उदयपुर। पेसिफिक विश्वविद्यालय के इतिहास विभाग तथा पेसिफिक सामाजिक विज्ञान एवं मानविकी महाविद्यालय के संयुक्त तत्वावधान में “प्राचीन भारतीय ज्ञान परंपरा, विज्ञान एवं ज्ञान के विविध आधुनिक आयाम” विषय पर दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन 22–23 अगस्त 2026 को किया जा रहा है। संगोष्ठी का भव्य शुभारंभ कल गरिमामय समारोह के साथ होगा।
इस अवसर पर देश-विदेश के शिक्षाविदों, शोधकर्ताओं, इतिहासकारों एवं विभिन्न विषयों के विशेषज्ञों की सहभागिता रहेगी। संगोष्ठी में प्राचीन भारतीय ज्ञान परंपरा, दर्शन, विज्ञान, शिक्षा, संस्कृति तथा आधुनिक संदर्भों में इसकी प्रासंगिकता पर व्यापक अकादमिक विमर्श किया जाएगा।
संगोष्ठी के मुख्य अतिथि मारवाड़ की जहांवी कुमारी मेवाड़ होंगी। कार्यक्रम में रेबेका टेलर , (ऑस्ट्रेलिया )एवं डॉ. अंशुमान शास्त्री , निदेशक, बनस्थली विद्यापीठ, जयपुर (राजस्थान) को आमंत्रित किया गया है। विशेष आमंत्रित अतिथि के रूप में प्रो. दिलबाग सिंह जी, जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय, नई दिल्ली कार्यक्रम की गरिमा बढ़ाएंगे।
संगोष्ठी के पैनल विमर्श में विभिन्न क्षेत्रों के प्रतिष्ठित विशेषज्ञ सहभागिता करेंगे। प्रथम पैनलिस्ट प्रो. दिलबाग सिंह जी, JNU, नई दिल्ली, तृतीय पैनलिस्ट डॉ. अहमद सूडान, यूनिवर्सिटी, चतुर्थ पैनलिस्ट डॉ. लोकेश भारती, DEO, उदयपुर तथा डॉ. श्रीकृष्ण जुगनू पैनल चर्चा में अपने विचार प्रस्तुत करेंगे। पैनल चर्चा के माध्यम से प्राचीन भारतीय ज्ञान परंपरा के विभिन्न वैज्ञानिक, ऐतिहासिक, सामाजिक एवं समकालीन आयामों पर गहन विचार-विमर्श किया जाएगा।
संगोष्ठी के सफल आयोजन के लिए राहुल अग्रवाल, प्रीति अग्रवाल, अमन अग्रवाल, प्रो. बी. पी. शर्मा, श्री शरद कोठारी एवं प्रो. हेमंत कोठारी ने अपनी हार्दिक शुभकामनाएं प्रेषित की हैं। उन्होंने इस महत्वपूर्ण अकादमिक पहल की सराहना करते हुए आशा व्यक्त की कि संगोष्ठी भारतीय ज्ञान परंपरा के विविध आयामों को वैश्विक अकादमिक मंच पर स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
दो दिनों तक चलने वाले इस अंतरराष्ट्रीय आयोजन में प्रतिभागी अपने शोधपत्र एवं विचार प्रस्तुत करेंगे तथा प्राचीन भारतीय ज्ञान परंपरा के वैज्ञानिक, दार्शनिक, सामाजिक और समकालीन पक्षों पर विचार-विमर्श करेंगे।
कांफ्रेंस निदेशक, डॉ. टी. पी. अमेटा तथा आयोजन सचिव, डॉ. अजात शत्रु सिंह शिवरती ने बताया कि संगोष्ठी का उद्देश्य प्राचीन भारतीय ज्ञान, दर्शन एवं विज्ञान के ऐतिहासिक और आधुनिक संदर्भों पर गंभीर अकादमिक विमर्श को बढ़ावा देना तथा नई पीढ़ी को भारत की समृद्ध ज्ञान-विरासत से जोड़ना है।
आयोजकों ने बताया कि संगोष्ठी को लेकर शिक्षाविदों एवं शोधार्थियों में विशेष उत्साह है और दो दिवसीय आयोजन में भारतीय ज्ञान परंपरा के संरक्षण, संवर्धन तथा वैश्विक प्रासंगिकता पर महत्वपूर्ण निष्कर्ष सामने आने की उम्मीद है।
उक्त जानकारी पाहेर विश्वविद्यालय के पी आर ओ डा कपिल वर्मा ने दी ।