बुढ़ापा आना सहज, लेकिन स्वीकारना आसान नहीं

BY — March 24, 2014

आचार्य तुलसी वरिष्ठ नागरिक संस्थान की पांचवी कार्यशाला
विश्व में सर्वाधिक पीडि़त घुटनों के : औदिच्य
समाज का होली मेला 30 मार्च को महाप्रज्ञ विहार में

230303उदयपुर। बुढ़ापा आना स्वाभाविक है। वरिष्ठ नागरिकों को इसे सहजता से लेना चाहिए। आवश्यक यह है कि बुढ़ापा मन पर न आए। मन कभी बूढ़ा नहीं होना चाहिए। जवानी में धन कमाया है तो बुढ़ापे में आराम हो सकता है। जिसका वर्तमान अच्छा है, उसका भविष्य स्वत: ही अच्छा हो जाएगा। बुढ़ापा आना सहज है लेकिन इसे स्वीकार करना आसान नहीं है। ये विचार मुनि सुव्रत कुमार ने व्यक्त किए।

वे श्री जैन श्वेताम्बर तेरापंथी सभा की ओर से आचार्य तुलसी वरिष्ठ नागरिक संस्थान के तत्वावधान में रविवार को तेरापंथ भवन में आयोजित पांचवीं कार्यशाला को मुख्य वक्ता के रूप में संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि अपनी जीवन शैली को बदलें। जो बरसों से करते आए, इस उम्र में भी वही करते रहें तो थोड़ा असहज महसूस हो सकता है। अहंकार नहीं करें। छोटी से छोटी बात पर अहंकार हो सकता है। उनकी ओ दूर के मुसाफिर, मंजिल न भूल जाना रे.. गीतिका ने मधुर आवाज में प्रस्तुत की।
230304उनके साथ आए मुनि चैतन्य कुमार ने कहा कि बुढ़ापा आने के बाद पुत्रों के काम में हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए। सहन करेंगे तो सेवा अच्छी होगी। इस उम्र में अपना अधिकांश समय स्वाध्याय में लगाएं। सभी से समान व्यवहार रखें। भेदभाव न करें। एक महत्वपूर्ण बात और यह कि परिवार की बात परिवार में ही रहने दें। बाहर जाकर परिवार की बातें न करें। जगह जगह वृद्धाश्रम खुल रहे हैं। जो बेटे मां बाप की सेवा नहीं कर पाते, वे मां बाप को वहां भेज देते हैं। जिन बच्चों को पाल पोसकर बड़ा किया, उनका फर्ज है कि वे अपने मां बाप की सेवा करें। किसी की तपस्या में बाधक नहीं बनें बल्कि तपस्या में सहयोग करें। संतों का सान्निध्य लें ताकि शांति मिले।
अतिथि के रूप में शहर के युवा कवि राव अजातशत्रु ने वरिष्ठ नागरिकों को अपने चिर परिचित अंदाज में हास्य फुलझडिय़ां सुनाते हुए ठहाके लगवाए तो माता-पिता पर अपनी नई कविता सुनाकर सोचने पर भी मजबूर कर दिया।
आयुर्वेदाचार्य डॉ. शोभालाल औदिच्य ने वरिष्ठ नागरिकों को अमूमन होने वाली बीमारियों से बचने के तरीके बताए। उन्होंने कहा कि आज विश्व में सबसे अधिक पीडि़त नागरिकों की संख्या घुटनों से पीडि़तों की है। इसके बाद हाइपरटेंशन, डायबिटीज, थायराइड का नंबर आता है। ये सभी अधिकतर मानसिक तनाव के कारण होती हैं। उन्होंने छोटी छोटी बीमारियों के घरेलू उपचार बताए। घुटनों की तकलीफ के लिए भोजन के बाद सौंठ, अश्वगंधा, हल्दी एवं अजवायन लेने से काफी राहत मिलती है। इसी प्रकार एलर्जी के लिए चारोली, काली मिर्च एवं मिश्री खाने से काफी