संग-संग करें सफर तो नहीं होंगे ‘सफर’

BY — March 20, 2012

कार्यशाला के दूसरे दिन ट्रेफिक जाम पर चर्चा

udaipur. झीलों की नगरी उदयपुर में वर्षपर्यंत झीलें भरी रहें और इसके साथ ही शहरवासियों तथा पर्यटकों को रोजमर्रा की ट्राफिक जाम जैसी तकलीफ से निजात दिलाने के लिए फ्रांस के स्ट्रासबर्ग शहर तथा उदयपुर शहर के विषय विशेषज्ञों ने मंगलवार को यहां सिटी पैलेस स्थित सभागार में गहन विचार विमर्श किया।

विरासत संरक्षण को लेकर नगर परिषद द्वारा सोमवार से आयोजित की गई पांच दिवसीय कार्यशाला के दूसरे दिन स्ट्रासबर्ग शहर के नगर नियोजक गैरालडाइन मेस्टली, फ्रेंकोईज, एलिस डेलजेंट ने स्ट्रासबर्ग की यातायात नियंत्रण व्यवस्था को बताया। इन विदेशी अतिथियों का मानना था कि उदयपुर शहर का प्रत्येक व्यक्ति आने-जाने के लिए अपना निजी वाहन इस्तेमाल करता है। जबकि यदि केवल सिटी वाहनों का प्रयोग किया जाए तो ट्राफिक जाम की समस्या से निजात पाया जा सकता है। इसके साथ ही मेवाड़ के जल संचय, संरक्षण एवं प्रबंधन में जिस प्रकार विरासत को ध्यान में रखते हुए यहां के पूर्व शासकों ने तकनीकी तौर पर जो कार्य किए थे। आज यदि उन्हें ही सुव्यवस्थित तरीके से कराया जाए तो निश्चित रूप से शहर भर की झीलें साफ-सुथरी एवं लबालब रह सकती है। कार्यशाला में स्थानीय विषय विशेषज्ञों ने शहर की यातायात व्यवस्था एवं जल संचय प्रणाली में हो रही खामियों एवं उनके निराकरण पर भी चर्चा की। उल्लेखनीय है कि पांच दिवसीय कार्यशाला का समापन 23 मार्च को होगा।
ये थे उपस्थित: कार्यशाला में महाराणा मेवाड़ चेरिटेबल फाउण्डेशन उदयपुर के प्रतिनिधि भूपेन्द्र सिंह आउवा, डॉ. मयंक गुप्ता, यूआईटी से एस.के. श्रीमाली, आर.सी. कविया, एच.ए. संचेती, नगर परिषद से इरशाद अहमद, शिशिर कांत वाष्र्णेय, मनीष अरोड़ा, नीरज माथुर, शशिबाला सिंह, गुडग़ांव की संस्था ड्रोन के निर्देशक डॉ. शिखा जैन, गेबरियल ओडीन, नई दिल्ली से आकाश हिंगरोनी, मैसूर से वी.गोविंद कुट्टी तथा उदयपुर के महेश शर्मा एवं बी. एल. मंत्री ने भाग लिया।

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admin

doing active journalism from last 16 yrs. worked in leading news papers rajasthan patrika, dainik bhaskar.

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