धर्म से भाषा का कोई नाता नहीं : नंद चतुर्वेदी

BY — September 14, 2012

भाषा पर शहर की बपौती से गांव की बोलियों का व्यवहार कम हुआ

udaipur. भाषा का किसी धर्म से कोई नाता नहीं है। धर्म के साँचों में बांटकर हम भाषा का अहित ही करते हैं। भाषा का जनता से अलग अस्तित्व नहीं है, जनता जिस भाषा को मंजूर कर लेती है वही भाषा निरंतर विकसित होती है और हिन्दी भाषा जनता की अपनी भाषा है इसीलिए विकासमान है।

हिन्दी के विख्यात कवि और आलोचक डॉ. नंद चतुर्वेदी ने हिन्दी दिवस के अवसर पर सामाजिक विज्ञान एवं मानविकी महाविद्यालय में व्याख्यान के दौरान ये विचार व्यक्त किए। ’बाजार और शुद्धता के बीच हिन्दी’’ विषयक व्याख्यान में डॉ. चतुर्वेदी ने कहा कि भाषा को लेकर भी गांव और शहर के बीच खींचतान बढ़ गई है, भाषा पर शहर की बपौती से गांव की बोलियों के शब्दों का व्यवहार कम होने लगा है। यह भाषा के विकास के लिए शुभ संकेत नहीं है। उन्होंने कहा कि विज्ञापन और कविता के बीच का अंतर समाप्त होता जा रहा है, कविता विज्ञापन बन रही है और विज्ञापन कविता जैसे हो गए हैं।

उन्होंने बाजार के चरित्र को समझने की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा कि बाजार का कार्य बेचना है। वह अपने मुनाफे के फेर में रचना की भाषा को बिक्री की भाषा बना सकता है। उन्होंने कहा कि बाजार के फेर में भाषा की मौलिकता समाप्त हो जाएगी और उसका माधुर्य जाता रहेगा। उन्होंने भाषा के शुद्धतावादी रवैये की भी आलोचना की उन्होंने कहा कि शुद्धता की जिद पढे़—लिखों के आतंक जैसी होती है, इससे साधारण लोगों में नाराजगी और विरोध का भाव पैदा होता है। शुद्धता के कारण भाषा का रस समाप्त हो जाता है और यांत्रिकता बढ़  जाती है। अधिक शुद्धता का आग्रह भाषा को उपहास का विषय बना देता है। उन्होंने कहा कि किसी भी भाषा का अस्तित्व किसी अन्य भाषा का प्रतिरोध नहीं करता अपितु एक भाषा दूसरी भाषा को रचती है। उन्होंने राममनोहर लोहिया और चतरसिंह बावजी के प्रयासों की सराहना की।
विशिष्ट अतिथि डॉ. विजय कुलश्रेष्ठ ने हिन्दी भाषा के प्रयोजनमूलक स्वरूप और उसकी स्वीकार्यता के लिए अधिक परिश्रम किए जाने की आवश्यकता जताई और कहा कि भाषा के प्रति हमें संवेदनशील बनना होगा। कार्यक्रम की अध्यक्षता मानविकी संकाय के अध्यक्ष प्रो. शरद श्रीवास्तव ने की। अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में उन्होंने बाजार की ताकत को रेखांकित किया और कहा कि हिन्दी उसके बोलने वालों के कारण लगातार विकसित हो रही है। उन्होंने हिन्दी भाषा की लोकप्रियता के लिए हिन्दी सिनेमा के योगदान का जिक्र किया। उन्होंने जटिल शब्दों के प्रयोग को हिन्दी भाषा के लिए अहितकर बताया। उन्होंने मोबाइल संदेशों में रोमन लिपि में लिखे हिन्दी शब्दों की ओर संकेत करते हुए कहा कि यह हिन्दी भाषा के प्रसार का एक अनूठा आयामा है। उन्होंने हिन्दी दिवस के आयोजन को एक नवीन और संभावनापूर्ण कलेवर प्रदान करने के लिए विभाग की प्रशंसा की।
हिन्दी विभाग के अध्यक्ष प्रो. माधव हाड़ा ने अतिथियों का स्वागत किया और व्याख्यान के विषय का प्रतिपादन किया। उन्होंने बताया कि हिन्दी दिवस पर विभाग ने कविता-पाठ, निबंध लेखन और सामान्य ज्ञान प्रतियोगिता का आयोजन भी किया है। इन प्रतियोगिता के विजेताओं को प्रमाण पत्र और पुरस्कार देकर सम्मानित किया जाएगा। सहायक आचार्य डॉ. नवीन नंदवाना ने अतिथियों का धन्यवाद ज्ञापित किया।

Print Friendly, PDF & Email
admin

doing active journalism from last 16 yrs. worked in leading news papers rajasthan patrika, dainik bhaskar.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *