सामुदायिक वन अधिकार अधिनियम पर विस्तृत दिशा-निर्देश

BY — December 14, 2011
कार्यशाला को संबोधित करते अतिथि.
कार्यशाला में मौजूद प्रतिभागी.

udaipur. ’वन अधिकार अधिनियम, 2006 क्रियान्विति एवं कठिनाईयां ‘ विषय पर टी.आर.आई. सभागार में बुधवार को कार्यशाला हुई। मुख्य अतिथि डूंगरपुर के जिला प्रमुख भगवतीलाल रोत थे। अतिथियों का स्वागत टीआरआई के निदेशक ने किया। प्रथम सत्र में वन अधिकार अधिनियम की सामान्य जानकारी प्रदान करते हुए उपनिदेशक, जनजाति क्षेत्रीय विकास विभाग ने कहा कि अधिनियम का क्रियान्वयन आरंभ हो चुका है तथा राज्य में अब तक 30 हजार से अधिक अधिकार पत्र जारी किये जा चुके हैं। वन अधिकार भू-आवंटन पट्टा न होकर वनभूमि के उपयोग हेतु अधिकार पत्र है जो जनजातियों एवं वन निवासियों को उनके जीविकोपार्जन के लिए प्रदान किये जाते हैं। यह अधिकार-पत्र अहस्तांतरणीय है। वन अधिकार अधिनियम का नोडल डिपार्टमेंट जनजाति क्षेत्रीय विकास विभाग है, किन्तु हर स्तर पर समिति में वन विभाग के प्रतिनिधि सदस्य है। उप वन संरक्षक ओ. पी. शर्मा ने कहा कि अधिनियम को उसकी भावना के अनुरूप समझना होगा और इस अधिनियम का क्रियान्वयन वन संरक्षण एवं वन निवासियों की  जीवन निर्वाह की आवश्यकता के अनुरूप किया जाना चाहिए। इस कानून के क्रियान्वयन में वन विभाग पूरी तरह से सहयोगी है, किन्तु अधिनियम के प्रावधानों की पालना सामुदायिक हितों को भी ध्यान में रखते हुए करना जरूरी है।
दूसरे सत्र में सामुदायिक वन अधिकार पर विशद चर्चा की गयी। सामुदायिक वन अधिकार के क्रियान्वयन में तेजी लाने के लिये उसमें और भी अधिक स्पष्टता लानी होगी । तृतीय सत्र में खुली चर्चा तीन बिन्दुओं को समाहित करते हुए की गई।
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