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आधुनिक ऑन्कोलॉजी में बदलती तकनीकों और मरीजों के बेहतर भविष्य पर विचार-विमर्श

BY — August 21, 2026

ओन्कोकन्वर्ज 2026- पहले दिन कैंसर उपचार
की नई दिशाओं पर मंथन
उदयपुर। कैंसर के खिलाफ जंग केवल बीमारी से लड़ने की नहीं, बल्कि हर मरीज को जीवन की एक नई उम्मीद देने की लड़ाई है। इसी सोच के साथ उदयपुर में आयोजित राष्ट्रीय सम्मेलन श्ट्रेण्ड्स ऑफ ट्रांसफोर्मेशन इन ऑन्कोलॉजी ऑन्कोकन्वर्ज 2026’ के पहले दिन देशभर से जुटे विशेषज्ञों ने कैंसर उपचार में हो रहे बदलावों, आधुनिक तकनीकों और मरीजों के बेहतर उपचार परिणामों पर गहन मंथन किया। तीन दिवसीय सम्मेलन का उद्घाटन शुक्रवार को हुुआ।

सम्मेलन के पहले दिन का केंद्र बिंदु हेमेटोलॉजी, मेडिकल ऑन्कोलॉजी और कैंसर उपचार से जुड़ी जटिल चिकित्सकीय चुनौतियां रहीं। कार्यक्रम के प्रोग्राम डायरेक्टर डॉ. मनोज महाजन के मार्गदर्शन में आयोजित इस सम्मेलन में देश के विभिन्न हिस्सों से आए वरिष्ठ चिकित्सकों और विशेषज्ञों ने अपने अनुभव साझा किए। सम्मेलन का उद्देश्य शोध और वास्तविक क्लिनिकल प्रैक्टिस के बीच की दूरी को कम करते हुए मरीजों तक आधुनिक उपचार के बेहतर विकल्प पहुंचाना रहा।
पहले दिन ‘जेरियाट्रिक हेमेटोलॉजी एंड क्लिनिकल चौलेंजेज ’ सत्र में बुजुर्ग मरीजों में एनीमिया और ओपीडी में ऐसी चिकित्सकीय स्थितियों पर चर्चा हुई, जिन्हें नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए। इसके बाद लिम्फोमा के प्रबंधन पर डॉ. मनोज महाजन ने अपना वक्तव्य दिया। विशेषज्ञों ने इस बात पर जोर दिया कि उम्रदराज मरीजों में कैंसर उपचार के दौरान केवल बीमारी ही नहीं, बल्कि उनकी समग्र स्वास्थ्य स्थिति और जीवन की गुणवत्ता को भी ध्यान में रखना जरूरी है।
प्रोग्राम डायरेक्टर डॉ. मनोज महाजन ने बताया कि ‘मेटोलॉजी इमरजेंसीज एंड सपोर्टिव केयर ’ सत्र में फेब्राइल न्यूट्रोपेनिया तथा थ्रोम्बोसाइटोपेनिया और ब्लीडिंग डिसऑर्डर्स जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर पैनल चर्चा हुई। विशेषज्ञों ने बताया कि कैंसर उपचार के दौरान उत्पन्न होने वाली जटिलताओं की समय पर पहचान और प्रभावी प्रबंधन मरीज के उपचार परिणामों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
डॉ. सौरभ शर्मा ने बताया कि कार्यक्रम में मल्टीपल मायलोमा के निदान की चुनौतियों, वयस्कों में इम्यूनाइजेशन और गाइडलाइंस को अपनाने में आने वाली बाधाओं पर भी चर्चा हुई। वहीं प्रिशियन मेडिसीन इन एमआईडीए ग्लीओमा और इण्डिगो ट्रायल जैसे उभरते क्षेत्रों पर विशेषज्ञों ने आधुनिक शोध और उपचार विकल्पों की जानकारी साझा की।
डॉ. अंकुर शर्मा ने बताया कि सम्मेलन में देश के प्रमुख विशेषज्ञों की सहभागिता ने इसे ज्ञान और अनुभव के आदान-प्रदान का महत्वपूर्ण मंच बनाया। डॉ. विजयकुमार एस. शिरूरे, डॉ. अजय यादव, डॉ. हेमंत मल्होत्रा, डॉ. नारायण अधिकारी, डॉ. प्रीति अग्रवाल, डॉ. नितिन चौधरी, डॉ. अशोक शर्मा सहित अनेक विशेषज्ञों ने विभिन्न सत्रों और पैनल चर्चाओं में भाग लिया।
प्रोग्राम डायरेक्टर डॉ. मनोज महाजन ने सम्मेलन की भावना को मरीज-केंद्रित चिकित्सा से जोड़ते हुए कहा कि ऑन्कोलॉजी में हर नई खोज का अंतिम उद्देश्य मरीज को बेहतर उपचार, अधिक समय और बेहतर जीवन देना होना चाहिए। उन्होंने कहा कि कैंसर के उपचार में तेजी से हो रहे बदलावों के बीच चिकित्सकों के लिए लगातार सीखना और अपने ज्ञान को साझा करना बेहद जरूरी है।
पहले दिन की चर्चाओं में एक बात स्पष्ट रूप से सामने आई कि कैंसर के खिलाफ लड़ाई में आधुनिक विज्ञान के साथ मानवीय संवेदना भी उतनी ही जरूरी है। नई दवाओं और तकनीकों के साथ मरीज और उसके परिवार को उम्मीद देना ही चिकित्सा की वास्तविक सफलता है। ‘ओन्कोकन्वर्ज 2026’ का पहला दिन इसी विश्वास के साथ आगे बढ़ा कि शोध से निकली हर नई जानकारी किसी न किसी मरीज के जीवन में उम्मीद की एक नई किरण बन सकती है।

admin

doing active journalism from last 16 yrs. worked in leading news papers rajasthan patrika, dainik bhaskar.