मीरा की साहित्यिक संस्कृति आज भी प्रेरणादायी : शेखावत

BY — April 13, 2018

विद्यापीठ – मीरा पीठ की ओर से पहला व्याख्यानमाला

उदयपुर। सामाजिक राजनीतिक या आर्थिक क्षेत्र चाहे कोई भी हो महिलाए किसी से भी कम नहीं है। यह बात 1600 वी शताब्दी में मीरा बाई ने साहित्यिक संस्कृति और भक्तिकाल से सिद्ध कर दी थी। मीरा की साहित्यिक, संस्कृति आज भी सभी के लिए प्रेरणादायी है चाहे इनके संकलन में हजारो वर्ष गुजर गये हो लेकिन आज भी उनकी पवित्रता और सत्यता पर कोई दो राय साबित नही कर सकता।

ये विचार शुक्रवार को जनार्दनराय नागर राजस्थान विद्यापीठ के संघटक कन्या महाविद्यालय में मीरा पीठ की ओर से आयोजित मीरा और भक्ति मार्ग विषयक पर आयोजित व्याख्यानमाला में इतिहासविद् व वरिष्ठ साहित्यकार प्रो. कल्याण सिंह शेखावत ने कही। अध्यक्षता करते हुए कुलपति प्रो. एस.एस. सारंगदेवोत ने कहा कि अगर हमें भक्ति का मार्ग अपनाना है तो अपने सभी बंधनो से मुक्त होना होगा। जब तक हम इन बंधनों से जुडे रहेगे तब तक हम न तो भक्ति कर सकते, न किसी की भलाई कर सकते, और न सफल हो सकते है। वर्तमान दौर में महिलाओं को सफल होना है तो मीरा के व्यक्तिव एवं कृतित्व को जानना होगा, मीरा बाई ने जिस तरह चुनौतियों का सामना करते हुए आगे बढी उसे सीख लेनी चाहिए। कुलपति प्रो. सारंगदेवोत ने समारेाह में मीरा बाई समर्पण पुरस्कार की घोषणा की जो मैधावी छात्रा को दी जायेगी। इस अवसर पर विशिष्टे अतिथि प्रो. जीएम मेहता, सहायक कुलसचिव सुभाष बोहरा, डा. सरोज गर्ग, डा. अमिया गोस्वामी, डा. अर्पणा श्रीवास्तव ने भी अपने विचार व्यक्त किए । प्रारंभ में अतिथियों का स्वागत समन्वयक डा. अर्पणा श्रीवास्तव ने किया। संचालन डा. रेखा कुमावत ने किया जबकि आभार डा. सीमा धाबाई ने जताया।
पुस्तक विमोचन व अभिनन्दन:- प्राचार्य डा. अर्पणा श्रीवास्तव ने बताया कि समारोह में डा. सीमा धाबाई द्वारा सम्पादित जनजातियों के विकास में आवासीय विद्यालयों की भूमिका पुस्तक का विमोचन अतिथियों द्वारा किया गया। प्रो. कल्याण सिंह शेखावत का उपरणा, पगडी व मीरा बाई की तस्वीर भेट कर सम्मानित किया गया।

Print Friendly, PDF & Email
admin

doing active journalism from last 16 yrs. worked in leading news papers rajasthan patrika, dainik bhaskar.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *