न्याय, सत्य, प्रेम व त्याग से ही राष्ट्रीय चरित्र का निर्माण : कनक श्रीजी

BY — May 4, 2014

राष्ट्रीय चरित्र में आचार्य तुलसी का योगदान विषयक व्याख्यानमाला

040506उदयपुर। न्याय, सत्य, प्रेम व त्याग इन चारों का जहां वर्चस्व होता है वह राष्ट्र सुखी, सम्पन्न और स्वस्थ चरित्र का राष्ट्र बनता है। इन चारों बातों को अपने जीवन में उतार कर अपने व्यक्तित्व में शामिल किया जाए तो व्यक्ति के सद्चरित्र का निर्माण होगा और फिर स्वत: राष्ट्र निर्माण भी हो जाएगा।

ये विचार साध्वी कनक श्रीजी ने रविवार को महाप्रज्ञ विहार में व्यक्त किए। वे आचार्य तुलसी जन्म शताब्दी समारोह के तहत वर्षपर्यन्त हो रहे आयोजनों में रविवार को श्री जैन श्वेताम्बर तेरापंथी सभा एवं सुविवि के जैन एवं प्राकृत विभाग के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित राष्ट्रीय चरित्र में आचार्य तुलसी का योगदान विषयक व्याख्यानमाला को संबोधित कर रही थीं।
उन्होंने आचार्य तुलसी के जीवन के कुछ अंशों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि देश की आजादी के बाद आचार्य तुलसी देश के प्रधानमंत्री पण्डित जवाहरलाल नेहरू से मिले और उनसे कहा कि आने वाले समय मेंचरित्र निर्माण के क्षेत्र में देश को व्यापक कार्य करने की आवश्यकता है जिसके लिए मैं आपको अपने 500 साधु-साध्वियों की फौज सौंपता हूं ताकि आप चरित्र निर्माण के क्षेत्र में विकास करें और राष्ट्रीय चरित्र का निर्माण कर सकें।
040507मुख्य अतिथि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय सम्पर्क प्रमुख हस्तीमल हिरण ने व्याख्यानमाला के विषय को अधिक स्पष्ट करते हुए कई महापुरुषों के जीवन से जुड़े उन अंशों की जानकारी दी जिनसे राष्ट्रीय चरित्र निर्माण में योगदान मिला। हिरण ने कहा कि संकीर्णता, कृतघ्नता, संकुचित, बलात धर्म थोपना धार्मिक विचारों में जोर-जबरदस्ती उचित नहीं है। विनाश करना भारत के चरित्र में नही है। आचार्य तुलसी ने समन्वय की दृष्टि दी, अणुव्रत और अनेकान्त की दृष्टि दी। भारत माता रत्नगर्भा है। अनेक श्रेष्ठ सपूतों ने विश्व के अनेक देशों में जाकर भारत की श्रेष्ठ संस्कृति का प्रचार किया पर बलात धर्म किसी पर भी थोपा नहीं।
साध्वी मधुलता ने कहा कि वृद्धावस्था में धर्म साधना करने की बात आचार्य तुलसी को अच्छी नहीं लगी। उनका कहना था कि युवा वर्ग धर्म के मार्ग पर चले उसे अपनाये। धर्म को युवा ही रहने दें। वृद्धावस्था में धर्म साधना के लिए पर्याप्त शक्ति नहीं रहती।
सभाध्यक्ष राजकुमार फत्तावत ने कहा कि आचार्य तुलसी जन्म शताब्दी कार्यक्रमों की शृंखला में यह चतुर्थ व्याख्यानमाला है। इससे पूर्व जन्म शताब्दी वर्ष के कार्यक्रमों में श्री जैन श्वेताम्बर तेरापंथी सभा ने रक्तदान, महिलाओं के लिए निशुल्क सिलाई प्रशिक्षण, युवाओं के लिए निशुल्क कम्प्यूटर प्रशिक्षण जैसे कई कार्य किये एवं कई आयोजन आगामी दिनों में किए जाएंगे। उन्होंने कहा कि आचार्य तुलसी युगदृष्टा थे जिन्होंने छह दशक पहले ही जान लिया था कि आने वाले समय में राष्ट्र किस दिशा में जाएगा। इसके लिए उन्होंने अणुव्रत आंदोलन का सूत्रपात किया और छोटे-छोटे व्रतों के माध्यम से चरित्र निर्माण के लिए अपना योगदान दिया।
तेरापंथ युवक परिषद के अध्यक्ष धीरेन्द्र मेहता, महिला मण्डल अध्यक्षा मंजू चौधरी, साध्वी वीणा कुमारी, साध्वी मधुलेखा, साध्वी समितिप्रभा ने भी विचार व्यक्त किए। आरंभ में साध्वी कनक श्रीजी के महामंत्र नवकार मंत्र से व्याख्यानमाला का शुभारम्भ हुआ। शताब्दी गीत महिला मण्डल की सीमा कच्छारा, मंजू फत्तावत व शशि चह्वाण ने द्वारा प्रस्तुत किया। संचालन सभा के उपाध्यक्ष छगनलाल बोहरा ने किया। आभार अणुव्रत समिति अध्यक्ष गणेश डागलिया ने जताया।

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admin

doing active journalism from last 16 yrs. worked in leading news papers rajasthan patrika, dainik bhaskar.

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