कुमावत ने दशकों का मिथक तोड़ा : चतुर्वेदी

BY — October 11, 2012

भव्य शोभायात्रा के साथ महाराणा प्रताप फिल्म का भव्य वर्ल्ड प्रीमियर

udaipur. भाजपा नेता ललित किशोर चतुर्वेदी ने कहा कि आज तक महाराणा प्रताप पर कोई फिल्म नहीं बना पाया लेकिन डॉ. प्रदीप कुमावत ने इस मिथक को तोड़ा, यह राजस्थान सहित पूरे देश के लिये गौरव की बात है।

वे आलोक संस्कार विजन फिल्म्स एवं आलोक ऑडियो विज्यूअल्स प्रा. लि. के बैनर तले 5 साल के अथक प्रयासों से बनी ‘महाराणा प्रताप : दी फर्स्ट  फ्रीडम फाइटर’ के वर्ल्ड  प्रीमियर समारोह को संबोधित कर रहे थे। मुख्य अतिथि भाजपा नेता ललित किशोर चतुर्वेदी,  गोयल ब्रदर्स प्रकाशन के रोशन गोयल, राजपाल सिंह सिसोदिया महामंत्री भारतीय युवा जनता मोर्चा मध्यप्रदेश, अध्यक्ष आलोक संस्थान के चेयरमेन श्यामलाल कुमावत थे। विशिष्ट अतिथियों में नगर परिषद सभापति रजनी डांगी, डॉ. प्रेम भण्डारी, मोहन श्रीमाली, पुलिस अधीक्षक हरि प्रसाद शर्मा, एएसपी कालुराम रावत आदि थे। फिल्म के निर्माता-निर्देशक डॉ. प्रदीप कुमावत ने कहा कि फिल्म को देखकर स्वाभिमान, देश भक्ति और प्रताप के प्रति एक प्रेम का भाव जागेगा।

दो साल तक किया शोध : डॉ. कुमावत ने बताया कि महाराणा प्रताप पर फिल्म बनाने से पूर्व लगभग दो साल तक सिर्फ शोधकार्य किया। महाराणा प्रताप पर उपलब्ध साहित्य की मदद ली। इसमें कवि राज श्यामल दास के वीर विनोद के अलावा इतिहासकार गोपीनाथ शर्मा की किताबों में काफी सामग्री मिली। राजेन्द्र शंकर भट्ट की महाराणा प्रताप पर शोधपरक किताब, डॉ. देवीलाल पालीवाल की ऐतिहासिक किताबों से भी बहुत मदद मिली। यह एक यथार्थपरक फिल्म है। इसमें राजतिलक की परम्परा सहित हर चीज को बहुत बारीकी से पेश किया है। फिल्म में कॉस्ट्यूम्स के लिए मेवाड़ के परम्परागत कॉस्ट्यूम को ही काम में लिया गया है। इसके अलावा मशहूर चित्रकार रवि वर्मा ने जो चित्र बनाए हैं, उन्हें भी कॉस्ट्यूम के लिए आधार बनाया।
इस अवसर पर डॉ. प्रदीप कुमावत ने भावपूर्ण  कविता भी प्रस्तुत की। सभी कलाकारों की शोभायात्रा निकाला गयी। सभी कलाकार राजस्थानी वेशभूषा में मेवाड़ की शान मेवाड़ पगड़ी पहनकर आये। महाराणा प्रताप फिल्म पर आधारित कैलेण्डर का विमोचन किया गया। भामाशाहों का सम्मान किया गया। गोयल ब्रदर्स प्रकाशन के रोशन गोयल व मोहन श्रीमाली का सम्मान किया गया। इस अवसर पर विज्ञापन देने वाले सभी दानदाताओं के विज्ञापनों की पावर पाईन्ट स्लाईड के माध्यम से दिखाई गयी।
संगीत :  देश के जाने—माने गायक स्व. जगजीत सिंह ने इस फिल्म का एक महत्वपूर्ण गाना ‘याद आएगा हमेें छोड़ के जाने वाला..’ गाया है। साथ ही शैल हाड़ा ने ‘भारत के रणवीरों को..’ और ‘मायड़ थारो पूत कठै…’ ये दो गाने गाए हैं जो साँवरिया से हिट हुए और आज भी अपनी बुलन्द आवाजभ् से फिल्म इण्डस्ट्री की सेवा कर रहे हैं। ‘पग घुँघरू बाँध मीरा…’ गाना साधना सरगम ने गाया है जबकि ‘वीर प्रताप की देखो ये अमर कहानी…’ रूप कुमार राठौड़ ने। ‘राणा धीर धरम रखवाला…’ डॉ. प्रेम भण्डारी ने, ‘ये लहू रोती हुई शाम….’ भूपेन्द्र ने तथा ‘नीला घोड़ा रा असवार…’ और ‘अपने मालिक के इशारों को समझने वाला….’ ये दोनों गीत रूप कुमार राठौड़ ने गाए हैं।
आभार : इस अवसर पर डॉ. प्रदीप कुमावत ने अपने माता-पिता, आलोक संस्थान के बच्चे, अध्यापक सारे साथी कलाकारों का, प्रेम जी भण्डारी, रामेश्वार सोनी, कवि माधव दरक, सारे योद्धाओं का, पश्चिम क्षेत्र सांस्कृतिक केन्द्र, वन विभाग का, इतिहासकारों, मनमोहन, नारायण सिंह, संजय सोनी व अन्य, प्रिंट मीडिया का, इलेक्ट्रोनिक मीडिय़ा सहित सभी का आभार व्यक्त किया।

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admin

doing active journalism from last 16 yrs. worked in leading news papers rajasthan patrika, dainik bhaskar.

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