गुरू के सानिध्य से है होती जीवन की काया पलट : नीलाजंनाश्री

BY — July 4, 2017

स्वर लहरियों के बीच चातुर्मास प्रवेश

उदयपुर। साध्वी नीलाजंनाश्री ने कहा कि जीवन में गुरू का सानिध्य मिलने से मनुष्य के जीवन की काया पलट हो जाती है। इसलिये मनुष्य को अपने जीवन में गुरू की शरण में अवश्य जाना चाहिये।

श्वेताम्बर जैन समाज के प्रथम दादा गुरू वे आज मेवाड़ मोटर्स लिंक रोड़ स्थित श्री जैन श्वेताम्बर वासुपूज्य महाराज मंदिर ट्रस्ट जिनदत्तसुरि दादावाडी में चातुर्मास प्रवेश के बाद आयोजित धर्मसभा को संबोधित कर रही थी। उन्होंने कहा कि जैन श्वेताम्बर के वर्तमान सामाजिक स्वरूप के प्रथम दादागुरू युग प्रधान आचार्य जिनदत्त सूरी ने अपने जीवन में एक दिन में 500 श्रावक एवं 700 श्राविकाओं के दीक्षित कराकर एक शुभ संदेश दिया था। दादा गुरू गच्छ, समाज तथा सम्प्रदाय की सीमाओं से परे थे। उनका जीवन श्रमण संस्कृति का ऐसा जगमगाता पंुज है जो शताब्दियों के काल खण्ड प्रवहन के उपरान्त भी हमें आत्म विकास की राह दिखलाता है। हमारंे व्यवहार,चरित्र एवं साधना के मार्ग को आलोकित करते है।
दोपहर में साध्वी नीलंाजनाश्री आदिद ठाणा-3 की निश्रा में दादा गुरू जिनदतत सूरी की 863 वीं पुण्य तिथि पर पूजा पढ़ाई गई। जिसमें सैकड़ो श्रावक-श्राविकाआंे ने भाग लेकर भक्ति भाव से पूजा अर्चना की।
इससे पूर्व नीलाजनंाश्री आदि ठाणा-3 की भव्य चातुर्मासिक शोभायात्रा सुरजपेाल बाहर स्थित ज्योति होटल से प्रारम्भ हुई। शोभायात्रा में वासुपूज्यभक्ति मण्डल की महिलाएं मंगल कलश लिये,बेण्ड बाजे स्वर लहरियंा बिखेरते हुए साथ चल रहे थे। शोभायात्रा 9 बजे दादावाड़ी में पंहुच कर धर्मसभा में परिवर्तित हुई। इस अवसर पर समारोह के मुख्य अतिथि मोहनलाल सुखाड़िया विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. उमाशंकर शर्मा, विशिष्ठ अतिथि चन्द्रसिंह कोठारी,महासभा के अध्यक्ष तेजसिंह बोल्या,डॉ.शैलेन्द्र हिरण, मनोहरसिंह नलवाया,ट्रस्ट के राज लोढ़ा,चातुर्मास के मुख्य संयोजक किरणमल सावनसुखा भोपालसिंह दलाल, गजेन्द्र भंसाली,कपिल लोढ़ा, गोवर्धन दोशी, प्रतापसिंह चेलावत,तथा दलपत दोशी तथा साध्वीश्री के प्रवेश के समय मुबुंई, बीकानेर, बिजयनगर, सूरत आदि अनेक स्थानों से आये सैकड़ों श्रावक मौजूद थे।

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admin

doing active journalism from last 16 yrs. worked in leading news papers rajasthan patrika, dainik bhaskar.

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