सुनियोजित विकास की अनदेखी पर गंभीर होंगे परिणाम

BY — May 11, 2013

उदयपुर के 461 वें स्थापना दिवस पर विचार गोष्ठी

110506Udaipur. मोहनलाल सुखाड़िया विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. आई.वी. त्रिवेदी ने कहा कि उदयपुर के सुनियोजित विकास में हुई गलतियों को अगर अब भी नहीं सुधारा गया तो आने वाली पीढ़ियां हमें कभी माफ नहीं करेंगी।

वे मुख्यव अतिथि के रूप में उदयपुर विचार मंच, महाराणा प्रताप वरिष्ठी नागरिक संस्था न व नारायण सेवा संस्थाीन के तत्वेवधान में आयोजित विचार गोष्ठीा को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि उदयपुर की सांस्कृतिक धरोहर और प्राकृतिक सुषमा को बचाये रखने के काम को जन आंदोलन का रूप देना होगा। इसमें विश्वविद्यालय अपनी सकारात्मक भूमिका के साथ सदैव तैयार रहेगा। नगर निगम की निर्माण समिति के अध्यक्ष प्रेमसिंह शक्तावत ने अध्यक्षता करते हुए कहा कि स्वतन्त्रता के बाद उदयपुर के नियोजित विकास की अनदेखी  का परिणाम ही आज के उदयपुर की समस्या है। बेतरतीब विकास के लिए प्रशासन के साथ-साथ एक हद तक जनता भी जिम्मेदार है। अपने शहर के व्यवस्थित विकास में पूरी तरह रचनात्मक सोच के साथ आगे आना होगा।
नारायण सेवा संस्थान के संस्थापक कैलाश मानव ने कहा कि हमें इस शहर ने बहुत कुछ दिया है। अब बारी हमारी है। हम भी ऐसा कुछ करें कि यह ऐतिहासिक और प्राकृतिक सुषमा से आवेष्टित शहर अपने गौरव और गरिमा को कायम रखते हुए नित नया निखार पाता रहे।
विशिष्टर अतिथि प्रो. नरपतसिंह राठौड़ ने कहा कि नदियों को मोड़ने और जोड़ने की हम आज सिर्फ बातें ही करते है जबकि यह कार्य उदयपुर के महाराणाओं ने बहुत पहले ही शुरू कर दिया था जिसे अब आगे बढ़ाने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि सन 1670-80 के बीच उभेश्वर नदी जो पहले छोटे और बडे मदार में जाकर गिरती थी उसे धार गांव के पश्चिम में मोड़कर मोरवानी से जोड़ा गया। उन्होंने बताया कि उदयपुर बेसिन में औद्योगिक इकाइयों की स्थापना से काफी नुकसान हुआ है। प्रो. एस.के. गुप्ता ने सेटेलाईट टाउन उदयपुर के बाहर गोगुन्दा, मावली, वल्लभनगर आदि क्षेत्रों में विकसित करने और उदयपुर नगर को विश्व धरोहर की मान्यता दिये जाने पर जोर दिया।
सेठ ने कहा कि इस शहर की आर्थिक धुरी पर्यटन है जिस पर पूरे सोच विचार के साथ ध्यान दिया जाना चाहिए। शहर नगर निगम बन गया है, अब इसे बी-2 श्रेणी का दर्जा भी मिलना चाहिए। दिलीपसिंह राठौड़ ने पर्यटन विकास के कुछ आधाभूत बिन्दुओं पर चर्चा की तो प्रो. सज्जनसिंह राणावत ने कहा कि उदयपुर के भविष्य को सुन्दर और सुखद बनाने के लिए इसका अतीत ही आधार हो सकता है। यहां की झीलों और हेरिटेज इमारतों और शहर का संरक्षण किया जाना चाहिए। संयोजक विष्णु शर्मा ने उन समस्याओं का जिक्र किया जो शहर के अतीत को धुंधला करने पर तुली हैं। संस्थान निदेशक वंदना अग्रवाल ने अतिथियों का मेवाड़ी पाग व उपरणा पहनाकर अभिनन्दन किया। इससे पूर्व उदयपुर विचार मंच की ओर से चोसरलाल कच्छारा व महाराणा प्रताप वरिष्ठ नागरिक संस्थान की ओर से महासचिव भंवर सेठ ने अतिथियों का स्वागत किया। कवयित्री रामप्यारी भटनागर ने ईश वंदना प्रस्तुत की।

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admin

doing active journalism from last 16 yrs. worked in leading news papers rajasthan patrika, dainik bhaskar.

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