मनमौजी होना चाहिए कवि को भी : चतुर्वेदी

BY — July 23, 2014

साहित्य अकादमी का रचना पाठ कार्यक्रम

230703उदयपुर। वरिष्ठ कवि प्रो. नंद चतुर्वेदी ने कहा कि कवि को दुनिया की तमाम् दुश्चिन्ताओं के बीच थोड़ा सा मनमौजी भी होना चाहिए। थोड़ी दिल्लगी भी होनी चाहिए।

चतुर्वेदी बुधवार को यहां सामाजिक विज्ञान एवं मानविकी महाविद्याय सभागार में केन्द्रीय साहित्य अकादमी, नई दिल्ली की ओर से तथा हिन्दी विभाग के सहयोग से आयोजित युवा कवियों के रचना पाठ कार्यक्रम में बोल रहे थे। चतुर्वेदी ने कहा कि कवि को घुमक्कड़ होना चाहिए तथा विविध भाषाओं का अध्ययन करते हुए कविता कहने की कला सीखनी चाहिए। मुख्य अतिथि महाविद्यालय के अधिष्ठाता प्रो. शरद श्रीवास्तव ने कविता लेखन के क्षेत्र में ‘पाठ’ की उपेक्षा पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि रचनाकार को सदैव पाठक के मूड़ को पकड़ना होगा तभी रचना स्थायी हो पाएगी।
प्रथम सत्र में अनुश्री राठौड़ ने टूटती वर्जनाएं शीर्षक की कहानी में नशे के दुष्प्रभाव को संजीदगी से रेखांकित किया। आरती वैष्णव ने ‘ तुम हो कहीं’ तुम्हारे होने का अहसास है। सुना कर समां बांधा वहीं ड़ॉ. कुजन आचार्य ने ‘मन की कुछ कोरी दिवारें, उन पर तेरा नाम लिखा।’ नाम लिखा तो उसके भीतर कान्हा का चितराम दिखा। ’ रचना सुनाकर अभिभूत किया। इस सत्र में उर्मिला खटीक व जयेश नन्दवाना ने भी प्रभावी रचना पाठ किया। युवा कवयित्री स्वाति शकुन्त ने ‘तुम हरे अज्ञान का, गीत का वो ज्ञान दे।’ रचना के साथ ही अपनी अन्य प्रतिनिधि रचनाएं प्रस्तुत की। समालोचक प्रो. नवल किशोर के सान्निध्य में आयोजित दूसरे सत्र में युवा कलाकारों का आह्वान करते हुए भाषा में लय, कविता में बिम्ब की महत्ता स्वीकारी। पाठ करते वक्त रचनापाठ कर्ता में पूर्ण आत्म विश्वास होना चाहिए। रचना स्वयं कुछ कहे यह महत्वपूर्ण है। रचनाकार को अपने समय कि पत्रिकाएं पढनी चाहिए ऐसा न करके वह बहुत कुछ खो देता है। महेश बुनकर ने ‘ सोच कभी सृजन की बन्द हो’ कविता से समा बांधा। डॉ. नीता कोठारी, रीना मेनारिया, तरूश्री शर्मा, चेतन सीपी और पराग पटोत ने भी मर्मस्पर्शी रचनाएं सुनाकर रचना पाठ सत्र को उचाइयां प्रदान की। वरिष्ठ कवि डॉ. भगवतीलाल व्यास ने भी विचार व्य क्त  किए। कार्यक्रम संयोजक तथा केन्द्रीय साहित्य अकादमी साधरण सभा के सदस्य प्रो. माधव सिंह हाड़ा ने प्रारम्भ में अकादमी के कार्यक्रम का विस्तृत परिचय दिया। संचालन ड़ॉ. नीतू परिहार ने किया। धन्यवाद ज्ञापन डॉ. नवीन नन्दवाना ने किया।

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admin

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