फोर्ब्स इण्डिया टॉप 50 में हिन्दुस्तान जिंक शामिल

BY — July 25, 2017

राजस्थान की एकमात्र तथा प्राकृतिक संसाधन कंपनी में भी एकमात्र कंपनी

उदयपुर। फोर्ब्स इण्डिया ने 50 शीर्ष भारतीय कंपनियों की सूची जारी की है जिसमें एकमात्र प्राकृतिक संसाधन कंपनी के रूप में हिन्दुस्तान ज़िंक को शामिल किया गया है। फोर्ब्स इण्डिया ने अयस्क के फायदे, लागत पर नियंत्रण, अधुनातन टेक्नोलॉजी का उपयोग तथा त्वरित रूप से एकीकृत परिचालनों को अपनाना आदि को कंपनी के मुख्य आकर्षण के रूप में केन्द्रित किया गया है।

हिन्दुस्तान जिंक के मुख्य कार्यकारी अधिकारी श्री सुनिल दुग्गल ने खुशी व्यक्त करते हुए कहा कि हिन्दुस्तान जिंक फोर्ब्स इण्डिया सुपर 50 कंपनियों की सूची 2017 में शामिल होने से अति प्रसन्नता हो रही है। हमारी मुख्य दक्षता लागत पर नियंत्रण और उत्पादन मात्रा में वृद्धि करना है। समय-समय पर भारत में जस्ता की खपत कई बार बढ़ी है। श्री दुग्गल ने बताया कि बुनियादी ढांचा, सौंदर्य प्रसाधन, दवाइयॉं, पेंट, रबर, सर्जिकल उपकरण, प्लास्टिक, वस्त्र, साबुन और बैटरी जैसे बाजारों में जस्ता के उपयोग के साथ ही विस्तार किया गया है।
दुग्गल ने कहा कि जंग का सुरक्षा पर सीधा प्रभाव पड़ता है जिससे रेलवे जैसे क्षेत्रों, तटीय क्षेत्रों के आस-पास आधारभूत ढांचे, ऑटोमोबाइल और ऊर्जा क्षेत्रों पर अधिक ध्यान देने की ज़रूरत है।
तटवर्ती इलाकों के निकट विषेष रूप से निर्मित ठोस संरचनाओं की गिरावट के लिए प्रमुख कारणों में से जंग एक है। नमी के साथ तटीय लवण से प्रभावित धातु सतहों से इमारतों में प्रवेष कर इमारत को नुकसान पहुंचाते हैं। मूल रूप से कहना है कि जब स्टील को जंग लग जाता है, तो स्टील का घनत्व बढ़ जाता है जिससे स्ट्रक्चर में दरारें आ जाती है, जो बाद में पतन का कारण बन सकती है।
एक और महत्वपूर्ण क्षेत्र है ऑटोमोबाइल जिस पर अधिक ध्यान देने की आवष्यकता है। भारतीय कार निर्माता घरेलू बाजार में निर्मित कारों के लिए लगभग 3 प्रतिषत गेलवनाईज का उपयोग करते हैं। यद्यपि एक भारतीय कार निर्माता उसी मॉडल की कारों के लिए 70 प्रतिषत गेलवनाईज का उपयोग करती हैं। ज्ञातव्य रहे कि यूरोप, उत्तरी अमेरिका, कोरिया और जापान में कार निर्माता दषकों से कार बॉडी पैनलों के लिए गेलवनाईज का उपयोग कर रहे हैं और कम से कम 10 वर्षों की जंग की गारंटी भी प्रदान करते हैं। जबकि भारतीय उपभोक्ताओं के लिए बनाई जाने वाली अधिकांष कारों के लिए ऐसी कोई सुरक्षा नहीं है। भारत में 60 प्रतिषत से अधिक कारों की सतह पर जंग लगा है जो स्टील की मजबूती और कार की लाईफ को कम कर देता है जिससे सुरक्षा के लिए खतरा उत्पन्न होता है। सबसे बड़ी बात यह है कि इसके लिए न तो कोई सरकारी पॉलिसी है और न ही उपभोक्ताओं को इन मानकों के बारे में जानकारी है।
रेलवे की पटरियों का गैलेवेनाईजिंग केवल रेल गाड़ियों की सुरक्षा के लिए ही नहीं बल्कि रेलवे टेªक्स की भी ज्यादा लाईफ बढ़ाता है। 125,000 किलोमीटर से ज्यादा फैले भारत में रेल पटरियां विष्व का तीसरा सबसे बड़ा समूह है। जंग रहित रेल पटरियों के पूर्व-प्रतिस्थापन के कारण 450 करोड़ रुपये का वार्षिक नुकसान होता है। कई दुर्घटनाओं के लिए फिष-प्लेटों को जिम्मेदार माना गया है। न सिर्फ फिष-प्लेटें बल्कि बोल्टों को भी सुरक्षा की ज़रूरत है जो जंग से सुरक्षा करती है। विषेषज्ञों के अनुसार जंग के कारण प्रतिवर्ष लगभग 4 प्रतिषत जीडीपी का नुकसान हो रहा है जो रेलगाड़ियों में गेलवनाईज के माध्यम से रोका जा सकता है।
जब भारत स्मार्ट सिटीज प्रोजेक्ट, डिजिटल इण्डिया और मेक इन इण्डिया जैसी परियोजनाओं का संचालन कर रहा है तो ऊर्जा क्षेत्र और ग्रामीण विद्युतीकरण पर अधिक जोर दिये जाने की ज़रूरत है। हाई वोल्टेज लाइनों के आगमन के बाद से इलेक्ट्रिक यूटिलिटी मार्केट में हॉट डिप गेलवनाईज स्टील का उपयोग किया गया है। भावी पीढ़ी की सुविधा, सबस्टेषन, टॉवर और नवीनीकरणीय ऊर्जा घटकों में गेलवनाईज्ड किसी भी वैष्विक अर्थव्यवस्था के लिए रीढ़ की हड्डी है। जब भारत हर बुनियादी ढांचा के आधार पर प्रत्येक गांव में बिजली उपलब्ध कराने के लिए प्रयासरत है तो बिजली ट्रांसमिषन को कई सालों तक सुरक्षित रखने की जरूरत है।
दुनिया भर में लगभग 50 प्रतिशत जस्ता खनित का गेलेवेनाईजिंग में उपयोग, 17 प्रतिषत जस्ता मिश्र धातु के लिए, 17 प्रतिशत पीतल और कांस्य बनाने के लिए, 6 प्रतिषत जस्ता सेमी-मैन्यूफेक्चरिंग में, 6 प्रतिषत रसायनों में और अन्य विविध प्रयोजनों के लिए 4 प्रतिषत का उपयोग किया जाता है।

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admin

doing active journalism from last 16 yrs. worked in leading news papers rajasthan patrika, dainik bhaskar.

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