आंखों को नुकसान नहीं पहुंचाते वेजीटेबल कलर

BY — February 26, 2013

सरकारी सहयोग से हुआ बगरू प्रिन्ट्स के कारीगरों की आर्थिक स्थिति में सुधार

260212Udaipur. पिछले 12 वर्षो से सरकार द्वारा विभिन्न स्थानों पर कारीगरों के उत्थान हेतु लगाये जा रहे हेण्डीक्राफ्ट के मेलों के सकारात्मक परिणाम अब सामने आने लगे है। इन मेलों के लगाये जाने से कारीगरों को नये बाजार मिले है जिससे उनकी आर्थिक स्थिति में काफी सुधार हुआ है।

यह कहना है कि जयपुर के निकट बगरू क्षेत्र से आये हनुमान सहाय का। जो पिछले 12 वर्षो से रूडा द्वारा देश के विभिन्न हिस्सों में लगाये जा रहे हस्तशिप मेलों ने हर कारीगरों की आर्थिक स्थिति में काफी सुधार किया है। सरकार इन मेलों में कारीगरों को नि:शुल्क स्थान तो उपलब्ध कराती ही है साथ ही उनके आने-जाने एंव रहने तक का भी इतंजाम करती है। बगरू प्रिन्ट्स की खासियत यह है कि इसके वेजीटेबल रंग आंखों को भाने वाले होने के साथ-साथ ये सिर्फ कॉटन कपड़े पर ही प्रिन्ट होते है। पोलिस्टर कपड़े पर इनका रंग नहीं जमता है। वेजीटेबल रंगो से आंखों को कोई नुकसान नहीं होता है। बगरू प्रिन्ट्स के तहत मुख्य रूप से  सिंगल व डबल बेडशीट, सलवार सूट तथा साड़ी की बिक्री होती है। इनके लुभावने रंग  जनता को अपनी ओर बरबस ही आकर्षित करते है। बगरू प्रिन्ट्स मे भडक़ीले रंगों का उपयोग नहीं होता है।
260211हनुमान सहाय ने बताया कि एक डबल बेडशीट बनाने के लिए 400 लकड़ी के ब्लॉक का इस्तेमाल करना पडता है। इस कारण मेहनत के अनुपात में पूरी मजदूरी नहीं मिल पाती है। उदयपुर में 200 से लेकर 500 रूपयें तक में साड़ी, बेडशीट व सलवार सूट उपलब्ध है। रूडा के दिनेश सेठी ने बताया कि प्रतिदिन जनता का मेले के प्रति आकर्षण बढ़ता ही जा रहा है। मेले के प्रति जनता के बढ़ते रूझान को देखते हुए चुड़ी निर्माता बाहर से नई-नई डिजाईनों की विविध रंगों की चुडिय़ा मंगवायी जा रही है। चुडिय़ों के प्रति महिलाओं का आकर्षण देखे ही बनता रहा है।

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admin

doing active journalism from last 16 yrs. worked in leading news papers rajasthan patrika, dainik bhaskar.

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