एक-दूसरे की संस्कृति को समझने का माध्यम बनें : कालूबोविला

BY — October 18, 2015

21 श्रीलंका व 6 भारतीयों को मिला अचीवर्स अवार्ड

181009उदयपुर। सन कॉलेज ऑफ मेनेजमेन्ट एण्ड साइंस एवं मंा माई एंकर के साझे में आज फतहगढ़ पैलेस में अचीवर्स अवार्ड-2015 समारोह आयोजित किया गया। जिसके मुख्य अतिथि संासद अर्जुन लाल मीणा,विशिष्ठ अतिथि महापौर चन्द्रसिंह कोठारी,मोहनलाल सुखाडिय़ा विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. आई.वी.त्रिवेदी,अन्तर्राष्ट्रीय गोल्फर व सामाजिक कार्यकर्ता नीलम प्रताप रूडी,श्रीलंका के विदेश मामलों के निदेशक फिलिप मैथ्यू,श्रीलंका मानवाधिकार आयोग के महानिदेशक डीजेएस कालूबोविला, मंा माई एंकर की सुष्मिता शेखर व सन कॉलेज के अरूण माण्डोत मौजूद थे।

महापौर चन्द्र सिंह कोठारी ने श्रीलंका के अवार्डिज से शहर में रूककर इसके प्राकृतिक एवं झीलों के सान्दर्य को निहारने का आग्रह किया। जूरी सदस्य सलील भण्डारी ने बताया कि इस समारोह के लिए प्रतिभाओं का चयन करना बहुत कठिन कार्य था। श्रीलंका के विदेश मामलों के निदेशक फिलिप मैथ्यू ने बताया कि श्रीलंका में इस अवार्ड के लिए 400 से अधिक आवेदन आये थे जिसमें 21 प्रतिभाओं का चयन करना बहुत कठिन कार्य था लेकिन जूरी की सहायता से यह संभव हो पाया। समारोह को संबोधित करते हुए श्रीलंका मानवाधिकार आयोग के महानिदेशक डीजेएस कालूबोविला ने कहा कि भारत व श्रीलंका के बीच के रिश्तें दो पुत्रों के समान है। दोनों देशों ने संकट की घड़ी में एक-दूसरे को पूर्ण सहयोग किया है। यह समारोह एक-दूसरे देश की संस्कृति को समझने का माध्यम बना है। इसे आगे बढ़ाया जाना चाहिये। इस अवसर पर प्रदीप त्रिखा द्वारा म्यूजियम स्टडी पर लिखित पुस्तक का अतिथियों ने विमोचन किया।
181010विशिष्ठ अतिथि नीलम प्रताप रूडी ने कहा कि इस अवार्ड समारोह के लिए उदयपुर एक मात्र सर्वश्रेष्ठ स्थल था। इस अवार्ड समारोह से एक नई मित्रता की शुरूआत हुई है। यह मित्रता दोनों देशों के बीच पर्यटन को बढ़ावा देने में दिखार्ई देनी चाहिये। इससे पूर्व मा माई एंकर की सुश्मिता शेखर ने अतिथियों का स्वागत किया।
अचीवर्स अवार्ड से ये हुए सम्मानित-तीन केटेगरी में अवार्डिज का चयन किया गया। सोश्यल वर्क में जिसमें एमआई अबुल कासिम, देशामन्या डीजे मादवाला, एमसीसी उदयांगा, एसएम प्रदीप बान्द्रा सेनानायके, एसआरएम मोहम्मद साराफतहुल्ला, डब्ल्यूआरआर समान्था राजपक्षे, दिलीप निकसन समरसिंघे, वालिसुन्दरा मुदियासेलेगे दयराथन्हा वालिसुन्दरा, एस. अरूलनंदम, दहा अमुना कोलोम्बेज लायनेल, देशबन्धु पी. रासिहा, वेथिलिंगम सिवारासा, एमएसीएम सनून, जिनी श्रीवास्तव, रविन्द्रपाल सिंह कप्पू, कल्चर केटेगरी में भूपेश कावडिय़ा, शकुन्तला पंवार, इनोवेटिव बिजनेस केटेगरी में डीडी लंका रासनजना, केएडीयूआई साराथचन्द्रा, एएम थनान्यगम, एमसी अशोक कुमार, डॉ. ए थिलक विक्रमाराच्ची, योहन सेम्यूल अरूमुगंम, जिमुनी चुलंगामलिथ डे सिल्वा बुद्धिप्रदीप नियादंदुपोला, पुनीत तलेसरा व मधु चन्द्रा को अतिथियों कोठारी, त्रिवेदी, श्रीमती रूडी, फिलिप मैथ्यू व कसलबोविला ने पगड़ी पहनकार, उपरना ओढ़ाकर एवं स्मृतिचिन्ह प्रदान किया। इन प्रतिभाओं में विजनेसमेन, चार्टर्ड अकाउन्टेन्ट, सामाजिक कार्यकर्ता शामिल थे।
विशिष्ठ अतिथि प्रो. आईवी त्रिवेदी ने कहा कि अगले वर्ष श्रीलंका में सार्क देशों के कुलपतियों का सम्मेलन अगले वर्ष आयोजित होगा। उन्होंने आयोजकों से निवेदन अगले वर्ष यह अवार्ड समारोह विश्वविद्यालय को मेजबानी करने का अवसर प्रदान करें। संासद अर्जुनलाल मीणा ने कहा कि भारत व श्रीलंका के दोनों राष्ट्रगान का लेखन रविन्द्रनाथ टैगोर ने किया। भातर व श्रीलंका के बीच व्यापारिक एंव संास्कृतिक कार्यो को समझने के अवसर में वृद्धि होगी। इस अवसर पर अरूण माण्डोत सहित जूरी सलील भण्डारी, पीके जैन सहित अन्य सहयोगियों का सम्मानित किया गया। धन्यवाद अरूण माण्डोत ने ज्ञापित किया।

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