‘नीतियां तो बहुत लेकिन क्रियान्वयन कमजोर’

BY — December 23, 2013

‘वरिष्ठ नागरिकों के लिए अधिकार और कर्तव्य 2013’ विषयक उदयपुर घोषणा पत्र जारी
सुखाडिय़ा दीक्षांत समारोह के अगले दिन हर वर्ष होगी संगोष्ठी

231204उदयपुर। वरिष्ठजनों के लिए आज सारे देश में कई नीतियां बनी लेकिन उनका क्रियान्वयन पक्ष बहुत कमजोर है। जिस गति से आज वरिष्ठजनों की संख्या बढ़ रही है उसी गति से सरकार को उनके सम्मान, सुरक्षा, स्वास्थ्य, आवास आदि की समुचित व्यवस्था करते हुए उन्हें सम्मानजनक जीवन देने का प्रयास करना चाहिए।

यह बात भंवर सेठ ने अपनी प्रस्तुत रिपोर्ट में कही और कुछ ऐसा ही सारांश ‘वरिष्ठ नागरिक: समस्याएं व चुनौतियां’ विषयक मोहनलाल सुखाडिय़ा विश्वविद्यालय सभागार में आयोजित राष्ट्रीय संगोष्ठी के अंतिम दिन उभर कर आया।
231205समापन पर उदयपुर घोषणा पत्र जारी किया जिसका विषय ‘वरिष्ठ नागरिकों के लिए अधिकार और कर्तव्य 2013’ है। उक्त घोषणा पत्र प्रो. संजय लोढा ने पढा़ जिसे नेशनल स्तर पर भी भेजा जाएगा। संगोष्ठी में चेयर पर्सन प्रो. के. एन. नाग ने कहा कि मुझे आज गर्व है कि जिन उद्देश्यों को लेकर हमने यह कार्यक्रम किया, वह सफल हुआ। हमें इस मूवमेंट को आगे बढाना है और जो भी सरकार इसे आगे बढाने में कार्य करेगी उसके सहयोग के लिए हम कटीबृद्ध हैं। उन्होंने संगोष्ठी के उद्देश्यों पर विचार रखते हुए कहा कि मेरे देश का वरिष्ठजन कैसे खुशहाल जिंदगी जिए व आने वाली समस्याओं से कैसे बचे इस पर एक उदयपुर घोषणा पत्र जारी कर उस पर उदयपुर स्थित सभी वरिष्ठजन प्रयत्नपूर्वक देश को दिशा निर्देश प्रदान करेंगे।
सेमिनार कार्डिनेटर प्रो. संजय लोढ़ा ने बताया कि इस सेमिनार में जो भी महत्वपूर्ण बिंदू उभरकर आए है, उस पर विश्वविद्यालय स्तर पर कार्य को गति प्रदान करते हुए आवश्यक कार्यवाही को अंजाम दिया जाना चाहिए। सेमिनार निदेशक डा. टीएसव दक एवं उपनिदेशक लक्ष्मीलाल धाकड़ ने कहा कि हमने उदयपुर में इस सेमिनार को आयोजित कर सारे देश में कार्यरत वरिष्ठ नागरिक संगठनों से इस एक कदम आगे बढ़ाने का प्रयास रहेगा।
संगोष्ठी में शैलेश मिश्रा ने बताया कि वृद्धों को उनके लिए बने घरों में नहीं उन्हें दिल में रखने की जरूरत है। वृद्धों के लिए बने घरों के बजाए ऐसी सोसायटी का निर्माण किया जाए जहां प्रथम व द्वितीय मंजिल पर केवल वृद्ध ही रहें। डा. टीएस माथुर ने उम्र के कम होने का कारण बीमारी बताया। साथ ही मानसिक समस्याओं को भी बताया। डा. आरएन मित्तल ने वृद्धों की हो रही हत्याओं के बारे में बताया तो वही डा. एसएल माथुर ने फिल्म बांगवान के माध्यम से बताया कि किस तरह विदेशी संस्कृति अपना रहे बच्चे मां बाप को अलग कर देते हैं। अत: कहीं भी काम करने जाए मगर उस माहौल के अनुरूप खुद ना बने। माता-पिता का सहयोग करें।
