तथ्य जुटाने के साथ उनका सत्यापन भी जरूरी

BY — March 30, 2012

पत्रकारिता के बदलते परिदृश्य पर परिचर्चा

व्‍याख्‍यानमाला को संबोधित करते दोनों मुख्‍य पत्रकार वक्‍ता।

उदयपुर। वर्तमान दौर सिर्फ सूचना देने तक की सीमित नहीं रहा। समय है पत्रकारिता के दौरान तथ्यों को जुटाना और उसका सत्यापन भी करना। यही है बदलते पत्रकारिता के परिदृश्य। ये तथ्यर उभरकर आए पत्रकारिता के बदलते परिदृश्य विषयक व्याख्यानमाला में जो जनार्दनराय नागर राजस्थान विद्यापीठ विश्वविद्यालय के जनपद मीडिया सेन्टर की ओर से आयोजित की गई थी।

विद्यापीठ के डबोक स्थित लोकमान्य तिलक शिक्षक प्रशिक्षण महाविद्यालय सभागार में आयोजित व्याख्यानमाला में नई दिल्ली के पत्रकार प्रताप सोमवंशी ने उदाहरण देते हुए बताया कि मराठी अखबार देश उन्नति ने हर प्रति के साथ किसानों की आत्महत्या के कारणों को स्पष्ट करने वाला फार्म प्रकाशित करना शुरू किया। जिसमें किसान की जानकारी, कर्जे की राशि आदि से जुड़ी जानकारियां थी। महाराष्ट्र में एक जनहित याचिका की सूची दी तो सरकार ने निजी कारणों का हवाला देते हुए आत्महत्या होना बताया। देश उन्नति ने हाई कोर्ट के माध्यम से सारे तथ्य स्पष्ट करवाये और अंत में जीत देश उन्नति की हुई।
सोमवंशी ने कहा कि बड़े अखबार भी कस्बों से ही निकले हैं। इन अखबारों का स्वरूप बड़ा होने के पीछे भी कारण है। इन अखबारों ने देश के विकास के छोटे-छोटे प्रयासों से जुडाव रखा जिससे इन्हें त्वरित परिणा में भी मिल गये। शहरी हो या देहाती क्षेत्र की पत्रकारिता वर्तमान में अखबार का जागरूक रहना बेहद आवश्यक है।

मंचासीन अतिथि।

पाठकों की उपेक्षा न हो
जयपुर के पत्रकार आलोक श्रीवास्तव ने ने बताया कि पाठको की रूची और उनकी जिज्ञासाओं की कभी उपेक्षा नहीं करनी चाहिए। हमें चाहिए कि पाठकों को सम्पूर्ण जानकारी के साथ जानकारियां उपलब्ध करवाएं। साथ ही संकल्प करें कि पाठकों द्वारा चाही गई सारी जानकारी उन्हें परोसे। इसके अतिरिक्त उन्होंने प्रेस की स्वतंत्रता के साथ साथ अखबार के विकास की प्रक्रिया भी बताई। आरंभ में दीप प्रज्जवलन कर संस्था गीत गान हुआ। शुभारंभ विद्यापीठ के चांसलर प्रो. भवानीशंकर गर्ग ने विद्यापीठ के इतिहास के बारे में तथा ग्रामीण क्षेत्रों में संचालित सतत् शिक्ष के बारे में जानकारी दी।
मुख्य अतिथि वाइस चांसलर प्रो. दिव्यप्रभा नागर ने बताया कि गांव देश भारत में जहा लगभग 80 प्रतिशत आबादी ग्रामीण इलाके मे रहती हैं देश की बहुसंख्यक आम जनता को खुशहाल एवं शक्ति सम्पन्न बनाने में ग्रामीण पत्रकारिता की महत्वपूर्ण भूमिका हो सकती है।
जनपद मीडिया के समन्वयक डॉ. लक्ष्मीनारायण नन्दवाना ने अतिथियों का स्वागत एवं परिचय करवाया। संचालन अमी राठोड एवं देवेन्द्रा आमेटा ने किया जबकि धन्यवाद की रस्म महाविद्यालय की प्राचार्या डॉ. शशि चितौड़ा ने अदा की। समारोह में विद्यापीठ के विभागाध्यक्ष एवं नगर के अनेक गणमान्यमान्य, शिक्षाविद, पत्रकार, छात्र—छात्राएं उपस्थित थे।

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admin

doing active journalism from last 16 yrs. worked in leading news papers rajasthan patrika, dainik bhaskar.

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