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जीवन की तलाश करती कविता : नंद बाबू

BY — November 27, 2011

13 वें आचार्य निरंजननाथ सम्मान से दो साहित्कार सम्मानित

मंच पर मौजूद डॉ. भारद्वाज, नंद चतुर्वेदी, नीलिमा टिक्‍कू, गोविंद माथुर एवं देशबंधु आचार्य।
समारोह में मौजूद साहित्‍यकार।

udaipur. आचार्य निरंजननाथ स्मृति सेवा संस्थान व साहित्यिक पत्रिका सम्बोधन के संयुक्त तत्वावधान में अखिल भारतीय स्तरीय 13 वां आचार्य निरजंननाथ सम्मान आज भारतीय लोक कला मण्डल के कठपुतली प्रेक्षालय में आयोजित किया गया।
मुख्य अतिथि प्रख्यात साहित्यकार नंद चतुर्वेदी ने कहा कि देश में लोग जहां स्वार्थों के कारण हिंसा पर उतारू हो गये है, रिश्ते समाप्त होने लगे है। पहले जीवन कविता की तलाश करता था वहीं समय ने ऐसी करवट ली कि आज कविता को जीवन की तलाश करनी पड़ रही है। महानगरों में दिये जाने वाले पुरूस्कार आज अखाड़ों में पहलवानी कारण बन चुके है। फर्क सिर्फ यह है कि लंगौटी किसी के हाथ नहीं आ रही है। ऐसे में यह पुरूस्कार पिछले 15 वर्षो में पारदर्शी एवं निर्विवाद रह पाया जो काफी सराहनीय है।
विशिष्ठ अतिथि कथाकार एंव उपन्यासकार डॉ. राजेन्द्र मोहन भटनागर ने कहा कि भ्रष्‍टाचार के इस माहौल में समझ नहीं आता कि किस प्रकार वे मंत्री सत्यता की शपथ ले लेते है कि वे आजीवन सत्यता का साथ देंगे लेकिन सभी जानते हैं कि वे कितना सत्य बोलते है। साहित्यकार ही लोगों को आगे आने के लिये प्रेरित कर सकता है। अध्यक्षता करते हुए वरिष्ठ साहित्यकार एंव साहित्यिक पत्रिका अक्सर के संपादक डॉ. हेतु भारद्वाज ने भी विचार व्यवक्तक किए।
अतिथियों ने हिन्दी के वरिष्ठ कवि गोविन्द माथुर को उनकी काव्य कृति बची हुई हंसी पर 31 हजार रुपए तथा नीलिमा टिक्कू की प्रथम प्रकाशित कृति रिश्तों की बगिया कहानी संग्रह पर ग्यारह हजार रुपए नकद के साथ श्रीफल, स्मृति चिन्ह व प्रशस्ति-पत्र प्रदान किया।
सम्मान समिति के संयोजक कमर मेवाड़ी ने बताया कि 1995 से आयोजित इस सम्मान से अब तक प्रतिवर्ष एक साहित्यकार को सम्मानित किया जाता रहा लेकिन पहली बार जन्मशती वर्ष के उपलक्ष्या में इस सम्मान से दो साहित्यकारों को सम्मानित किया गया और दोनों साहित्यकार राजस्थान से है।
प्रारम्भ में सम्मान समिति के डॉ. देशबंधु आचार्य ने अतिथियों का स्वागत करते हुए पुरूस्कार की रूपरेखा प्रस्तुत की। कार्यक्रम का संचालन नरेन्द्र निर्मल ने किया।

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