राहत मिलेगी। जुखाम के लिए दिन में 3 बार सात-सात काली मिर्च खाने से दो दिन में फर्क पड़ जाएगा। हल्दी सबसे बड़ा एंटीबायोटिक है। आज भी विदेशों में हल्दी और अदरक पर रिसर्च ही चल रहा है जो हमारे यहां शास्त्रोक्त है। सब्जी में हल्दी का छौंक नहीं लगाएं बल्कि सब्जी बनने के बाद उपर से हल्दी भुरकें जिसका लाभ अवश्य मिलता है। डायबिटीज से बचने के लिए दही, आलू, जूस, चावल इत्यादि का उपयोग नहीं करें।
230305स्वागत भाषण देते हुए सभाध्यक्ष राजकुमार फत्तावत ने कहा कि उधना (सूरत) में चातुर्मास के लिए जा रहे मुनि सुव्रत कुमार, मुनि चैतन्य कुमार, मुनि मंगल प्रकाश एवं मुनि प्रबोध कुमार का आज यहां हमें सान्निध्य मिला, हम उनके आभारी हैं। मुनि सुव्रत कुमार करीब डेढ़ दशक तक आचार्य तुलसी के सान्निध्य में चातुर्मास कर चुके हैं। गत 5 वर्षों में गोगुंदा, बाड़मेर, बायतू, दिल्ली एवं जगराव-पंजाब में चातुर्मास करने के बाद अब ऊघना-सूरत में इस वर्ष चातुर्मास है। वे सोमवार सुबह यहां से प्रस्थान करेंगे जहां से आगे काया स्थित जैन मंदिर में उनका विहार होगा। उन्होंने आचार्य तुलसी जन्म शताब्दी वर्ष में होने वाले विभिन्न कार्यक्रमों की जानकारी देते हुए कहा कि तेरापंथ समाज का होली मिलन समारोह 30 मार्च को महाप्रज्ञ विहार में होगा। इसके तहत सुबह 11 बजे से रात्रि 9 बजे तक पूरे दिन भर कार्यक्रम होंगे। इनमें बच्चों से लेकर युवाओं और वृद्धजनों तक के लिए कार्यक्रम शामिल हैं। अधिक जानकारी के लिए भवन में अध्यक्ष, मंत्री या कार्यक्रम संयोजक डी. पी. धाकड़ से सम्पर्क किया जा सकता है।
इससे पूर्व मंगलाचरण शशि चह्वाण, लाडजी कंठालिया एवं जसु डागलिया ने किया। पिछली आध्यात्मिक प्रतियोगिता के विजेता श्रीमती आजाद तलेसरा, शकुंतला पोरवाल, चन्द्रकांता वैद एवं केसर तोतावत तथा खेल स्पर्धाओं के विजेता छगनलाल बोहरा, सुरेन्द्र चौधरी, मोतीलाल इन्द्रावत एवं सौभाग्यसिंह नाहर को पारितोषिक प्रदान कर पुरस्कृत किया गया।
माह मार्च में जन्मदिन मनाने वाले कार्यशाला के प्रतिभागी वरिष्ठ नागरिकों लीला पोरवाल, पुखराज कटारिया, रोशनलाल कोठारी, शांतिलाल सिंघवी, सोरमदेवी कोठारी, ताराचंद सिंघवी, सुशीला झोटा, हुकमदेवी पोरवाल एवं करणसिंह खिमावत का उपरणा ओढ़ाकर सम्मान किया गया। इस दौरान मनोरंजन सत्र का आयोजन भी किया गया। इसमें वरिष्ठ नागरिकों ने अपनी अपनी प्रस्तुतियां दी। संचालन सभा के मंत्री अर्जुन खोखावत ने किया वहीं आभार उपाध्यक्ष सुबोध दुग्गड़ ने जताया। शताब्दी गीत शशि चव्हाण ने प्रस्तुत किया। अतिथि स्वागत की रस्म मंत्री अर्जुन खोखावत ने अदा की।

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admin

doing active journalism from last 16 yrs. worked in leading news papers rajasthan patrika, dainik bhaskar.

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