी जीवन-घातक बीमारियों से पीढ़ित महिला का सफल उपचार कर नया जीवन दिया। इस सफल उपचार में मेडिसिन विभाग के प्रोफेसर डॉ.जयेश त्रिवेदी की टीम के साथ साथ न्यूरोलॉजिस्ट,नेफ्रोलॉजिस्ट एवं क्रिटिकल केयर चिकित्सकों की टीम का योगदान रहा। दरअसल 70 वर्षीय महिला को जब अस्पताल में भर्ती कराया गया, तो उनकी स्थिति बेहद गंभीर थी। डॉ.जयेश त्रिवेदी एवं उनकी टीम ने तुरन्त महिला की जॉच की तो महिला का बीपी बहुत कम था, श्वास लेने में दिक्कत हो रही थी साथ ही किडनियां पूरी तरह से काम करना बंद कर दिया एवं मेटाबोलिक एन्सेफलोपैथी की समस्या भी थी। तुरन्त महिला को आईसीयू में भर्ती किया गया एवं तुरंत एंटीबायोटिक्स दिए गए जिससे संक्रमण को फैलने से रोका जा सके। साथ ही बीपी को नियंत्रित करने के लिए दवाइयों और फ्लुइड्स भी दिया गया। गंभीर स्थिति को देखते हुए महिला को वेंटिलेटर पर रखा गया एवं डायलिसिस भी किया गया।

लगभग 15 दिन बाद महिला की हालत में सुधार आने लगा। धीरें धीरे संक्रमण कम हुआ और शारीरिक स्थिति में धीरे-धीरे सुधार दिखने लगा एवं महिला को वेंटिलेटर से हटा दिया गया। महिला की स्थिति धीरे-धीरे सामान्य होने लगी और डायलिसिस की जरूरत नहीं रही। साथ ही मानसिक स्थिति पूरी तरह ठीक हो गई। डॉ.जयेश त्रिवेदी ने बताया कि इस गंभीर स्थिति में किसी मरीज की जान बचाना बेहद मुश्किल होता है क्योंकि जब तीन या उससे अधिक अंगों पूरी तरह से कार्य करना बन्द करदे तो मरीज के बचने की संभावना न के बराबर हो जाती है। लेकिन पीएमसीएच में उपलब्ध विश्वस्तरीय सुविधाओ,विशेषज्ञ चिकित्सको की टीम,उच्चस्तरीय देखभाल एवं महिला की इच्छाशक्ति के चलते यह सब सम्भव हो पाया। डॉ.जयेश ने बताया कि लगभग 40 दिन आईसीयू में रहने के बाद महिला अभी पूरी तरह से ठीक है एवं डिस्चार्ज कर दिया है। महिला के परिजनों ने पीएमसीएच के चेयरमेन राहुल अग्रवाल,चिकित्सकों,आईसीयू एवं नर्सिगकर्मिर्यो की टीम का आभार ज्ञापित किया।













