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पिछडे़ विद्यार्थियों के शिक्षकों के सामने असली चुनौती

BY — November 29, 2013

उच्च संस्थानों के शिक्षकों के पास नहीं होते विद्यार्थियों के साथ प्रयोग के अवसर

291107Udaipur. आईआईटी व आईआईएम जैसे संस्थानों के उच्च प्रतिशत अंक प्राप्त प्रतिभाशाली विद्यार्थियों के शिक्षकों के पास उनके साथ प्रयोग करने के अवसर नहीं होते। उनकी सामाजिक जिम्मेदारी भी अप्रत्यक्ष व तुलनात्मक रूप से कम हो जाती है।

ये विचार शिक्षाविद् डा. अरूण चतुर्वेदी ने नाईटर, भारत सरकार चण्डीगढ़ की ओर से विद्या भवन पॉलिटेक्निक में आयोजित ”पाठ्यक्रम, निर्माण, क्रियान्वयन व मूल्यांकन“ विषयक कार्यशाला के समापन समारोह में व्यक्त किये। उन्होंरने कहा कि असली चुनौती तो उन शिक्षकों के समक्ष है जिन्हें पिछड़े, ग्रामीण व जनजाति समुदायों के विद्यार्थियों के साथ कार्य करना होता है, पर इन्हीं शिक्षकों के पास प्रदर्शन व प्रयोग के बहुआयामी अवसर होते हैं।
चतुर्वेदी ने कहा कि तकनीकी शिक्षकों को अपनी रचनाशीलता व सृजनशीलता को निरन्तर बनाये रखना चाहिए। राजकीय महिला पॉलिटेक्निक के प्राचार्य सैयद इरशाद अली ने कहा कि शिक्षकों व विद्यार्थियों को पुस्तकालय जाने एवं निरन्तर पढ़ते रहने की आदत को बनाये रखना चाहिए। प्राचार्य अनिल मेहता ने बताया कि कार्यशाला में डॉ. सुनील दत ने कार्य विश्लेषण, डा. ए.बी. गुप्ता ने पाठ्यक्रम क्रियान्वयन के प्रभावी तरीके, डॉ. जयन्ती दता ने स्पष्ट सोचने को सीखना, सुदीति जिन्दल ने व्यक्तित्व विकास एवं संप्रेषण, प्रो. वी. पी. पुरी ने संसाधन प्रबन्धन, डॉ. एस. पी. बेदी ने विद्यार्थी आंकलन, प्रो. एस.के. भट्टाचार्य एवं अमरदेव सिंह ने उद्योग आधारित पाठ्यक्रम एवं उद्यमिता, प्रो. पी.के.  सिंगला ने प्रोजेक्ट कार्य, रिपोर्ट लेखन पर व्याख्यान दिए।

admin

doing active journalism from last 16 yrs. worked in leading news papers rajasthan patrika, dainik bhaskar.

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