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हिंदुस्तान जिंक ने 6 वर्षाे में लगाए 8.55 लाख से अधिक पौधे

BY — July 27, 2026

जैव विविधता संरक्षण, पारिस्थितिकी तंत्र बहाली और देशी प्रजातियों के संवर्धन की दिशा में बड़ा कदम
उदयपुर। विश्व की सबसे बड़ी एकीकृत जिंक उत्पादक कंपनी और विश्व की शीर्ष 10 चांदी उत्पादक कंपनियों में शामिल हिंदुस्तान जिंक लिमिटेड ने वर्ष 2020 से वित्त वर्ष 2027 की पहली तिमाही तक 8.55 लाख से अधिक पौधरोपण किया है। यह उपलब्धि कंपनी की जैव विविधता संरक्षण, पर्यावरण पुनस्र्थापन और जलवायु संरक्षण के प्रति मजबूत प्रतिबद्धता को दर्शाती है।

वैज्ञानिक वनीकरण, प्राकृतिक आवासों की बहाली और जैव विविधता प्रबंधन कार्यक्रमों के माध्यम से हिंदुस्तान जिंक राजस्थान और उत्तराखंड में अपने परिचालन क्षेत्रों में पर्यावरणीय संतुलन को मजबूत करने के लिए लगातार कार्यरत है। वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान ही कंपनी ने 1,13,500 से अधिक पौधे लगाए है। यह कंपनी के वर्ष 2030 तक जैव विविधता हानि को रोकने और प्राकृतिक संसाधनों, वनस्पतियों तथा पारिस्थितिक तंत्र की गुणवत्ता एवं मजबूती बढ़ाने के दीर्घकालिक लक्ष्य का हिस्सा है।
हिंदुस्तान जिंक के सीईओ अरुण मिश्रा ने कहा कि जिम्मेदार खनन केवल बेहतर संचालन तक सीमित नहीं है, बल्कि प्रकृति के संरक्षण और आने वाली पीढ़ियों के लिए स्वस्थ पर्यावरण तैयार करने से भी जुड़ा है। हमारा हर प्रकृति संरक्षण अभियान औद्योगिक विकास और पर्यावरणीय जिम्मेदारी के बीच संतुलन बनाने की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। वैज्ञानिक तरीकों, नवाचार और साझेदारी के माध्यम से हम ऐसा सकारात्मक पर्यावरणीय प्रभाव पैदा करना चाहते हैं, जिससे प्रकृति और उद्योग दोनों साथ-साथ आगे बढ़ सकें।
हिंदुस्तान जिंक ने अपने विभिन्न परिचालन क्षेत्रों में स्थानीय पर्यावरणीय जरूरतों के अनुरूप कई महत्वपूर्ण पहलें शुरू की हैं। राजस्थान स्थित चंदेरिया लेड-जिंक स्मेल्टर में कंपनी ने माइकोराइजा तकनीक की मदद से 22.25 हेक्टेयर जारोफिक्स यार्ड का पुनर्स्थापन किया है और आगे 250 हेक्टेयर क्षेत्र में प्राकृतिक वन विकास का लक्ष्य रखा है। ग्रीन जावर पहल के तहत जावर माइंस समूह ने रावा गांव में व्यापक वृक्षारोपण अभियान चलाया है, जिससे स्थानीय समुदाय की भागीदारी बढ़ी है और क्षेत्र की जैव विविधता को भी मजबूती मिली है। कंपनी ने राजपुरा दरीबा, चंदेरिया, देबारी और कायड़ में मियावाकी तकनीक को अपनाया है। इस तकनीक से सघन और तेजी से विकसित होने वाले देशी वन तैयार किए जा रहे हैं, जो जैव विविधता बढ़ाने और कार्बन अवशोषण में मददगार हैं।
इसके अलावा, रामपुरा आगुचा माइंस में देशी पौधों के संरक्षण और भविष्य के वृक्षारोपण कार्यक्रमों के लिए पौध तैयार करने हेतु विशेष नर्सरी विकसित की गई है। जैव विविधता संरक्षण को और मजबूत करने के लिए हिंदुस्तान जिंक ने इंटरनेशनल यूनियन फॉर कंजर्वेशन ऑफ नेचर के सहयोग से अपने बायोडायवर्सिटी मैनेजमेंट प्लान को विकसित और अद्यतन किया है। कंपनी का लक्ष्य नो नेट लॉस ऑफ बायोडायवर्सिटी हासिल करना है, अर्थात् विकास गतिविधियों के बावजूद जैव विविधता में कुल मिलाकर कोई नुकसान न हो।
ये सभी प्रयास हिंदुस्तान जिंक की उस व्यापक रणनीति का हिस्सा हैं, जिसके तहत कंपनी अपने परिचालन विस्तार के साथ-साथ प्राकृतिक संसाधनों को भी मजबूत बना रही है। इसमें खराब हो चुकी भूमि की बहाली, देशी वनस्पतियों का विस्तार, पारिस्थितिकी तंत्र सेवाओं को बढ़ावा देना तथा प्रकृति-आधारित समाधान अपनाना शामिल है।
वेदांता समूह की कंपनी हिंदुस्तान जिंक, इंटरनेशनल काउंसिल ऑन माइनिंग एंड मेटल्स से जुड़ने वाली भारत की पहली धातु एवं खनन कंपनी है। कंपनी यह साबित कर रही है कि जिम्मेदार खनन और पर्यावरण संरक्षण साथ-साथ चल सकते हैं। आईसीएमएम के नेचर पोजिशन स्टेटमेंट के अनुरूप हिंदुस्तान जिंक अपने परिचालन, सप्लाई चेन और प्रबंधन प्रणालियों में प्रकृति-सकारात्मक दृष्टिकोण को बढ़ावा दे रही है, ताकि लोगों और पर्यावरण दोनों के लिए स्थायी मूल्य का निर्माण किया जा सके।

admin

doing active journalism from last 16 yrs. worked in leading news papers rajasthan patrika, dainik bhaskar.