भारत में सवा करोड़ व्यक्ति अंधता से पीडि़त

BY — October 12, 2011

अन्धत्व को दूर करने पर राष्ट्रीय सेमीनार शुरू

ग्रामीण क्षेत्रों अंधत्व का व्यापक प्रभाव

उदयपुर. विश्व दृष्टि दिवस की सार्थकता तभी सिद्ध होगी जब विश्व में अन्धता पीडि़त 4 करोड़ लोगों के रोग को दूर करने के उपाय व सुविधाओं में तेजी लाई जायेगी. अकेले भारत में ही सवा करोड़ लोग अन्धत्व से पीडि़त है. आश्चर्य यह कि इसमें भी एक करोड़ लोग ग्रामीण है जिन्हें यह रोग है.
अलख नयन मन्दिर व विजन 2020 द राइट टू साईट इंडिया संस्था के तत्वावधान में विश्व दृष्टि दिवस की पूर्व संध्या पर शुरू हुए दो दिवसीय राष्ट्रीय अधिवेशन के अवसर पर पत्रकारों से बातचीत करते हुए मुख्य अतिथि व राष्ट्रीय अंधता निवारण कार्यक्रम की निदेशक डॉ. सूजाया कृष्णन ने ये विचार व्यक्त किये. उन्होनें बताया कि भारत में अन्धत्व पीडि़त रोगों के पास सुविधाओं की कमी है. देश में उचित सुविधायें और कारगर उपाय किये जाये तो मोतियाबिंद के कारण हुए 80 प्रतिशत अन्धत्व को रोका या उसे ईलाज से ठीक किया जा सकता है. यदि रोग दूर करने के प्रयासों में तेजी नहीं लायी गयी तो आने वाले समय में देश में यह संख्या बढक़र वर्ष 2020 तक डेढ़ करोड़ हो जायेगी.
अलख नयन मंदिर की कार्यकारी ट्रस्टी डॅा. लक्ष्मी झाला ने बताया कि भारत विश्व स्वास्थ्य संगठन का एक सदस्य देश होने के नाते देश में अन्धता से पीडि़त सवा करोड़ की संख्या को कम करने हेतु प्रयासरत है. उन्होने बताया कि विभिन्न संस्थाओं के प्रयासों को एक दिशा प्रदान करने और राष्ट्रीय अन्धता निवारण कार्यक्रम को एक मजबूत आधार प्रदान करने के उद्देश्य से भारत में विजन-2020 द राईट टू साईट इण्डिया की स्थापना की गई है। विजन 2020 ने नेत्र चिकित्सा क्षेत्र कार्य कर रही सभी सरकारी व राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय गैर सरकारी संस्थाओं को एक मंच प्रदान किया है ताकि वर्ष 2020 तक भारत को अन्धता से मुक्त किया जा सके.
डॅा. झाला ने बताया कि सम्मेलन में अलख नयन मंदिर एवं विजन 2020 द राईट टू साईट इंडिया के देशभर से आये सदस्य भाग लेंगे. महाराणा मेवाड़ चेरिटेबल फाउण्डेशन ट्रस्ट के अध्यक्ष अरविन्दसिंह मेवाड़ ने अंधता निवारण के कार्यक्रम में सक्रिय भूमिका निभाते हुए अपने सामाजिक सरोकार को सार्थक किया. उन्होनें बताया कि अलख नयन मंदिर का इस क्षेत्र में अंधता निवारण में पिछले कई वर्षाें से अपना महत्वपूर्ण योगदान करता रहा है.
विजन-2020 के मुख्य उद्देश्य
1. भारत की नेत्र चिकित्सा संस्थाओं के साथ मिलकर अन्धता निवारण के लिए चिकित्सा सेवाओं को उत्तम बनाना, दृष्टि विहिन व्यक्तियों के लिए पुर्नवास उपर्युक्त नितियों का विकास, गुणवत्ता के मापदण्ड तैयार करना, सरकारी तंत्र के सहयोग से प्रशिक्षण देना और सर्वश्रेष्ठ कार्य प्रणालियों का प्रचार करना। समाज के कमजोर एवं पिछडे वर्ग के लिए उचित सुविधाएं उपलब्ध करवाना.
2. विजन 2020 इण्डिया अपने सदस्य संस्थाओं के साथ मिलकर विश्व दृष्टि दिवस का राष्ट्रीय कार्यक्रमों का संयोजन करती है.
3. भारत में नेत्र चिकित्सा कार्यक्रमों से सम्बन्धित योजना बनाने में महत्वपूर्ण सूझाव देना.
4. राष्ट्रीय अन्धता निवारण कार्यक्रम के लिए विशेषकर 11 वीं पंचवर्षीय योजना में विशेष राय देना.
5.बाल अन्धता, डायबिटीक रेटिनोपेथी, कोर्निय अन्धता, दृष्टि दोष पर राष्ट्रीय एवं क्षेत्रिय स्तर की कार्यशालाओं का आयोजन कर, मानव संसाधनों व संस्थागत क्षमताओं का विकास करना.
6.हेल्थ मेनेजमेन्ट इन्फोर्मेशन सिस्टम का सॉफ्टवेयर को तैयार करवाना. स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा प्रसारित यह एक राष्ट्रीय स्तर का प्रबन्ध सूचना तंत्र है, जिससे अन्धता निवारण कार्यक्रम के आंकलन के लिए आंकडे उपलब्ध हो सके. इसके द्वारा विभिन्न योजनाओं के क्रियान्वन को गति प्राप्त होगी.
7.स्वास्थ्य मंत्रालय के साथ मिलकर संक्रमण नियंत्रण निर्देशों को तैयार किया गया है, जिन्हें शीघ्र प्रकाशित होने वाली केटरेक्ट मेन्यूअल नामक पुस्तक में सम्मलित किया जाएगा.
8.राज्य प्रतिनिधियों के साथ मिलकर चयनित राष्ट्रीय, राज्य व जिला स्तरीय योजनाओं के क्रियान्वन की योजनाओं का विकास करना तथा इनके क्रियान्वन के लिए गैर सरकारी संस्थाओं व अधिकारियों को सहयोग करना.
9. बेहतर नेत्र चिकित्सा कार्यक्रमों के लिए केन्द्र व राज्य सरकारों तथा अन्र्तराष्ट्रीय गैर सरकारी संस्थाओं के साथ विशेष विचार-विमर्श तथा परामर्श करना व सर्वश्रेष्ठ कार्यप्रणाली का प्रसार, नेत्र चिकित्सा दिशा निर्देश देना.
10. सदस्य संस्थाओं के साथ पायलट प्रोग्राम तैयार कर अनुसंधान करना। सदस्य संस्थाओं को परामर्श देकर नीति निष्पादकों को चिकित्सा व गैर चिकित्सीय नेत्र चिकित्सा से जुड़े मामलों से अवगत कराकर प्रमाणित आंकड़ों को एकत्रित व व्यस्थित करना है.

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admin

doing active journalism from last 16 yrs. worked in leading news papers rajasthan patrika, dainik bhaskar.

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