231206डॉ. के. एस. हिरण ने वरिष्ठ नागरिकों को त्रिवेणी संगम बताया और कहा कि उनके पास ज्ञान, कर्म, धर्म का अनुभव होता है। प्रेम बांटे एवं एक दूसरे का सहयोग करें। उन्होंने कहा कि वर्तमान में खुश रहे, यह देखकर दुखी ना हो कि दूसरा क्या कर रहा है। दूसरे सत्र में वृद्धों के साथ साथ युवाओं को जोडऩे की बात प्रो. वीपी सिंह ने कही। उन्होंने कहा कि इससे यह बात सामने आएगी कि वे वृद्धों के बारे में क्या सोचते हैं। डॉ. एल. एल. धाकड़ ने कहा कि सभी शरीर को स्वस्थ रखने की बात कहते हैं मगर आत्मा को स्वस्थ रखने की बात कोई नहीं करता तथा मनुष्य को सुख व दुख दोनों में एक समान रहना चाहिए। डा. वीना द्विवेदी ने गांवों की हो रही अवहेलना को बताया तो वहीं नीरज मेहता ने वृद्धों की समस्याओं पर विचार व्यक्त  किए।
डा. नरेशचंद्र शर्मा ने स्वस्थ रहने के लिए बताया कि पर्याप्त नींद के साथ सकारात्मक सोच व परिवार के साथ खुश रहना चाहिए। श्रीमती तारा दीक्षित ने कहा की जीवन के मंथन का का अमृत कलश है बुढ़ापा। हमें इसको संवारने के बारे में चिंतन करना है। हम अब तक जो कुछ नहीं कर पाए अब उसे पूरा करना चाहिए। टीकमचंद असावरा ने कहा कि सब कुछ है लेकिन मन शांत नहीं है, अत: मन से श्रद्धा से इसे स्वीकार करें की जो कुछ भी है यह तो धरती की शोभा है।
प्रो. विजयलक्ष्मी चौहान ने कहा कि संअकेक्षण की क्षमता से ही हम आगे बढ़ सकते हैं। वरिष्ठजन होना एक आत्मबोध है वो सकारात्मक होना चाहिए। संचालन गिरिराज चौहान ने किया। आभार एलएल धाकड ने जताया। मुख्य अतिथि महाराणा प्रताप कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति ओपी गिल ने कहा कि वृद्धजन सम्मान के योग्य है इनकी योग्यता का दोहन होना चाहिए। ये समाज की धरोहर है। वृद्धावस्था समस्या का समाधान नहीं बल्की भारतीय संस्कृति एवं संस्कारों को सम्मान देने की आवश्यकता है।
अध्यक्ष सुखाडिय़ा विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. आईवी त्रिवेदी ने कहा कि वर्ष में एक बार वरिष्ठजनों की संगोष्ठी होनी चाहिए और इसके लिए उन्होंने घोषणा करते हुए कहा कि दीक्षांत समारोह के अगले दिन एक संगोष्ठी होगी। उन्होंने कहा कि वृद्धजन समाज की धरोहर है, अनुभव की खान है हमें उनका सम्मान करना चाहिए। समापान समारोह में शैलेष मिश्रा, भंवर सेठ, डॉ. अरूण बाली, प्रो. बी. पी. भटनागर, डा. एसएल माथुर ने संगोष्ठी में अपने अपने विषयों पर रिपोर्ट प्रस्तुत की। वरिष्ठ नागरिक परिषद, सुखाडिय़ा यूनिवर्सिटी, इंडियन सोसायटी और विज्ञान समिति की ओर से आयोजित इस संगोष्ठी में महाराणा प्रताप वरिष्ठ नागरिक संस्थान, संजीवनी वरिष्ठ नागरिक सोसायटी, उमंग संस्थान, मुस्कान क्लब, राजस्थान कृषि अधिकारी परिषद ने भी सहयोग प्रदान किया है।

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admin

doing active journalism from last 16 yrs. worked in leading news papers rajasthan patrika, dainik bhaskar.

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