भारतीयता बुद्धि नहीं मन का विषय : नामवर सिंह

BY — September 7, 2012

मोहनलाल सुखाडिया स्मृति व्याख्यानमाला

udaipur. प्रख्यात आलोचक, साहित्यकार और महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिन्दी विश्वविद्यालय के कुलाधिपति प्रो. नामवर सिंह ने कहा कि भारतीयता को धार्मिक संकीर्णता से मुक्त करने की आवश्यकता है तभी सच्चे अर्थों में भारतीयता को आत्मसात किया जा सकेगा, क्योंकि यह एक ऐसा शब्द है जो बुद्धि का नहीं बल्कि मन का विषय है और दिल से समझने का विषय है।

प्रो सिंह शुक्रवार को मोहनलाल सुखाडि़या विश्वविद्यालय की ओर से आयोजित मोहनलाल सुखाडिया स्मृति व्याख्यांनमाला में बोल रहे थे। ऑडिटोरियम में ‘भारतीयता की अवधारणा’ विषयक आयोजित व्याख्यान में मुख्य वक्ता के रूप में सिंह ने कहा कि भारतीयता एक पहेली है जिसे आज तक सुलझाया जा रहा है तथा हम तब तक इसे सुलझाते रहेंगे जब तक हमारा जीवन है। हिन्दू शब्द की अवधारणा को स्पष्ट करते हुए उन्होंने कहा कि बंटवारे के समय हमने इसे भारत शब्दू दिया जिसे अंगेजी में इंडिया कहा गया। जवाहरलाल नेहरु की पुस्तक डिस्क्वरी आफ इंडिया के उदाहरण के जरिए स्पष्ट करते हुए सिंह ने कहा कि नेहरुजी ने भारत की खोज की और वही खोज हम सब लोग आज भी कर रहे हैं। यही भारतीयता है जिसकी खोज हर व्यक्ति की अपनी खोज है। उन्होंने कहा कि भारत केवल एक भूगोल नहीं है बल्कि यह सभ्यता, संस्कृ्ति, परम्पराओं, त्योहारों तथा ग्रामगीतों से मिलकर बना है।

भाषा और बोलियों के महत्व को रेखांकित करते हुए उन्हों ने कहा कि ग्रीयर्सन ने भारतीय भाषाओं और बोलियों के नमूने एकत्र किए उन्हें संग्रहित कर संजोया लेकिन आज कितनी बोलियों लुप्त हो गई है और कितनी बोलियों को कितने लोग बोल रहे हैं, यह पता लगाया जाना चाहिए। जनगणना की विसंगति की ओर ध्यान दिलाते हुए प्रो. सिंह ने कहा कि जनगणना के दौरान भाषा और बोली की पड़ताल का विकल्प भी होना चाहिए ताकि यह पता लग सके कि देश में आज जीवित तौर पर कितनी बोलियां विद्यमान है। भाषा के महत्व के बारे में उन्‍‍होंने कहा कि सरकारें भाषाओं की परवाह नहीं करती, क्योंकि उन्हें पता है कि वे भाषा नहीं जानेंगे, तब भी राज कर लेंगे। नामवर सिंह ने कहा कि कुछ लोग भारत को हिन्दू राष्ट्रं बनाना चाहते हैं। पाकिस्तांन के जवाब में हम क्यान बना रहे हैं, यहच बडा़ सवाल है क्यों कि कहीं ऐसा ना हो कि हम दूसरा पाकिस्ताजन ही बना रहे हों। उन्होंने सवाल किया कि क्या केवल जन्म लेने मात्र से ही कोई भारतीय हो जाता है। इसके प्रति गम्भींरता भरी सोच की भी आवश्यकता है, तभी शब्द की महत्ता सार्थक होगी।

उन्होंने भारतीय दर्शन में आत्मा और ब्रह्म शब्द का उल्लेख करते हुए कहा कि इनका कोई अंग्रेजी पर्याय नहीं है क्यों कि यह हमारे जन जीवन में रच बस गया है। शहर विधायक गुलाबचन्द कटारिया तथा कांग्रेस की शहर जिलाध्यक्ष नीलिमा सुखाडिया ने भी भारतीयता पर अनुभव और विचार व्यक्त किए। अध्यक्षता कुलपति प्रो आईवी त्रिवेदी ने की। छात्र कल्याण अधिष्ठाता प्रो. कैलाश सोडाणी ने मुख्य वक्ता का परिचय दिया तथा अतिथियों का स्वागत किया। छात्रसंघ अध्यक्ष पंकज बोराणा ने अतिथियों का माल्यार्पण कर स्वागत किया। संचालन डा अंजना ने किया। सभी अतिथियों ने एफएमएस परिसर में पौधरोपण भी किया।

पुस्तक का विमोचन : सुखाडि़या हिन्दी विभाग के सहायक आचार्य डॉ. नवीन नन्दवाना की संपादित पुस्तक ‘आधुनिक कविता:धार एवं धरातल‘ का विमोचन हुआ। विमोचन करने वाले अतिथियों में अंतरराष्ट्रींय हिन्दी विश्वसविद्यालय, वर्धा के कुलाधिपति प्रो. नामवर सिंह, सुविवि कुलपति प्रो. आई. वी. त्रिवेदी, डीएसडब्यूचन प्रो. कैलाश सोडाणी एवं प्रो. माधव हाड़ा प्रमुख थे। हिन्दी के चार महान कवियों अज्ञेय, केदारनाथ अग्रवाल, नागार्जुन एवं शमशेर बहादुर सिंह की जन्म शताब्दी पर चारों कवियों के साहित्यिक अवदान का स्मरण करने वाली इस पुस्तक को संपादक ने चार खंडों में विभक्त किया है।

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admin

doing active journalism from last 16 yrs. worked in leading news papers rajasthan patrika, dainik bhaskar.

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