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‘मूर्ति स्थापित करने वाला कभी विस्थापित नहीं होता’

| April 21, 2013 | 0 Comments

ऋषि मण्डल विधान में 500 जोड़ो ने भाग लिया

210409udaipur. श्री दिगम्बर जैन दशा हुमड़ समाज संस्था द्वारा भगवान महावीर जन्म जयन्ती समारोह एंव 2 करोड़ की लागत से बनने वाले प्रस्तावित त्रिमूर्ति दिगम्बर जैन मन्दिर निर्माण कार्यक्रम गणिनी आर्यिका 105 संगममति माताजी के सनिध्य में हिरण मगरी से. 4 स्थित श्री दिगम्बर दशा हुमड़ समाज भवन में दो दिवसीय ऋषि मण्डल विधान एंव सर्वशांति महायज्ञ आज सम्पन्न हुआ। इस में 500 इन्द्र-इन्द्राणी जोड़ो ने भाग लिया।

विधान के आयोजन से पूर्व आज से.4 स्थित पाश्र्वनाथ दिगम्बर जैन मन्दिर से एक भव्य शोभायात्रा निकाली गई जो विभिन्न मार्गाे से होती हुई श्री दिगम्बर जैन दशा हुमड़ समाज भवन पुहंची। शोभायात्रा में श्रावक-श्राविकाएं नाचते-गाते हुए श्रीजी का अभिनन्दन करते हुए चल रहे थे।
ऋषि मण्डल विधान एंव प्रस्तावित त्रिमूर्ति मन्दिर निर्माण कार्यक्रम आज गोदावत ने बताया कि शोभायात्रा के समाज भवन पहुंचने के पश्चात ध्वजारोहण,मंत्रोच्चार विधि द्वारा कार्यक्रम सम्पन्न हुए। तत्पश्चात संगममति माताजी के सानध्यि में दीप प्रज्जवलन,मण्डप शुद्धि,भूमि पूजन,इन्द्र देवता आमंत्रण  एंव अनय धार्मिक विधान कार्यक्रम आयोजित हुए। विधान में भगवान महावीर स्वामी का रंचामृत अभिषेक,शंातिधारा, के साथ ऋषि मण्डल यंत्र सथापित किया गया। ऋषि मण्डल से पूर्व माताजी का पाद प्रक्षालन,शास्त्र भेंट आदि कार्यक्रम सम्पन्न किए गए। ऋषि मण्डल विधान में सौधर्म,इन्द्र, यज्ञनायक,कुबेर के अलवा 25 प्रकार के इन्द्र बने हुए थे। विधान समाप्ति पश्चात सर्वशांति महायज्ञ हुआ। इसमें 108 मंत्रो द्वारा शंाति की स्थापना की गई। अंत में 101 दीपकों से भगवान महावीर की आरती की गई। आरती के पश्चात अचानक आई बारीश फुहारों ने जहां विधान को सफल बनाया,वहीं आज हुई बारीश की बौछारें भूमि शद्धि के नये आयाम खड़े करेगी।
इस अवसर पर आयोजित धर्मसभा को संबोधित करते हुए संगममति माताजी ने कहा कि प्रस्तावित त्रिमूर्ति दिगम्बर जैन मन्दिर कार्यक्रम आने का अवसर मिला जिसे मैं स्वयं को सौभाग्यशाली मानती हूं। जो व्यक्ति अपने जीवन में भगवान की मूर्ति स्थापित करता है वह जीवन में कभी विस्थापित नहीं होता है। मूर्ति की स्थापना जीवन में स्थिरता लाती है। उन्होंने कहा कि जो व्यक्ति तीर्थंकर पद के बंध को प्राप्त करने वाला व्यक्ति ही मूर्ति की स्थापना कर सकता है। अंत स्वामी वात्सल्य का आयोजन किया गया।
यह करे महावीर जयन्ती के दिन- 105 संगममती माताजी ने कह कि महावीर जयन्ती के दिन गली-मोहल्ले साफ रखें,हर घर में केसरिया ध्वज फरहरायें,महावीर के विचारों की वाणी घर में सुनें,उन विचारों को को जीवन में उतारें,यदि यह सब कर पाएं तभी हमारा महावीर जयन्ती मनाना सार्थक होगा।

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